हाईकोर्ट ने संभल हिंसा के दो आरोपी को जमानत दी, ट्रायल को एक वर्ष में पूरा करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद अली और मोहम्मद निहाल को जमानत दी और जनपद न्यायाधीश को सभी मामलों का मुकदमा एक साल के भीतर समाप्त करने का आदेश दिया। सुनवाई 7 सितंबर से शुरू होगी, जिसमें एआई‑आधारित स्पीच‑टू‑टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जाएगा, ताकि लगातार सुनवाई सुनिश्चित हो सके।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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संभल हिंसा के 2 आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत:एक साल में ट्रायल पूरा करने का आदेश; 7 सितंबर से होगी सुनवाई, AI ट्रांसक्रिप्शन-वीसी से होगी कार्रवाई
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संभल हिंसा से जुड़े दो आरोपियों मोहम्मद अली और मोहम्मद निहाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने जनपद न्यायाधीश को हिंसा से जुड़े सभी मामलों का ट्रायल एक साल के भीतर पूरा कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामलों को किसी विशेष अदालत को सौंपने और तय समय पर सभी पक्षों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है।
जिला शासकीय वकील राहुल दीक्षित ने शनिवार को बताया कि आरोपी पक्ष के वकीलों की ओर से लगातार सुनवाई टालने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी को देखते हुए अदालत में रोज सुनवाई कराने का आवेदन दिया गया था। मामले में इस आवेदन पर 7 सितंबर को सुनवाई होनी है।
उन्होंने बताया कि अब इन मामलों में नियमित रूप से सुनवाई कराने की तैयारी है। सुनवाई के दौरान स्पीच-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन के लिए AI तकनीक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। हाईकोर्ट ने भी ट्रायल को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
मोहम्मद अली और निहाल को मिली जमानत
राहुल दीक्षित के मुताबिक, हाईकोर्ट ने मोहम्मद अली की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही मोहम्मद निहाल को भी जमानत दी गई है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने जनपद न्यायालय को निर्देश दिया कि मामलों के जल्द निस्तारण के लिए तय तारीखों पर सभी संबंधित पक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा, 5 लोगों की हुई थी मौत
19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने चंदौसी की सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए याचिका दाखिल की थी। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को परिसर का पहला सर्वे किया गया। दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर को होना था।
सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और बाद में हिंसा भड़क गई। पुलिस के मुताबिक, भीड़ की ओर से पथराव और फायरिंग की गई। हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, तत्कालीन चर्चित एएसपी अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
12 FIR में 2,750 से ज्यादा लोगों पर केस
संभल कोतवाली और नखासा थाने में हिंसा से जुड़े कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया। पुलिस के मुताबिक, कुल 2,750 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। हालांकि, चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम हटा दिया गया।
जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट समेत 158 आरोपियों को जेल भेजा गया था। इनमें तीन महिलाएं और कथित मुख्य साजिशकर्ता गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम भी शामिल हैं। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद वारिस और गुलाम पर भी रासुका लगाई गई। शारिक साठा के खिलाफ रेड कॉर्नर लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है।
जफर अली समेत कई आरोपियों को मिल चुकी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जामा मस्जिद के सदर जफर अली को 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा किया गया था। उन्हें 24 मार्च 2025 को जेल भेजा गया था और 131 दिन बाद रिहाई हुई थी। संभल हिंसा से जुड़े मामले में अब तक कई अन्य आरोपियों को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब लंबित मामलों के ट्रायल को तय समयसीमा में पूरा कराने पर जोर रहेगा।
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