कलकत्ता हाई कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी में CBI जांच का निर्देश दिया
कोलकाता हाई कोर्ट ने उन ठगों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए, जो सरकारी अधिकारी का ढोंग करके डिजिटल अरेस्ट का भय दिखा कर एक व्यक्ति से 1.74 करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर चुके थे, जांच को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने का आदेश दिया है। मामला जनवरी 2025 में बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ था, जहाँ पीड़ित मिहिर कुमार रॉय ने ठगी की रिपोर्ट की थी।

सौजन्य से:- Jagran
'डिजिटल अरेस्ट' ठगी मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI जांच के आदेश दिए
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर एक व्यक्ति से 1.74 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।
HighLights
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया।
- 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 1.74 करोड़ की ठगी।
- ठगों ने सरकारी अधिकारी बनकर पीड़ित को धमकाया था।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर एक व्यक्ति से 1.74 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।
आरोप है कि ठगों ने सरकारी अधिकारियों का परिचय देकर फोन किया और गिरफ्तारी तथा कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित से एक करोड़ 74 लाख दस हजार पांच सौ रुपए विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित करा लिए। मामले में जनवरी 2025 में बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
बिधाननगर निवासी मिहिर कुमार रॉय ने इस संबंध में साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप के मुताबिक, ठगों के एक गिरोह ने टेलीकॉम नियामक संस्था, पुलिस और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में उनसे संपर्क किया।
उन्हें लगातार गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया गया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.74 करोड़ रुपए से अधिक की रकम भेजने के लिए मजबूर किया गया।
अदालत ने हाल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों में जारी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपना आवश्यक माना।
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