सीजेआई सूर्यकांत ने की मीडिया रिपोर्टिंग पर वार, कहा- रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना थी
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्टिंग पर वार करते हुए कहा है कि रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना थी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दायर नहीं की गई थी, लेकिन कई समाचार माध्यमों ने यह खबर प्रकाशित की थी कि मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है.

सौजन्य से:- BBC
'वक़्त बर्बाद मत कीजिए' वाले बयान पर सीजेआई बोले- कोई याचिका दायर नहीं हुई, रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने छात्र विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ दायर याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था.
लाइव लॉ के मुताबिक़, सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कोई याचिका दायर ही नहीं की गई थी. उनके मुताबिक़, एक वकील ने केवल एक लिखित रिप्रेजेंटेशन के ज़रिए इसका ज़िक्र किया था.
दरअसल बुधवार को भारत के कई समाचार माध्यमों में ख़बर प्रकाशित हुई कि 'सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया था.'
बार एंड बेंच के हवाले से दी गई ख़बरों के मुताबिक़, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक वकील की याचिका पर कहा, "अपना समय बर्बाद मत कीजिए और हमारा समय भी बर्बाद मत कीजिए."
अब सीजेआई ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि इस मामले में मीडिया की रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और लापरवाह थी.
चीफ़ जस्टिस ने क्या कहा
बार एंड बेंच के मुताबिक़, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने पेश हुए वकील ने मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की.
वकील ने कहा, "पुलिस की सख़्ती के वीडियो सबूत मौजूद हैं. जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है. पुलिस बहुत सख़्ती कर रही है..."
हालांकि, इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "कृपया हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना भी समय बर्बाद मत कीजिए. आपका समय हमारे समय से ज़्यादा क़ीमती है."
इसके बाद वकील ने कहा कि कुछ अहम मांगें उठाई जा रही हैं. इनमें सरकार से नीट को निष्पक्ष तरीक़े से कराने और बार-बार पेपर लीक होने के कारण राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को ख़त्म करने की मांग शामिल है.
बुधवार को की गई सीजेआई की इस टिप्पणी को कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था और इस पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी थी.
लाइव लॉ के मुताबिक़, शुक्रवार को सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "पिछले दो दिनों में पूरी तरह ग़लत बयान फैलाया गया कि मामला दायर किया गया था और मीडिया ने बिना ज़िम्मेदारी निभाए यह रिपोर्ट किया कि मुख्य न्यायाधीश ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया."
"आज सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दाखिल नहीं किया गया था. केवल एक प्रतिनिधित्व भेजा गया था, जिसे किसी मिश्रा या किसी अन्य व्यक्ति ने भेजा था. मैं उस प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? इसके बावजूद लोग लापरवाही से रिपोर्टिंग करने लगे."
'कॉकरोच' वाली टिप्पणी पर भी रहे हैं सुर्खियों में
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत पहले भी मीडिया पर अपने बयान को 'ग़लत ढंग से पेश' करने की बात कर चुके हैं.
15 मई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत शुक्रवार को सीनियर वकील का दर्जा दिए जाने की मांग संबंधी एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे.
इस दौरान उन्होंने न्यायपालिका पर बढ़ते 'अनुचित हमलों' को लेकर कड़ी टिप्पणी की.
उन्होंने कहा कि 'मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ताओं' के कुछ वर्ग लगातार न्यायपालिका पर हमला कर रहे हैं.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "समाज में कुछ परजीवी हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. उन्हें रोज़गार नहीं मिलता और पेशेवर ज़िंदगी में कोई जगह नहीं मिलती. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं."
जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, "कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं."
उनके इस बयान पर काफ़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी. हालाँकि बाद में सीजेआई सूर्यकांत ने इस टिप्पणी को ग़लत तरीके से पेश करने की बात कही.
लाइव लॉ और बार एंड बेंच के मुताबिक़ 16 मई को उन्होंने कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को ग़लत तरीके से पेश किया और ऐसा दिखाया मानो उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की हो.
अपनी टिप्पणी पर सोशल मीडिया में विवाद खड़ा होने के बाद जारी बयान में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उनकी टिप्पणियां केवल उन लोगों के ख़िलाफ थीं, जिन्होंने फर्ज़ी या नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश किया है, न कि सामान्य रूप से युवाओं के ख़िलाफ़.
उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक वर्ग ने कल एक निरर्थक मामले की सुनवाई के दौरान की गई मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया. मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्ज़ी और नकली डिग्रियों की मदद से बार (कानूनी पेशे) जैसे क्षेत्रों में प्रवेश किया है."
इसमें आगे कहा गया, "ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में भी घुस आए हैं, इसलिए वे परजीवियों की तरह हैं."
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद ही अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर मज़ाकिया अंदाज़ में शुरू की गई एक पहल के आधार पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) बना दी.
हालांकि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन सीजेपी के नेतृत्व में ही क़रीब एक महीने पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का आंदोलन शुरू हुआ था.
ये लोग नीट पेपर लीक और अन्य शिक्षा सुधारों के लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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