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पटना में छह साल के बालक की धरना पर उठे कानूनी प्रश्न

पटना के गर्दनीबाग में छह साल के आदित्य कुमार ने प्रधानमंत्री से मिलने की माँग कर धरना लगाया, जबकि वह पुलिस द्वारा अपने माता‑पिता पर हुई मारपीट का भी हवाला देता है। वह संविधान पढ़ते हुए अपने अधिकारों की वकालत करता है, पर हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कानूनी तौर पर धरना नहीं लगा सकते।

31 अगस्त 2026 को 04:32 pm बजे
पटना में छह साल के बालक की धरना पर उठे कानूनी प्रश्न

सौजन्य से:- ETV Bharat

पटना में 6 साल का बच्चा दे रहा धरना, सवाल- क्या कानून इसकी इजाजत देता है?

पटना का आदित्य कुमार आज-कल काफी फेमस हो चुका है. पर कानून के जानकार इसके बारे में क्या कहते हैं? रिपोर्ट- कृष्णनंदन

Published : August 31, 2026 at 8:55 PM IST

पटना : बिहार की राजधानी पटना का गर्दनीबाग धरना स्थल इन दिनों प्रमुख स्थली बन गया है. एक 6 साल का बच्चा आदित्य कुमार धरना पर बैठा है. उसकी मांग है कि प्रधानमंत्री मुलाकात करने का समय दें ताकि वह पटना पुलिस की शिकायत कर सके. हालांकि इस बात को लेकर वह पूर्व में ही कुछ दिनों पूरे बिहार के डीजीपी से मिलकर शिकायत कर चुका है.

पढ़ रहा है संविधान : आदित्य कुमार गर्दनीबाग धरना स्थल पर हाथों में अंग्रेजी में लिखित भारतीय संविधान की पुस्तक लेकर बैठा है और कह रहा है कि वह संविधान पढ़ रहा है, संविधान के अनुसार वह अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है. आदित्य का आरोप है कि 25 अगस्त को प्रदर्शन के बाद उनके माता-पिता को पुलिस जब ले गई तो थाने में पुलिस ने उनकी पिटाई की.

लगे हुए हैं बड़े-बड़े होर्डिंग बैनर : इस धरना स्थल पर आदित्य के पिता जितेंद्र कुमार और मां मुन्नी कुमारी भी मौजूद है और साथ में शिवनंदन भारती जैसे कुछ अधिवक्ता जो उसका पूरा सपोर्ट कर रहे हैं. आदित्य की तस्वीर के साथ उसकी मांग को लेकर धरना स्थल पर बड़े-बड़े होर्डिंग बैनर लगे हुए हैं.

ईटीवी भारत से बातचीत में आदित्य कुमार ने बताया कि वह पहली कक्षा में पढ़ता है और उसकी उम्र 6 साल है. पप्पू यादव ने एक प्राइवेट स्कूल में नाम लिखवाया था हालांकि अभी स्कूल छूट गया है. शिक्षक धरना स्थल पर ही आकर पढ़ा दे रहे हैं. उसने बताया कि वह संविधान पढ़ रहा है और संविधान में कहीं नहीं लिखा हुआ है कि गरीबों के साथ भेदभाव किया जाए.

''25 अगस्त को मैं युवाओं के आंदोलन में शामिल हुआ था. मैं उसमें इसलिए भाग लिया था कि पेपर लीक बंद हो. मुझे डर हो गया था कि कहीं जब मेरी परीक्षा देने की बारी आई तो पेपर लीक ना हो जाए. इसीलिए आंदोलन में शामिल हुआ.''- आदित्य कुमार, धरना पर बैठा बच्चा

PM मिलने आएं या बुलाएं : आदित्य ने कहा कि उसके आंदोलन में शामिल होने के कारण पुलिस ने उसके माता-पिता को उठा लिया और पिटाई कर दी. वह पिछले दिनों डीजीपी से मिला था और न्याय की मांग की थी, डीजीपी ने आश्वासन दिया था. हालांकि अब उसकी मांग है कि प्रधानमंत्री इस पर बोलें और वह प्रधानमंत्री से इस मुद्दे को लेकर मिलने का समय चाहते हैं. प्रधानमंत्री आकर मिलें, नहीं तो मिलने के लिए बुलाए.

गया का रहने वाला है परिवार : 6 साल के आदित्य के पिता जितेंद्र कुमार ने बताया कि वह मूल रूप से गया के रहने वाले हैं. पटना में पुणे चक में किराए के मकान में रहते हुए मजदूरी करते हैं. दैनिक मजदूर हैं और जहां काम मिल जाता है वहां मजदूरी करते हैं. 25 अगस्त को छात्रों के आंदोलन में बच्चा अपनी मां के साथ चला गया था जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बुलाया था और उन्हें हिरासत में लेकर थाने में काफी देर तक बैठाया. इस दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई. इसी घटना को लेकर उनका बेटा दुखी है.

आदित्य की मां मुन्नी कुमारी ने कहा कि पटना में वह दूसरों के घर में झाड़ू पोछा लगाने का काम करती हैं. उनका बेटा बहुत समझदार है और संविधान और न्याय की बात करता है. 25 अगस्त को पेपर लीक के खिलाफ होने वाले आंदोलन में जाने की बात कही तो वह उसे लेकर गई थी. यहां उन्हें डिटेल कर लिया गया और बच्चों को भी पुलिसकर्मियों ने अपनी गाड़ी में उनसे दूर रखा. इस दौरान उनके साथ मारपीट हुई जिससे उनका बेटा आदित्य दुखी हो गया है.

''आदित्य को किसी ने बताया कि हक की लड़ाई के लिए धरना पर बैठना होता है तो वह धरना पर बैठने का निर्णय लिया. मैंने अपने बेटे के निर्णय का समर्थन किया और बेटे के साथ ही धरना स्थल पर बैठी.''- मुन्नी कुमारी, आदित्य की मां

क्या 6 साल का बच्चा धरना पर बैठ सकता है? : पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कौशलेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि यह सरासर अनुचित है. 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को कोई धरना पर नहीं बैठा सकता. संविधान और कानून के अनुसार यह बच्चे की वह आयु होती है जिसमें बच्चा स्वयं के विवेक से निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता है और जिम्मेदारी माता-पिता की बनती है.

''12 साल से कम उम्र के बच्चे को यदि मां-बाप प्रदर्शन में उतारते हैं तो उन पर चाइल्ड एब्यूज का केस बनता है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 93 के तहत 7 साल तक की सजा का प्रावधान है. माता-पिता के अलावा दूसरे लोग भी यदि बच्चों को आंदोलन में ले जाने में शामिल पाए जाते हैं तो उन पर भी इसी धारा के तहत कार्रवाई का प्रावधान है.''- कौशलेंद्र नारायण सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता, पटना हाईकोर्ट

'कड़ी सजा का है प्रावधान' : अधिवक्ता कौशलेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि अभी इस बच्चे की खेलने-कूदने की उम्र है और पढ़ाई के लिए स्कूल जाना चाहिए. चाहे कोई अधिवक्ता हो या कोई समाज का प्रबुद्ध व्यक्ति अगर अपने हित के लिए 6 साल के बच्चे का इस्तेमाल करता है तो उस पर भी यही कानून लागू होगा. इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत भी कार्रवाई होगी, जिसमें 3 साल तक की सजा और 5 लाख तक का जुर्माना का प्रावधान है.

''यह क्रिया बच्चों के माता-पिता के खिलाफ भी हो सकता है क्योंकि माता-पिता भी धरने पर बच्चे के साथ बैठे हुए हैं. अगर कोई अधिवक्ता धरना प्रदर्शन में बच्चा को बैठाए हुए है या बच्चे को और बैठे रहने के लिए उकसाता है तो बर काउंसिल भी कार्रवाई करती है. उसकी प्रैक्टिस का लाइसेंस भी रद्द हो सकता है.''- कौशलेंद्र नारायण सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता, पटना हाईकोर्ट

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