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गिरिबाला की जमानत अर्जी पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में आरोपित हैं सास गिरिबाला, जमानत अर्जी पर अदालत ने फैसला लेने से पहले कई अदालतों में सुनवाई की गई।

24 जुलाई 2026 को 09:13 pm बजे
गिरिबाला की जमानत अर्जी पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा

सौजन्य से:- Jagran

त्विषा शर्मा केस: अदालतों में घूमती रही पूर्व जज गिरिबाला की जमानत अर्जी, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

मॉडल व अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपित मृतका की सास सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत आवेदन पर शुक्रवार को ल ...और पढ़ें

HighLights

- त्विषा शर्मा मौत मामले में आरोपित हैं सास गिरिबाला

- गिरिबाला अर्जी पर सुनवाई से कई जजों ने स्वयं को किया था अलग

जेएनएन, भोपाल। मॉडल व अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपित मृतका की सास सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत आवेदन पर शुक्रवार को लंबे घटनाक्रम के बाद आखिरकार सुनवाई पूरी हो गई। दिनभर फाइल अलग-अलग अदालतों में स्थानांतरित होती रही।

पहले एक न्यायाधीश के अवकाश पर होने से सुनवाई नहीं हो सकी, जबकि दूसरी न्यायाधीश ने पूर्व पेशेवर संबंधों का हवाला देते हुए स्वयं को मामले से अलग कर लिया।

इसके बाद प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर मामला सीबीआई न्यायालय के विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा की अदालत में भेजा गया, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।

बता दें कि 12 मई को त्विषा शर्मा कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। मामले की जां सीबीआइ को सौंपी गई और गिरिबाला व समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया गया। मां-बेटा भोपाल सेंट्रल जेल में हैं।

बता दें कि गिरिबाला की नियमित जमानत अर्जी 20 जुलाई को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश की अदालत में प्रस्तुत की गई थी। 10वीं अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।

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इसके बाद 8वीं अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश सुरेखा मिश्रा ने यह कहते हुए स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया कि वह पहले भी इस मामले की अग्रिम जमानत याचिका से स्वयं को अलग कर चुकी हैं, क्योंकि वह गिरिबाला के बेटे और त्विषा के पति समर्थ सिंह के पारिवारिक समारोह में शामिल रही हैं।

इसके बाद 11वीं अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव ने भी यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि समर्थ सिंह उनके एक निजी उपभोक्ता आयोग संबंधी प्रकरण में अधिवक्ता के रूप में पेश हो चुके हैं।

बदली अदालत, तब जाकर शुरू हुई सुनवाई

शुक्रवार को मामला फिर से 10वीं अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में भेजा गया, लेकिन उनके अवकाश पर होने के कारण फाइल जिला व अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीलम शुक्ला के समक्ष रखी गई।

नीलम शुक्ला ने यह कहकर स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया कि उन्होंने ग्वालियर में गिरिबाला के अधीन न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद मामला न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा की अदालत में पहुंचा।

यहां बचाव पक्ष ने गिरिबाला की उम्र, जेल में करीब आठ किलो वजन कम होने, डायरिया और वायरल फीवर से पीड़ित होने तथा उनकी सौ वर्षीय बीमार मां की देखभाल की आवश्यकता का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। वहीं सीबीआइ ने जमानत का विरोध किया।

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