इलाहाबाद हाई कोर्ट में DGP राजीव कृष्ण ने आदेशों के पालन का भरोसा दिया
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ द्वारा उठाए गए जांच‑रिपोर्ट, रिकार्ड और सीसीटीवी फुटेज की देरी संबंधी प्रश्नों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अदालत के सभी आदेशों का सटीक पालन किया जाएगा और देरी को रोकने के लिए आवश्यक कमेटियों की स्थापना की जाएगी। कोर्ट ने इस आश्वासन को स्वीकार किया और आगे की कार्यवाही के लिए निर्देश जारी किए।

सौजन्य से:- jagran.com
DGP किस मामले में इलाहाबाद HC में हुए तलब? आश्वस्त किया कि अदालत के आदेशों का अनुपालन होगा
डीजीपी राजीव कृष्ण मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में अदालती आदेशों का अक्षरशः पालन होगा और जवाब दाखिल करने में देरी नहीं होगी।
HighLights
- डीजीपी ने सजा दर का दिया हवाला तो हाई कोर्ट ने कहा- हमारी चिंता खराब व अधूरी जांच
- पुलिस कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी, पुलिस प्रमुख ने दिया आदेशों के अनुपालन का भरोसा
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अदालत के आदेशों के अनुपालन में पुलिस अधिकारियों की कथित हिचकिचाहट पर स्पष्टीकरण दिया। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने पुलिस विवेचना की गुणवत्ता, समय पर रिकार्ड पेश करने और विवेचना से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की।
कोर्ट ने कहा- यह समस्या केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि कई मामलों में हाई कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। डीजीपी ने सजा दर का हवाला दिया। इस पर कोर्ट ने कहा- हमारी चिंता सजा दर नहीं, बल्कि खराब और अधूरी जांच को लेकर है।
न्यायमूर्ति ने कहा, "आप सजा दर की बात कर रहे हैं, जबकि हम उन विवेचनाओं की बात कर रहे हैं, जो ठीक से नहीं की गईं।" कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश आंकड़ों की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया। कहा, केवल आंकड़े इस समस्या का समाधान नहीं करते। विवेचना के रिकार्ड और विशेष रूप से सीसीटीवी फुटेज की अनुपलब्धता पर भी पीठ ने चिंता जताई।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा समय पर निर्देश और रिकार्ड उपलब्ध कराने में देरी का मुद्दा उठाया। कहा, ‘पहले जमानत मामलों में पुलिस से निर्देश लेने के लिए 10 दिन का समय दिया जाता था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन का समय पर्याप्त माना है। यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि पुलिस का पक्ष समय पर अदालत के सामने पहुंचे?’
डीजीपी ने भरोसा दिलाया कि आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। संबंधित समितियों के गठन का भी उल्लेख किया। न्यायमूर्ति ने कहा, "आप सभी सक्षम हैं। हम आपको समस्याएं बताएंगे और आप उनके समाधान का रास्ता निकाल सकते हैं।
डीजीपी की व्यक्तिगत उपस्थिति महोबा निवासी हत्यारोपित पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत अर्जी की सुनवाई के क्रम में हुई थी। श्रीनगर थाने में दर्ज केस में सरकार का हलफनामा नहीं मिला था। कोर्ट ने 16 जुलाई को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार 21 जून 2025 की घटना के कथित समय तथा सीसीटीवी फुटेज के समय में अंतर को लेकर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करे।
सरकारी वकील ने 19 अगस्त को सुनवाई के दौरान बताया कि उन्होंने दो बार पत्र भेजे, फिर भी जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे अदालत का घोर अनादर बताया। कहा- पुलिस अधिकारियों के इस रवैये के कारण हत्या के मामलों में जमानत अर्जियां लंबित रहती हैं। डीजीपी व महाधिवक्ता को 24 अगस्त को तलब कर लिया। इस तिथि पर गृह मंत्रालय की बैठक के चलते डीजीपी की तरफ से हाजिरी माफी मांगी गई। इसे स्वीकार कर पहली सितंबर की तिथि तय कर दी गई।
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