होमअपराधजेल की दीवार, बरी हुई दहेज जाँच: गोविंद की 20‑वर्षीय कहानी
अपराध

जेल की दीवार, बरी हुई दहेज जाँच: गोविंद की 20‑वर्षीय कहानी

गोविंद ने 20‑वर्षीय दहेज केस में जमानत न मिलने के कारण चार महीनों से अधिक जेल बिताया। चीफ डिफेंस काउंसिल की सहायता से, 12 अगस्त 2026 को उसे बरी कर दिया गया। बावजूद राहत के, आर्थिक कठिनाई ने उसकी आज़ादी की राह में अवरोध पैदा किया।

27 अगस्त 2026 को 04:55 pm बजे
जेल की दीवार, बरी हुई दहेज जाँच: गोविंद की 20‑वर्षीय कहानी

सौजन्य से:- Jagran

अदालत से मिली राहत, पर गरीबी बनी दीवार, 4 महीने जेल में रहने के बाद 20 साल पुराने मुकदमे से बरी हुआ रामपुर का गोविंद

दहेज उत्पीड़न के 20 साल पुराने मामले में निर्दोष गोविंद को वारंट के चलते चार माह से अधिक समय जेल में बिताना पड़ा, जहां वह जमानत भी नहीं करा सका।

HighLights

- निर्दोष गोविंद को दहेज मामले में जेल हुई।

- चार माह से अधिक समय जेल में बिताया।

- चीफ डिफेंस काउंसिल ने पैरवी कर बरी कराया।

जागरण संवाददाता, रामपुर। कानून की सख्ती कभी-कभी उन लोगों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर देती है, जिनका अपराध से कोई लेना-देना नहीं होता। संभल जिले थाना बहजोई के मुहल्ला अनाज मंडी निवासी गोविंद की कहानी इसका मार्मिक उदाहरण है।

दहेज उत्पीड़न के 20 साल पुराने मुकदमे में नामजद गोविंद को महज तारीखों पर अदालत में पेश न होने के कारण वारंट जारी होने के बाद चार माह से अधिक समय जेल में बिताना पड़ा। सबसे पीड़ादायक बात यह रही कि जेल से बाहर आने के लिए जरूरी जमानती तक उसके पास नहीं थे। चीफ डिफेंस काउंसिल ने उसकी पैरवी की और मुकदमे से बरी कराया।

बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के साहूकारा मुहल्ले की लक्ष्मी देवी ने वर्ष 2006 में अपने पति मनोज, सास राजरानी, ससुर लक्ष्मी नारायन और देवर गोविंद के खिलाफ दहेज एक्ट में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने पति, सास और गोविंद को जेल भेज दिया था। ससुर उम्र और बीमारी के चलते बाहर से ही जमानत पा गए थे।

सास तीन दिन और पति करीब तीन माह बाद जेल से जमानत पर बाहर आए। गोविंद को भी करीब दस दिन जेल में रहना पड़ा। जमानत के बाद गोविंद मजदूरी करने बाहर चला गया। मुकदमा चलता रहा, लेकिन वह लगातार तारीखों पर अदालत नहीं पहुंच सका। उसका कहना है कि वकील ने तारीखों की जानकारी नहीं दी।

बाद में न्यायालय ने उसकी पत्रावली अलग कर दी। उसकी मां, भाई और पिता के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। मुकदमे के विचारण के दौरान भाई की मौत हो गई। वर्ष 2019 में न्यायालय ने उसके माता-पिता को बरी कर दिया। बाद में उसकी मां की भी मृत्यु हो गई। तारीखों पर न आने पर न्यायालय ने गोविंद के वारंट जारी कर दिए। आठ अप्रैल 2026 को पुलिस ने वारंट के आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

गोविंद के लिए यह दौर बेहद कठिन था। वकील की फीस देने तक के पैसे नहीं थे। परिवार में कोई पैरवी करने वाला नहीं बचा। मां और भाई की मौत हो चुकी थी और पिता की मानसिक हालत ठीक नहीं थी। उससे जेल में मिलने तक कोई नहीं आता था। ऐसे समय में चीफ डिफेंस काउंसिल ने उसकी मदद की।

उन्होंने गोविंद की जमानत के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। छह जून को उसकी जमानत मंजूर हो गई, लेकिन 20 हजार रुपये के जमानती न मिलने से वह जेल से बाहर नहीं आ सका। यानी अदालत से राहत मिलने के बावजूद गरीबी उसकी आजादी के रास्ते में दीवार बन गई। इसके बाद असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल रमेश चंद्रा ने मुकदमे की पैरवी की। गोविंद की भाभी लक्ष्मी देवी की गवाही कराई गई।

उन्होंने अपने बयान में गोविंद को बेकसूर बताया और कहा कि मुकदमा पंजीकृत होने के बाद आपसी सहमति से उनका अपने पति मनोज से तलाक हो गया था। इसके बाद पति की मौत हो गई। अब उन्हें इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। देवर गोविंद द्वारा उनके साथ किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं किया गया था।

कुछ रिश्तेदारों व लोगों के बहकावे में आकर यह मुकदमा पंजीकृत कराया था। इस गवाही के बाद अदालत ने 12 अगस्त 2026 को गोविंद को बरी कर दिया। करीब साढ़े चार माह जेल में रहने के बाद निर्दोष साबित हुआ गोविंद अब बाहर है, लेकिन उसके लिए यह मामला सिर्फ एक मुकदमे का अंत नहीं, बल्कि उन मुश्किलों की कहानी है, जहां कानूनी राहत मिलने के बाद भी आर्थिक मजबूरी इंसान की आजादी रोक देती है।

जेल से छूटने के बाद आभार जताने पहुंचा

गोविंद 13 अगस्त को जेल से छूटने के बाद आभार जताने कचहरी स्थित चीफ डिफेंस काउंसिल के कार्यालय पहुंच। उसने चीफ लीगल एंड डिफेंस काउंसिल प्रवीण कुमार सिंह, डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल हेमंत जोशी और असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल रमेश चंद्रा का आभार जताया।

चीफ डिफेंस काउंसिल प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि हमारी टीम ने दो साल में 25 से अधिक मुकदमों में ऐसे निर्दोष बंदियों को दोषमुक्त कराया है, जिनकी कोई पैरवी करने वाला नहीं था। इसके साथ ही करीब 200 से अधिक मुकदमों का स्थायी रूप से निस्तारण भी कराया है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना
अपराध

इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया
अपराध

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया
अपराध

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
अपराध

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है

ताज़ा ख़बरें