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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को निर्णय लेने दिया: ‘आतंकवादियों की बहन’ टिप्पणी पर विजय शाह के मामले की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश मंत्री कुंवर विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ कहने पर शिकायत दर्ज होने के बाद की सुनवाई हुई। विशेष जांच टीम ने रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की, पर अभियोजन के लिए राज्यपाल की मंजूरी अभी लंबित है; कोर्ट ने इस पर हस्तक्षेप से परहेज करते हुए राज्यपाल को निर्णय लेने देने का फैसला किया।

31 अगस्त 2026 को 08:32 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को निर्णय लेने दिया: ‘आतंकवादियों की बहन’ टिप्पणी पर विजय शाह के मामले की सुनवाई

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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BREAKING'आतंकवादियों की बहन' मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:कोर्ट ने कहा- राज्यपाल को फैसला लेने दीजिए, मंजूरी पर दखल से इनकार

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मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह की विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ कहकर टिप्पणी की थी। उनके खिलाफ दर्ज FIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की SIT ने बताया कि जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश कर दी गई है। हालांकि, विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए जरूरी मंजूरी अभी लंबित है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मंजूरी के मुद्दे में हस्तक्षेप नहीं किया।

कोर्ट ने कहा- राज्यपाल को फैसला लेने दीजिए

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के सामने सुनवाई हुई। SIT की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने बताया कि अभियोजन की मंजूरी के लिए राज्य सरकार की सिफारिश राज्यपाल के पास लंबित है।

इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि राज्यपाल को इस पर फैसला लेने दिया जाए। CJI सूर्यकांत ने भी कहा कि जांच रिपोर्ट अंततः सक्षम प्राधिकारी के सामने जानी है।

मंजूरी मिली तो चार्जशीट, नहीं मिली तो क्लोजर रिपोर्ट

CJI सूर्यकांत ने SIT से पूछा कि अगर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो आगे क्या होगा। इस पर ASG केएम नटराज ने बताया कि ऐसी स्थिति में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

यानी SIT की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन आगे की कानूनी कार्रवाई अब अभियोजन की मंजूरी पर निर्भर करेगी। मंजूरी मिलने पर आगे चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया होगी, जबकि मंजूरी नहीं मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

विजय शाह के वकील ने माफी का जिक्र किया

विजय शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने सुनवाई के दौरान उनकी सार्वजनिक माफी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने विवादित टिप्पणी के अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अभियोजन की मंजूरी पर विचार करते समय मंत्री की माफी और उनके रुख को भी ध्यान में रखा जाए। मनींदर सिंह ने कहा कि यदि उन्हें सक्षम प्राधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है तो वे अपनी गलती और माफी की बात वहां रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह बात पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जा चुकी है।

इस पर ASG केएम नटराज ने कहा कि मामला अभी विचाराधीन है और इस पहलू पर विचार किया जाएगा।

क्या कहा था विजय शाह ने?

मामला विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी से जुड़ा है। उन्होंने कर्नल कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ कहकर संबोधित किया था। कर्नल सोफिया कुरैशी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया को जानकारी देने वाले सेना के अधिकारियों में शामिल थीं।

टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ा और विजय शाह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई थी।

अब SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है और रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी गई है। हालांकि, अभियोजन की मंजूरी का फैसला अभी राज्यपाल के स्तर पर लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने के बजाय राज्यपाल को फैसला लेने देने का रुख अपनाया है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

कोर्ट रूम LIVE…

कोर्ट में जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी. कल्याण चक्रवर्ती की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। कोर्ट के निर्देशानुसार फिलहाल सीलबंद है। हालांकि, चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले संबंधित अदालत से अभियोजन मंजूरी लेना जरूरी है।

कोर्ट ने पूछा, "यानी आपकी रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है, लेकिन अभी आप केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं? मंजूरी मिलने के बाद आप इसे संबंधित कोर्ट में दाखिल करेंगे?"

इस पर एएसजी के. एम. नटराज ने कहा, "जी हां, माय लॉर्ड। कैबिनेट स्तर पर इस पर विचार किया गया है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए महामहिम राज्यपाल के पास भेजी गई है। उम्मीद है कि कल दोपहर तक राज्यपाल की ओर से अंतिम निर्णय आ जाएगा।"

एजी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा मामले पर विचार करते समय मंत्री के माफीनामे को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा, "मंत्री जी ने घटना के अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। हमारी प्रार्थना है कि सक्षम प्राधिकारी इस माफीनामे और उनकी इस भूल को भी ध्यान में रखें। यदि अनुमति हो तो हम इस संबंध में एक नया प्रतिवेदन भी सौंप सकते हैं।"

अदालत ने कहा कि वह फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। चूंकि जांच पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट सीलबंद है और अभियोजन मंजूरी का मामला सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित है, इसलिए कोर्ट इस पर नजर बनाए रखेगी।

अदालत ने जांच अधिकारी डीआईजी इंटेलिजेंस से कहा कि उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया है, इसलिए अब उन्हें व्यक्तिगत रूप से बार-बार कोर्ट आने की जरूरत नहीं है। सरकार या सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी पर फैसला आने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाए।

शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने ध्यान दिलाया कि शाह ने अगले ही दिन माफी मांग ली थी और अनुरोध किया कि इसे रिकॉर्ड पर लिया जाए।

सीजेआई (CJI) सूर्यकांत ने एसआईटी के वकील से पूछा कि यदि मंजूरी देने से इनकार कर दिया जाता है तो आगे क्या होगा; वकील ने जवाब दिया कि ऐसी स्थिति में क्लोजर रिपोर्ट दायर की जाएगी।

अदालत ने पाया कि मंजूरी का मामला अभी भी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित है और उसी के अनुसार मामले को स्थगित कर दिया।

मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए थे विवादित बयान

मंत्री कुंवर विजय शाह के बयान के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। SIT ने BNS की धाराओं के तहत केस चलाने की अनुमति सरकार से मांगी थी।

कैबिनेट ने अभियोजन की मंजूरी न देने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा

मंगलवार (25 अगस्त) को हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने वाला प्रस्ताव लाया गया था। कैबिनेट बैठक कक्ष से पांच सीनियर ऑफिसर्स को छोड़कर बाकी सभी को बाहर भेज दिया गया।

इसके बाद पूरी कैबिनेट ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन यानी मुकदमा चलाने की मंजूरी न देने का प्रस्ताव राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया। हालांकि, अभी तक राज्यपाल की ओर से इस मामले में कोई निर्णय लिया गया है या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट में सरकार के वकीलों की दलीलों और रिपोर्ट से स्पष्ट होगा।

कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों का मुख्य तर्क था कि विजय शाह इस मामले में सार्वजनिक मंचों और लिखित रूप में करीब तीन से चार बार माफी मांग चुके हैं। इसलिए अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई कानूनी और व्यावहारिक औचित्य नहीं बनता। कैबिनेट की यह सिफारिश अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल मंगू भाई पटेल के पास भेजी गई है।

‘अब बहुत हो चुका’ कहकर SC ने सरकार को चेताया था

अभियोजन की मंजूरी देने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही मध्य प्रदेश सरकार को कई बार फटकार लगा चुका है। पिछली सुनवाइयों के दौरान कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था- अब बहुत हो चुका (Enough is enough), हमारे आदेश का पालन कीजिए।

अदालत ने सरकार को निर्णय लेने के लिए अंतिम रूप से चार सप्ताह का समय दिया था। जब मंत्री के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि वे कई बार माफी मांग चुके हैं, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है।

कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह माफी दिल से नहीं आई, बल्कि कानूनी कार्रवाई और कोर्ट के संज्ञान से बचने का एक बहाना है। अदालत ने नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर गरिमा बनाए रखने की नसीहत भी दी थी।

मंत्री शाह ने महू में दिया था बयान

जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उन्होंने कहा था-

उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।

इसके बाद शाह ने कहा था- अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।

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