हाईकोर्ट ने 154 याचिकाओं को खारिज किया, वाराणसी भूमि अधिग्रहण के विवाद पर स्टे की कोई जगह नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली तीन एक साथ जुड़ी हुई याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अधिग्रहण के उद्देश्य में बदलाव के लिए पहले ही मुकदमे उठाए जा सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, इसलिए अब इसकी कोई जगह नहीं है।

सौजन्य से:- दैनिक भास्कर
- हिंदी समाचार
- स्थानीय
- उत्तर प्रदेश
- प्रयागराज
- वाराणसी भूमि अधिग्रहण मामला | इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिकाएं खारिज कीं
हाईकोर्ट ने 154 से अधिक याचिकाएं खारिज कीं:वाराणसी भूमि अधिग्रहण मामला: कोर्ट ने कहा चुनौती स्वीकार्य नहीं
- कॉपी लिंक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली तीन एक साथ जुड़ी हुई याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला विजय कुमार और 153 अन्
जानिये क्या है मामला
यह विवाद वाराणसी के बैरवां और करनदादी गांवों में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत की गई अधिग्रहण कार्यवाही से जुड़ा है। यह अधिग्रहण वर्ष 2000 में शुरू हुआ था और इसे लेकर पहले भी तीन बार अदालतों में मुकदमेबाजी हो चुकी है। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी, वाराणसी ने 10 जनवरी 2024 को शेष भूमि के लिए एक अवार्ड (मुआवजा निर्धारण आदेश) पारित किया था, जिसे इन याचिकाओं में चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने दलील दी कि अवार्ड पुराने कानून के तहत पारित किया गया, जबकि इसे भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत होना चाहिए था।बाजार मूल्य का निर्धारण 2013 अधिनियम के लागू होने की तारीख (1 जनवरी 2014) के आधार पर होना चाहिए था, न कि पुराने अवार्ड (20 सितंबर 2012) के आधार पर।
कब्जा लेने से पहले अनुमानित मुआवजे का 80% जमा नहीं किया गया, जिससे अधिग्रहण की वैधता पर सवाल उठता है।प्राधिकरण अधिग्रहीत भूमि का उपयोग "ट्रांसपोर्ट नगर" के निर्धारित उद्देश्य के बजाय निजी संस्थाओं को व्यावसायिक दरों पर बेचने में कर रहा है।
वाराणसी विकास प्राधिकरण का तर्क
वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि अवार्ड, इसी अदालत द्वारा पूर्व में 31 मई 2023 को दिए गए निर्देशों के अनुरूप ही पारित किया गया है, जिसमें दिल्ली एयरटेक सर्विसेज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारिति सिद्धांतों का पालन करने को कहा गया था। उनके अनुसार 80% मुआवजे की जमा राशि से जुड़ा मुद्दा पहले ही तय हो चुका है और दोबारा नहीं उठाया जा सकता।
खंडपीठ ने पाया कि विवादित अवार्ड में बाजार मूल्य का आधार 20 सितंबर 2012 वाले पूर्व अवार्ड को बनाया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली एयरटेक फैसले के अनुरूप ही है। अदालत ने कहा कि चूंकि मुआवजे की राशि पहले ही जमा की जा चुकी थी और 2003 में कब्जा भी ले लिया गया था, इसलिए धारा 11-ए के तहत अधिग्रहण के समाप्त होने का सवाल ही नहीं उठता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिग्रहण के उद्देश्य में बदलाव संबंधी आपत्ति पहले के मुकदमों में भी उठाई जा सकती थी, लेकिन नहीं उठाई गई, इसलिए अब इस आधार पर चुनौती स्वीकार्य नहीं है।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरोपी को जेल में रखने के बाद मुकदमा खींचने की छूट नहीं

शहरी विकास कानून के लिए प्रस्तावों का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

अमेरिकी अदालत के फैसले से ट्रंप प्रशासन को बड़ी राहत, सीमा पर दीवार का निर्माण जारी

70 की आयु में भी हासिल की स्नातकोत्तर की उपाधि, ज्योतिरादित्य स्कारिया की कहानी

अस्थाई लोक अदालत से मिलेगी सुविधाएं, लेकिन क्या?

कार्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त पुलिस को बेहद महत्वपूर्ण संकेत दिया

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी: नागौर में तीन समझौतों पर सियासत

लोकसभा जांच समिति ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया, कहा- घर में भारी नकदी बंडलों के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं था
ताज़ा ख़बरें
- प्रशासनिक अधिकारियों ने लोक अदालत की तैयारी के लिए बैठक में दिए निर्देश
- पक्षकारों के बीच समझौता कराना लोक अदालत का मूल कर्तव्य
- न्यायमूर्ति पी.वी. कानून में संजय कुमार का करियर और महत्वपूर्ण फैसले
- क्या बी. सी. आई. कानूनी छात्रों को वकालत की जिंदगी से वंचित कर सकती है?
- राजस्थान हाई कोर्ट की इमारत में सुरक्षा का संकट, क्या न्यायपालिका अपने घर को सुरक्षित रख सकती है?
- न्यायिक निश्चितता का संकट: भारत में न्यायपालिका के उलटफेर की आवृत्ति
- सुप्रीम कोर्ट ने बी. सी. आई. के आदेश की आलोचना की, कहा कोई लेना-देना नहीं
- राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वीर सावरकर मामले में केस रद्द

