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पत्नी के तंज पर पति ने की थी पत्नी की हत्या, उम्रकैद पर बदली सजा

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 7 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है. कोर्ट ने माना कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि पत्नी के अपमानजनक शब्दों से उत्पन्न अचानक और गंभीर उकसावे के कारण हुई.

29 जून 2026 को 04:25 pm बजे
पत्नी के तंज पर पति ने की थी पत्नी की हत्या, उम्रकैद पर बदली सजा

सौजन्य से:- Aaj Tak News

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने पत्नी की हत्या के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 7 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है. कोर्ट ने माना कि घटना पूर्व नियोजित हत्या नहीं थी, बल्कि पत्नी के अपमानजनक शब्दों से उत्पन्न अचानक और गंभीर उकसावे के कारण हुई.

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने छिंदवाड़ा जिले के चौरई निवासी शिवा की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-1 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

जुलाई 2021 की रात खर्रा घाट पर क्या हुआ था?

अभियोजन के अनुसार, जुलाई 2021 की रात आरोपी अपनी पत्नी किरण के साथ कुलबहेरी नदी के खर्रा घाट पर था. इसी दौरान पत्नी ने विवाद के दौरान कथित रूप से कहा, "तुम्हारे जैसे हजार पति कर सकती हूं...'

इस बात से आक्रोशित होकर आरोपी ने पास पड़े पत्थर से हमला कर दिया, जिससे किरण की मौत हो गई. घटना के समय मृतका सात माह की गर्भवती थी. इसके बाद आरोपी ने स्वयं पुलिस और परिजनों को फोन कर घटना की जानकारी दी.

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तो खुद पुलिस को फोन क्यों करता?

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए कहा कि यदि आरोपी की पूर्व नियोजित हत्या करने की मंशा होती, तो वह स्वयं पुलिस और मृतका के परिजनों को घटना की सूचना नहीं देता. अदालत ने माना कि पत्नी के कथित अपमानजनक शब्दों से आरोपी ने आत्मनियंत्रण खो दिया और उसी आवेश में वारदात हुई, इसलिए यह मामला हत्या की श्रेणी में न आकर गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है.

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी हवाला देते हुए कहा कि गंभीर और अचानक उकसावे की स्थिति में हत्या के मामलों में अपराध की प्रकृति का अलग ढंग से मूल्यांकन किया जा सकता है.

इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला संशोधित करते हुए आरोपी का दोष धारा 304 भाग-2 के तहत निर्धारित किया और उसे 7 वर्ष के कठोर कारावास तथा 1000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. इस प्रकार आरोपी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई.

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