होमअपराधमुस्लिम रीति-रिवाज से नहीं बचा, केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की के बलात्कार मामले को रद्दीकरण से इनकार
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मुस्लिम रीति-रिवाज से नहीं बचा, केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की के बलात्कार मामले को रद्दीकरण से इनकार

केरल हाई कोर्ट ने 17 वर्षीय लड़की के साथ यौन शोषण के आरोपी को रेप के आरोप में दंडित करने से इनकार नहीं किया और कहा कि मुस्लिम शादी भी पीड़िता को POCSO एक्ट के तहत सुरक्षा से नहीं वंचित करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना, चाहे वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो, IPC की धारा 376 के तहत अपराध है।

2 सितंबर 2026 को 03:31 am बजे
मुस्लिम रीति-रिवाज से नहीं बचा, केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की के बलात्कार मामले को रद्दीकरण से इनकार

सौजन्य से:- Navbharat Times

केरल हाई कोर्ट ने 17 साल की लड़की के साथ यौन शोषण के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ रेप का केस रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने आरोपी के उस दावे को खारिज कर दिया कि मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुई शादी उसे सुरक्षा देती है। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक स्थिति या पर्सनल लॉ से कोई फर्क नहीं पड़ता।

कोच्चि : केरल हाई कोर्ट ने 17 साल की लड़की के साथ बार-बार रेप करने के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही उनकी शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों से हुई हो, फिर भी यह उसे 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (POCSO) के तहत आपराधिक दायित्व से नहीं बचाएगी। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने मन्नारक्कड़ पुलिस स्टेशन में दर्ज और अब पट्टाम्बी की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में लंबित मामले के मुख्य आरोपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों से ऐसे मुद्दे उठते हैं जिनका फैसला केवल पूरी सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है, हालांकि प्रथम दृष्टया ये आरोप अपराधों को उजागर करते हैं।

'इंडिपेंडेंट थॉट' मामले में सुप्रीम कोर्ट के तय किए गए कानून का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाता है, उस पर IPC की धारा 376 के तहत रेप का मुकदमा चलाया जा सकता है, भले ही पीड़िता उसकी पत्नी हो और उसकी उम्र 15 से 18 साल के बीच हो। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी IPC की धारा 375 के अपवाद 2 का सहारा लेकर मुकदमे से बच नहीं सकता।

आरोपी की दलील पर हाई कोर्ट की टिप्पणी

आरोपी ने दलील दी थी कि लड़की उसकी कानूनी पत्नी है। उन्होंने इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार तब शादी की थी जब लड़की की उम्र 17 साल और एक महीना थी। इस दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट तब लागू होता है जब शादी करने वालों में से कोई एक नाबालिग हो। भले ही पर्सनल लॉ के तहत वह शादी वैध हो। कोर्ट ने कहा कि आरोपी शादी के रिश्ते का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई से बच नहीं सकता।

अगर बहस के लिए यह मान भी लिया जाए कि शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार हुई थी, तो भी इससे याचिकाकर्ता की आपराधिक जवाबदेही खत्म नहीं होगी। खासकर इसलिए क्योंकि कथित शादी और उसके बाद हुए यौन कृत्यों के समय लड़की 17 साल की थी। इसमें कोई विवाद नहीं है कि अगर शादी करने वाले पक्षों में से कोई एक नाबालिग है, तो POCSO एक्ट के प्रावधान लागू होते हैं, चाहे पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध हो या नहीं।

केरल हाई कोर्ट

क्या है पूरा मामला

आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के तहत कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 अक्टूबर 2021 को वह कथित तौर पर लड़की को कार में अपने घर ले गया और 23 से 26 अक्टूबर के बीच कई बार उसका बलात्कार किया। दूसरे और तीसरे आरोपी ने कथित तौर पर इस अपराध में मदद की। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि लड़की के माता-पिता को पहले आरोपी द्वारा किए गए कथित अपराध की जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने उसे वापस नहीं लिया और न ही अधिकारियों को मामले की सूचना दी।

प्रतिवादी वकील ने दी क्या दलील

याचिका का विरोध करते हुए, पहले प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि लड़की 18 साल से कम उम्र की थी और इसलिए POCSO एक्ट के तहत एक बच्ची थी। वकील ने कहा कि उसके साथ यौन संबंध बनाना एक्ट के तहत अपराध माना जाएगा, चाहे शादी का दावा कुछ भी हो। FIR में लगाए गए आरोपों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी कथित तौर पर कार से आया, लड़की से कहा कि वह उसके लिए कपड़े खरीदेगा और उसे थोट्टारा में अपने घर ले गया।

लड़की ने चार दिनों तक जबरन शारीरिक संबंध बनाने का लगाया आरोप

यह भी आरोप लगाया गया कि उसे वहां रखा गया और जब उसने आरोपी की मां के साथ सोने की इच्छा जताई, तो उसे आरोपी के बेडरूम में भेज दिया गया। कथित तौर पर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया गया था। लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने 23 अक्टूबर की रात उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और अगले चार दिनों तक ऐसा करता रहा।

काजी और लड़की के भाई ने बताया आरोपी की पत्नी

कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की सच्चाई का फैसला पूरी सुनवाई के बाद ही किया जा सकता है। कोर्ट ने आरोपी के इस दावे की भी जांच की कि लड़की उसकी कानूनी रूप से ब्याही पत्नी है और पाया कि यह दावा मुख्य रूप से लड़की, उसके भाई और उस मस्जिद के काजी के पुलिस को दिए गए बयानों पर आधारित था जहां कथित तौर पर शादी हुई थी। कोर्ट ने कहा कि फिर भी, क्या याचिकाकर्ता के दावे के अनुसार वास्तव में कोई वैध शादी हुई थी, यह बात सुनवाई के बाद ही तय की जा सकती है, खासकर इसलिए क्योंकि ऐसी शादी होने का कोई दस्तावेज़ी सबूत नहीं है।

यह साफ है कि अठारह साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने पर POCSO एक्ट के तहत अपराध बनता है, और ऐसी स्थिति में, बच्ची आरोपी की पत्नी है या नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

केरल हाई कोर्ट

एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट एक खास कानून है जिसे बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है। कोर्ट ने एक्ट की धारा 2(1)(d) का ज़िक्र किया, जिसके तहत बच्चे का मतलब 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति है, और धारा 42A का भी ज़िक्र किया, जो दूसरे कानूनों के साथ टकराव की स्थिति में इस कानून को प्राथमिकता देती है।

लेखक के बारे मेंशशि मिश्राशशि पांडेय मिश्रा नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कॉन्टेंट प्रॉड्यूसर (Principal Digital Content Producer) हैं। वह नवभारत टाइम्स में महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र-प्रदेश, पंजाब-हरियाणा, केरल, गोवा समेत नॉर्थ ईस्ट के राज्य की खबरों पर काम करती हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 18 साल का लंबा अनुभव है। इस दौरान उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। शशि पांडेय मिश्रा ने सितंबर 2017 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने अपनी पत्रकारिता के दौरान राजनीति, क्राइम, ह्यूमन ऐंगल स्टोरीज पर काम किया। इस दौरान समाजिक मुद्दों से जुड़े कई स्टिंग भी किए। कई स्पेशल खबरें कीं, जो नेशनल स्तर पर सुर्खियां बनीं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में गुजरात चुनाव के दौरान स्पेशल ग्राउंड स्पोर्टिंग की। देश की राजनीति, पर्यावरण, महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दे और क्राइम की खबरें लिखना पसंद है।

देश का राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना। उस खबर से भारत पर और लोगों पर क्या असर पड़ेगा इस पर काम करना प्राथमिकता है। इसके अलावा भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को खास खबर, खबर की सत्यता, पुष्ट खबरें और वीडियो के जरिए विश्लेषण देना शशि पांडेय मिश्रा की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- भारत का राजनीतिक घटनाक्रम, पर्यावरण, क्राइम, स्वास्थ्य, महिलाओं और बच्चों से संबंधित मुद्दों पर लिखना

पत्रकारिता अनुभव: अखबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल मीडिया में 18 साल से कार्यरत

शशि पांडेय मिश्रा ने साल 2007 में पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण से की। उससे पहले अमर उजाला में इंटर्नशिप की। दैनिक जागरण के बाद आई नेक्स्ट में काम किया। फिर सहारा समय चैनल जॉइन किया। लेकिन लेखन का शौक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से वापस प्रिंट की तरफ ले आया। लखनऊ में कैनविज टाइम्स में काम किया और उसके बाद नवभारत टाइम्स अखबार में। यहां से नवभारत टाइम्स के डिजिटल प्लेटफॉर्म में काम की शुरुआत की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है। इससे पहले भी हर संस्थान में बेस्ट रिपोर्टिंग के अवॉर्ड मिले।

शशि पांडेय मिश्रा ने कानपुर यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में पोस्ट ग्रैजुएनशन किया है। उसके अलावा विद्या इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और जर्नलिज्म से पत्रकारिता की पढ़ाई की।

पुरस्कार: दैनिक जागरण कानपुर में पहली महिला पत्रकार होने का सम्मान मिला। आईनेक्स्ट में बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड, नवभारत टाइम्स अखबार में बेस्ट रिपोर्टर का अवॉर्ड, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में भी अवॉर्ड मिला।

शशि पांडेय मिश्रा की स्पेशल खबरें

- सरकारी शेल्टर होम में अव्यवस्थाओं के लेकर स्पेशल खबर की। यहां अंदर कोई नहीं जा सकता था तो इस दौरान सफाई कर्मचारी बनकर अंदर गई और स्टिंग किया।

- कानपुर में राहुल गांधी की स्पेशल विजिट के दौरान डॉक्टर बनकर अस्पताल के अंदर गई और स्पेशल खबर निकाली।

- कानपुर जू में जानवरों की हालत और प्रदूषण पर लगातार स्पेशल स्टोरीज कीं, इन छपी खबरों के अखबार संसद के अंदर लहराकर मेनका गांधी ने सवाल उठाए। खबरों को संज्ञान लिया गया और बड़ा एक्शन हुआ।

- लखनऊ में विधानसभा से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक खिलौना पिस्तौल लेकर अंदर घुसी, लखनऊ के नामी स्कूलों में भी पिस्तौल लेकर घूमी और सुरक्षा में सेंध का स्टिंग किया।

- केंद्र सरकार की पालना गृह योजना में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया। खबरों को हाई कोर्ट ने संज्ञान में लिया और मामले में सीबीआई जांच बैठी।

- महिला सुरक्षा की जांच के लिए पूरी दिन और आधी रात तक 30 किलोमीटर पैदल चली और सुरक्षा के इंतजाम की पोल खोली।

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