ओडिशा की अदालत ने 18 दिनों में चोरी के आरोपी को दी कड़ी सजा
भुवनेश्वर की जेएमएफसी‑4 अदालत ने 8 अगस्त को दर्ज चोरी के मामले में 26 अगस्त तक सुनील सेठी को एक साल कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना सुनाया, जिससे राज्य में रिकॉर्ड बना। जांच में सीसीटीवी फुटेज और कई गवाहों के बयान शामिल थे, और आरोपपत्र मात्र पाँच दिन बाद दाखिल किया गया।

सौजन्य से:- Jagran
8 अगस्त को चोरी, 14 को चार्जशीट और 26 अगस्त को सजा; ओडिशा की अदालत 18 दिनों में सुनाई सजा
ओडिशा में एक चोरी के मामले में आरोपी सुनील सेठी को महज 18 दिनों में दोषी ठहराकर सजा सुनाई गई है, जो राज्य में अपनी तरह का पहला रिकॉर्ड है।
HighLights
- ओडिशा में चोरी के आरोपी को 18 दिन में मिली सजा।
- भुवनेश्वर की अदालत ने सुनील सेठी को दोषी करार दिया।
- एक वर्ष कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में एक चोरी के मामले में महज 18 दिनों के भीतर आरोपी को दोषी ठहराकर सजा सुनाए जाने का रिकॉर्ड बना है। इसे राज्य का पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है, जिसमें एफआईआर दर्ज होने से लेकर सजा सुनाए जाने तक की पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से पूरी हुई। भुवनेश्वर की जेएमएफसी-4 अदालत ने आरोपी सुनील सेठी को दोषी करार दिया।
यह मामला 8 अगस्त 2026 को बरगड़ थाने में दर्ज किया गया था। टंकपानी रोड स्थित ‘एलएक्स कार केयर’ के मालिक अविनाश प्रीतम नायक ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके प्रतिष्ठान से पांच मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल चोरी हो गई है।
शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच की जिम्मेदारी एसआई राजेश कुमार गौड़ को सौंपी गई।
रिकॉर्ड 18 दिनों में आया फैसला
आरोपी को 9 अगस्त को अदालत में पेश किया गया, जबकि मामला दर्ज होने के मात्र पांच दिन बाद 14 अगस्त को आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए और 15 दस्तावेज अदालत में पेश किए। इसके अलावा, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) की धारा 63(4) के तहत प्रमाणित सीसीटीवी फुटेज भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष ने 17 अगस्त को अपने साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 26 अगस्त को सुनील सेठी को दोषी ठहराया और उसे एक वर्ष के कारावास तथा 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
मामले की पैरवी सहायक लोक अभियोजक निरंजन बेहरा ने की। अधिकारियों ने त्वरित जांच, शीघ्र आरोपपत्र दाखिल करने और तेजी से मुकदमे की सुनवाई को न्याय प्रक्रिया में समन्वित प्रयासों का उदाहरण बताया है।
हालांकि, इस मामले पर दोषी करार दिए गए आरोपी या स्थानीय पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने दो साल की देरी के बाद 3‑महीने की सीमा तोड़ते हुए आदेश सुनाया
- साइंस‑आधारित जांच व निजता: सुप्रीम कोर्ट ने किया जरूरी संतुलन पर ज़ोर
- शिवसेना पार्षद के डॉक्टर पर हमले के जमानत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए, सड़कों पर ऐसे लोगों का हक नहीं
- छह महीने से अधिक आरक्षित फैसले पर पुनः सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को आवेदन का अधिकार
- 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत: पेंडिंग ट्रैफिक चालानों का आसान निपटारा और बड़ी छूट
- सुप्रीम कोर्ट ने नगा उग्रवादी होपेसन निंगशेन की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर, अपील तक दिल्ली से बाहर न जाने की शर्त लगाई
- सच्चाई की तलाश में: सुप्रीम कोर्ट ने 9 साल बाद दुष्कर्म के दोषी को रिहा किया
- हाईकोर्ट ने कहा: क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी मजिस्ट्रेट सीधे तलब कर सकते हैं

