सुप्रीम कोर्ट ने गोवा नाइटक्लब अग्निकांड में लूथरा ब्रदर्स के जमानत रद्द फैसले को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश को बरकरार रखते हुए नाइटक्लब के मालिकों सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की जमानत रद्द कर दी। तीनों को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया गया और अग्निकांड में 25 लोगों की मौत तथा 50 से अधिक घायल होने का उल्लेख किया गया।

सौजन्य से:- Jagran
गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में लूथरा ब्रदर्स को सुप्रीम कोर्ट से झटका, बॉम्बे HC का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने गोवा नाइटक्लब अग्निकांड मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।
- नाइटक्लब मालिकों की जमानत रद्द, दो हफ्ते में सरेंडर।
- अग्निकांड में 25 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें गोवा के एक नाइटक्लब के मालिकों की जमानत रद कर दी गई थी। इस नाइटक्लब में लगी आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने हाई कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश को बरकरार रखा। सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये तीनों नॉर्थ गोवा के अर्पोरा इलाके में बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के को-ओनर हैं, जहां पिछले साल 6 दिसंबर को लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
दो हफ्ते में सरेंडर करने का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया और निचली अदालत से कहा कि वह आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाकर मामले की सुनवाई में तेजी लाए। लूथरा ब्रदर्स की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और सिद्धार्थ दवे ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर जानबूझकर किया गया अपराध नहीं है, बल्कि यह कथित लापरवाही का मामला है।
दवे ने कहा कि लूथरा ब्रदर्स की तरफ से ऐसा कोई काम नहीं किया गया जिससे मौतें हुईं। उन्होंने कहा, "आईपीसी की धारा 304, पार्ट II इस मामले में पूरी तरह से लागू नहीं होती और कभी नहीं हो सकती। मेरी तरफ से ऐसा कोई काम नहीं हुआ जिससे मौत हुई हो। ज्यादा से ज्यादा अगर प्रॉसिक्यूशन इस मामले में सफल होना चाहता है तो यह धारा 304A (लापरवाही से मौत) के तहत हो सकता है।"
अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा?
जस्टिस दत्ता ने सिंघवी से पूछा कि रेस्टोरेंट में कितने लोगों की जान गई। सीनियर वकील ने बताया कि मरने वालों की संख्या 25 थी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले में दो बुनियादी गलतियां हैं। उन्होंने बताया कि मामले में कई अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। वहीं, गुप्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि बिजनेस में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ दस प्रतिशत है और इस घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिकाएं
गोवा की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और स्टैंडिंग काउंसिल सुरजेंदु शंकर दास ने तीनों की याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि हाई कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते में सरेंडर करने के लिए कहा है। याचिकाओं को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि उन्हें सरेंडर करने के लिए आज से दो हफ्ते का समय दिया जाता है।
इस अग्निकांड के कुछ समय बाद लूथरा फैमिली थाईलैंड के फुकेत चली गई, जिसके बाद उनके खिलाफ इंटरपोल का ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। भारतीय मिशन के दखल के बाद थाई अधिकारियों ने 11 दिसंबर को फुकेत में इन दोनों को हिरासत में ले लिया। भारत लाए जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने 16 दिसंबर, 2025 को गोवा पुलिस को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को तीनों की जमानत रद कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों पर ठीक से विचार करने में नाकाम रहा और यह मानने में गलती की कि अपराध हत्या या डकैती जितना गंभीर नहीं था।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी से पता चलता है कि रेस्टोरेंट बिना लाइसेंस के चल रहा था और उसका ढांचा भी गैर-कानूनी था। साथ ही आरोपी और उनके पार्टनर कथित तौर पर जानते थे कि बिना जरूरी सुरक्षा इंतजामों के जगह के अंदर आतिशबाजी करने में क्या जोखिम हैं। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दो हफ्ते के अंदर सेशंस कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था।
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