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Gurugram News: अच्छे आचरण का निर्देश, अदालत ने दो दोषियों को परिवीक्षा पर छोड़ा

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25 अगस्त 2026 को 02:56 pm बजे
Gurugram News: अच्छे आचरण का निर्देश, अदालत ने दो दोषियों को परिवीक्षा पर छोड़ा

सौजन्य से:- Amar Ujala

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सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने और झगड़ा करने का मामला, 23 मई 2026 को सेक्टर-65 थाना में हुई थी कार्रवाई

अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रजत वर्मा की अदालत ने सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने और झगड़ा करने के दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। कार्तिक और नितिन को 10,000 रुपये के परिवीक्षा बॉन्ड पर छह महीने के लिए छोड़ा गया है।

दोषी ठहराए जाने के बाद, कार्तिक और नितिन ने अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले हैं और भविष्य में ऐसा अपराध नहीं दोहराएंगे। सहायक लोक अभियोजक आरती सोलंकी ने नरमी न दिखाने की अपील की। अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए उन्हें अपराधी परिवीक्षा अधिनियम की धारा 4 के तहत परिवीक्षा पर रिहा करने का निर्णय लिया। उन्हें छह महीने तक शांति और अच्छे व्यवहार बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।

यह घटना 23 मई, 2026 को सेक्टर-65 पुलिस थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस उपनिरीक्षक गौरव गश्त पर थे जब उन्होंने सेक्टर-64 स्थित शराब की दुकान के पास दो व्यक्तियों को शराब पीते और झगड़ा करते देखा। इन व्यक्तियों की पहचान कार्तिक और नितिन के रूप में हुई। पुलिस ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 194(2) और पंजाब आबकारी अधिनियम की धारा 72सी के तहत गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए सहायक उपनिरीक्षक प्रदीप को गवाह के रूप में पेश किया। बचाव पक्ष ने आरोपों से इन्कार करते हुए झूठे फंसाने का दावा किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियोजन पक्ष के मामले को सही पाया।

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अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने अपना मामला सफलतापूर्वक साबित किया है। जांच अधिकारी की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों ने शराब पीने या झगड़ा न करने का कोई बचाव पेश नहीं किया। पुलिस अधिकारी की गवाही पर भी भरोसा किया गया क्योंकि उनके और अभियुक्तों के बीच कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी।

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अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रजत वर्मा की अदालत ने सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने और झगड़ा करने के दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। कार्तिक और नितिन को 10,000 रुपये के परिवीक्षा बॉन्ड पर छह महीने के लिए छोड़ा गया है।

दोषी ठहराए जाने के बाद, कार्तिक और नितिन ने अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले हैं और भविष्य में ऐसा अपराध नहीं दोहराएंगे। सहायक लोक अभियोजक आरती सोलंकी ने नरमी न दिखाने की अपील की। अदालत ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए उन्हें अपराधी परिवीक्षा अधिनियम की धारा 4 के तहत परिवीक्षा पर रिहा करने का निर्णय लिया। उन्हें छह महीने तक शांति और अच्छे व्यवहार बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।

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यह घटना 23 मई, 2026 को सेक्टर-65 पुलिस थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस उपनिरीक्षक गौरव गश्त पर थे जब उन्होंने सेक्टर-64 स्थित शराब की दुकान के पास दो व्यक्तियों को शराब पीते और झगड़ा करते देखा। इन व्यक्तियों की पहचान कार्तिक और नितिन के रूप में हुई। पुलिस ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 194(2) और पंजाब आबकारी अधिनियम की धारा 72सी के तहत गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए सहायक उपनिरीक्षक प्रदीप को गवाह के रूप में पेश किया। बचाव पक्ष ने आरोपों से इन्कार करते हुए झूठे फंसाने का दावा किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियोजन पक्ष के मामले को सही पाया।

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अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने अपना मामला सफलतापूर्वक साबित किया है। जांच अधिकारी की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों ने शराब पीने या झगड़ा न करने का कोई बचाव पेश नहीं किया। पुलिस अधिकारी की गवाही पर भी भरोसा किया गया क्योंकि उनके और अभियुक्तों के बीच कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी।

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