सुप्रीम कोर्ट ने 8½ साल से बंद अंडरट्रायल को जमानत न दी, ट्रायल को 6 महीने में पूरा करने का आदेश
कोलकाता की ज्वेलरी शॉप चोरी के मामले में 8.5 साल से जेल में रहे अंडरट्रायल आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से इनकार कर दिया। कोर्ट ने दीरी से चल रहे मुकदमे को शीघ्र समाप्त करने हेतु ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया, जबकि पूर्व अपराध रिकॉर्ड को जमानत के खिलाफ माना गया।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
8.5 साल से जेल में बंद अंडरट्रायल को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार, 6 महीने में ट्रायल पूरा करने का आदेश
Praveen Mishra
4 Sept 2026 1:09 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर 2026) को डकैती/चोरी के एक मामले में साढ़े आठ साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में बंद अंडरट्रायल कैदी को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे की धीमी गति को देखते हुए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को छह महीने के भीतर पूरे मुकदमे का निपटारा करने का निर्देश दिया।
मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा उसकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
ज्वेलरी शॉप में चोरी का मामला
मामला कोलकाता की एक ज्वेलरी शॉप में हुई चोरी से जुड़ा है। आरोप है कि आरोपी अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर दुकान में घुसा और दुकान मालिक तथा कर्मचारियों के साथ मारपीट कर डिस्प्ले बॉक्स में रखी ज्वेलरी ले गया।
आरोप के मुताबिक, इस घटना में करीब 752.100 ग्राम सोने की ज्वेलरी, जिसकी उस समय कीमत लगभग ₹21.66 लाख थी, चोरी हुई थी।
आरोपी को कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट की एंटी-डकैती सेक्शन ने अन्य आरोपियों के साथ ट्रेस किया था।
8 साल 6 महीने में सिर्फ 6 गवाहों की गवाही
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि याचिकाकर्ता 8 साल 6 महीने से अंडरट्रायल के रूप में जेल में है, लेकिन अभी तक मुकदमा पूरा नहीं हुआ है।
कोर्ट ने रिकॉर्ड किया कि अब तक सिर्फ छह गवाहों की गवाही हो सकी है और इस स्थिति को “shocking” (चौंकाने वाली) बताया।
खंडपीठ ने माना कि यदि केवल लंबे समय से जेल में रहने का आधार होता, तो वह जमानत देने पर विचार कर सकती थी। लेकिन आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड (antecedents) ने उसके पक्ष में जमानत देने से रोक दिया।
एक जैसे अपराधों में पहले भी संलिप्तता बनी जमानत में बाधा
कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले भी वर्तमान मामले जैसे ही प्रकृति के अपराधों में संलिप्तता रही है। इन्हीं आपराधिक antecedents को देखते हुए कोर्ट ने जमानत देने के अपने विवेक का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय तक ट्रायल लंबित रहना स्वीकार्य नहीं है।
अब 6 महीने में पूरा करना होगा ट्रायल
जमानत से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह मुकदमे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाए और छह महीने के भीतर, बिना किसी चूक के, पूरे ट्रायल का निपटारा करे।
कोर्ट ने ट्रायल पूरा होने के बाद इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को देने का भी निर्देश दिया।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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