होम›अपराध›सुप्राइम कोर्ट ने कहा कि हर लापता के लिए तत्काल एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, उम्र और लिंग की परवाह नहीं
अपराध
सुप्राइम कोर्ट ने कहा कि हर लापता के लिए तत्काल एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, उम्र और लिंग की परवाह नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अपने निवासियों के लापता होने के मामलों में सख्ती से कार्रवाई करें और हर एक मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि लापता व्यक्ति की उम्र और लिंग की परवाह किए बिना इसे महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।

सौजन्य से:- Live Law
उम्र या लिंग की परवाह किए बिना हर लापता व्यक्ति के लिए तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी
अमीषा श्रीवास्तव
11 अगस्त 2026 9:56 पूर्वाह्न IST
अदालत ने लापता वयस्कों पर एफआईआर दर्ज करने में विफल रहने पर राज्यों को अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी।
अगली कहानी
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
अपराध
यौन उत्पीड़न की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करना जिम्मेदारी: हाईकोर्ट

अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में हिरासत मौत के मामले में अपना रुख सख्त किया

अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत का मामला सीबीआई को भेजा, हिरासत में हिंसा के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

अपराध
विजय माल्या की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट का ईडी से सवाल

अपराध
छपार थाना क्षेत्र के गांव तेजलहेड़ा में 26 साल बाद सुनाई गई सालिम हत्याकांड की सजा

अपराध
बीएनएस में आईपीसी की धारा 377 जैसी नई धारा नहीं बनने की दिल्ली हाईकोर्ट की प्रतिबद्धता

अपराध
बिना सबूतों के पुलिस एफआईआर से इनकार नहीं कर सकती: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

अपराध
भविष्य के निर्देशित फैसले के साथ विधायक विशेषाधिकार नियम बदल सकता है, 6 अक्टूबर से
ताज़ा ख़बरें
- हाईकोर्ट ने पुलिस को ललकारा, आरोपी ननद को 24 घंटे के भीतर रिहा करने का आदेश
- न्यायाधीश जे.बी. पारदीवाला: एक विस्तृत दृष्टिकोण जीवनी, करियर और प्रमुख निर्णय
- इटली में भांग के फूलों की जब्ती के खिलाफ सर्वोच्च अदालत का फैसला
- राष्ट्रीय लोक अदालत: समझौता योग्य मामलों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निपटारा
- लखीसराय में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता रथ का शुभारंभ
- ट्विशा शर्मा केस: सीबीआई ने अदालत में फाइनल रिपोर्ट नहीं पेश की, 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: समय सीमा में यूएपीए मामलों की सुनवाई सुनिश्चित करे कर्नाटक
- बेटियों को पिता की प्रॉपर्टी में बराबर का हिस्सा

