होमवकीलहाईकोर्ट ने 154 याचिकाओं को खारिज किया, वाराणसी भूमि अधिग्रहण के विवाद पर स्टे की कोई जगह नहीं
वकील

हाईकोर्ट ने 154 याचिकाओं को खारिज किया, वाराणसी भूमि अधिग्रहण के विवाद पर स्टे की कोई जगह नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली तीन एक साथ जुड़ी हुई याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अधिग्रहण के उद्देश्य में बदलाव के लिए पहले ही मुकदमे उठाए जा सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, इसलिए अब इसकी कोई जगह नहीं है।

11 अगस्त 2026 को 12:56 am बजे
हाईकोर्ट ने 154 याचिकाओं को खारिज किया, वाराणसी भूमि अधिग्रहण के विवाद पर स्टे की कोई जगह नहीं

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Uttar pradesh

- Prayagraj

- Varanasi Land Acquisition Case | Allahabad High Court Rejects Petitions

हाईकोर्ट ने 154 से अधिक याचिकाएं खारिज कीं:वाराणसी भूमि अधिग्रहण मामला: कोर्ट ने कहा चुनौती स्वीकार्य नहीं

- कॉपी लिंक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली तीन एक साथ जुड़ी हुई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला विजय कुमार और 153 अन्

जानिये क्या है मामला

यह विवाद वाराणसी के बैरवां और करनदादी गांवों में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत की गई अधिग्रहण कार्यवाही से जुड़ा है। यह अधिग्रहण वर्ष 2000 में शुरू हुआ था और इसे लेकर पहले भी तीन बार अदालतों में मुकदमेबाजी हो चुकी है। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी, वाराणसी ने 10 जनवरी 2024 को शेष भूमि के लिए एक अवार्ड (मुआवजा निर्धारण आदेश) पारित किया था, जिसे इन याचिकाओं में चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने दलील दी कि अवार्ड पुराने कानून के तहत पारित किया गया, जबकि इसे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत होना चाहिए था।बाजार मूल्य का निर्धारण 2013 अधिनियम के लागू होने की तारीख (1 जनवरी 2014) के आधार पर होना चाहिए था, न कि पुराने अवार्ड (20 सितंबर 2012) के आधार पर।

कब्जा लेने से पहले अनुमानित मुआवजे का 80% जमा नहीं किया गया, जिससे अधिग्रहण की वैधता पर सवाल उठता है।प्राधिकरण अधिग्रहीत भूमि का उपयोग "ट्रांसपोर्ट नगर" के निर्धारित उद्देश्य के बजाय निजी संस्थाओं को व्यावसायिक दरों पर बेचने में कर रहा है।

वाराणसी विकास प्राधिकरण का तर्क

वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि अवार्ड, इसी अदालत द्वारा पूर्व में 31 मई 2023 को दिए गए निर्देशों के अनुरूप ही पारित किया गया है, जिसमें दिल्ली एयरटेक सर्विसेज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारिति सिद्धांतों का पालन करने को कहा गया था। उनके अनुसार 80% मुआवजे की जमा राशि से जुड़ा मुद्दा पहले ही तय हो चुका है और दोबारा नहीं उठाया जा सकता।

खंडपीठ ने पाया कि विवादित अवार्ड में बाजार मूल्य का आधार 20 सितंबर 2012 वाले पूर्व अवार्ड को बनाया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली एयरटेक फैसले के अनुरूप ही है। अदालत ने कहा कि चूंकि मुआवजे की राशि पहले ही जमा की जा चुकी थी और 2003 में कब्जा भी ले लिया गया था, इसलिए धारा 11-ए के तहत अधिग्रहण के समाप्त होने का सवाल ही नहीं उठता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिग्रहण के उद्देश्य में बदलाव संबंधी आपत्ति पहले के मुकदमों में भी उठाई जा सकती थी, लेकिन नहीं उठाई गई, इसलिए अब इस आधार पर चुनौती स्वीकार्य नहीं है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
लोक अदालत में मामलों का निपटारा तेजी से होगा
वकील

लोक अदालत में मामलों का निपटारा तेजी से होगा

नशीली दवाओं की तस्करी पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध जांच और विशेष अदालतों की मांग पर नोटिस जारी किया
वकील

नशीली दवाओं की तस्करी पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध जांच और विशेष अदालतों की मांग पर नोटिस जारी किया

बलरामपुर में अदालत की पेशकार की मौत का मामला
वकील

बलरामपुर में अदालत की पेशकार की मौत का मामला

मणिपुर हिंसा के मामले सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें
वकील

मणिपुर हिंसा के मामले सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें

सुप्रीम कोर्ट ने की बात, मुकदमेबाजी के रुझान पर राज्य-वार डेटा मांगा
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने की बात, मुकदमेबाजी के रुझान पर राज्य-वार डेटा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी विवाद को लेकर केंद्र और असम सरकार से जवाब मांगा
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी विवाद को लेकर केंद्र और असम सरकार से जवाब मांगा

मुंबई HC का अगला मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस त्रिपाठी
वकील

मुंबई HC का अगला मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस त्रिपाठी

स्पीकर की अनुपस्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना में सांसदों के विलय को लेकर याचिका स्थगित करने का निर्देश दिया
वकील

स्पीकर की अनुपस्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना में सांसदों के विलय को लेकर याचिका स्थगित करने का निर्देश दिया

ताज़ा ख़बरें