होमअपराधसुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी पर जताई चिंता, केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी पर जताई चिंता, केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी पर चिंता जताते हुए एक जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा और विशेषज्ञ एजेंसियों के मिले-जुले प्रयासों की जरूरत है।

11 अगस्त 2026 को 01:56 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी पर जताई चिंता, केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस

सौजन्य से:- Hindustan

मिलकर काम करें, ड्रग्स तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता; केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस

ड्रग्स तस्करी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके लिए सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मादक पदार्थों की तस्करी को बेहद गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। शीर्ष अदालत ने मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की तय समय-सीमा में जांच और सुनवाई के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया बनाने की मांग की गई है। सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने कहा कि ‘यह बहुत गंभीर समस्या है और इस खतरे से निपटने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों के मिले-जुले प्रयासों की जरूरत है और सभी एजेंसियों को साझा प्रयास करके इस समस्या का समाधान निकालना होगा।’

केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि नशीले पदार्थों का गलत इस्तेमाल और तस्करी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। इसमें कहा कहा है कि 2025 में ड्रग्स से जुड़े मामलों में 53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और 1,240 टन नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जो समस्या के बढ़ते दायरे को दिखाते हैं। याचिका में कहा गया कि ड्रग की लत परिवारों को बर्बाद कर रही है । शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में कहा गया कि मौजूदा सिस्टम में जांच के एक जैसे नियम, तय समय में फोरेंसिक जांच और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की कमी है, मुकदमे में देरी होती होती है।

CJI सूर्यकांत ने विदेशों से पंजाब में नशीले पदार्थों के आने का जिक्र किया, जबकि न्यायमूर्ति बागची ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और 'स्वर्ण अर्धचंद्र' से इसकी निकटता के मद्देनजर ड्रग तस्करी के सीमा पार आयामों को उजागर किया। उन्होंने इस संदर्भ में अफगानिस्तान और म्यांमार का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलू न्यायालय के सामने उठाये गये मुद्दे से पूरी तरह संबंधित हैं।

याचिका में क्या मांगें की गई हैं

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने इस जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर एनडीपीएस अधिनियम के तहत जांच, अभियोजन पक्ष, सजा और पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने के लिए कई निर्देशों की मांग की है। इसमें नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की समयबद्ध जांच एवं सुनवाई, तस्करों की संपत्तियों की जब्ती और पूरे देश में एक समान जांच प्रक्रिया लागू करना शामिल है।

याचिकाकर्ता ने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रिपोर्ट जमा करने के लिए अनिवार्य समय सीमा और एनडीपीएस मामलों में तलाशी, जब्ती व नमूना लेने से जुड़े मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की मांग की है। इसके अलावा, मामलों की त्वरित जांच और सुनवाई के लिए अधिनियम की धारा 36 और 36ए के तहत विशेष अदालतों के गठन का भी अनुरोध किया गया है। अन्य मांगों के साथ याचिका में तलाशी, जब्ती और नमूना लेने की कार्यवाही की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग व वीडियोग्राफी कराने तथा नये मनोप्रभावी पदार्थों की पहचान व समय पर उन्हें प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का आग्रह किया गया है।

इसके अलावा याचिका में एनडीपीएस अधिनियम के तहत ड्रग तस्करी से अर्जित संपत्ति की समयबद्ध पहचान और जब्ती के साथ-साथ विधि आयोग को इस मुद्दे का व्यापक अध्ययन करने का निर्देश देने की मांग की गयी है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि एक समान जांच मानकों की कमी, फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी, अपर्याप्त विशेष अदालतें और पुनर्वास बुनियादी ढांचे की कमी ने एनडीपीएस अधिनियम के क्रियान्वयन को कमजोर कर दिया है।

याचिका में कहा गया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के परिणाम सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवारों पर राष्ट्रव्यापी होते हैं। साथ ही यह संगठित अपराध और आतंकी वित्तपोषण को बढ़ावा देती है, जिसके लिए जांच, अभियोजन, सजा और पुनर्वास के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय ढांचे की तत्काल आवश्यकता है।

लेखक के बारे में

Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।

राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।

अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

और पढ़ें

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
ड्रग तस्करी पर सख्ती की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्य सरकारों से मांगा जवाब
अपराध

ड्रग तस्करी पर सख्ती की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्य सरकारों से मांगा जवाब

तृणमूल कांग्रेस नेता ने अभिषेक बनर्जी पर किया हमला, कहा- सुप्रीम कोर्ट की शर्तें क्या पारिभाषित हैं?
अपराध

तृणमूल कांग्रेस नेता ने अभिषेक बनर्जी पर किया हमला, कहा- सुप्रीम कोर्ट की शर्तें क्या पारिभाषित हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार हत्या मामले में राम रहीम की बरी की अनुमति के खिलाफ याचिका स्वीकार की
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार हत्या मामले में राम रहीम की बरी की अनुमति के खिलाफ याचिका स्वीकार की

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने का आग्रह किया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के मामलों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने का आग्रह किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने मकोका मामले में पूर्व आप विधायक नरेश बाल्यान को जमानत देने से इनकार कर दिया
अपराध

दिल्ली हाई कोर्ट ने मकोका मामले में पूर्व आप विधायक नरेश बाल्यान को जमानत देने से इनकार कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने चीनी नागरिक की जमानत पर लगाई रोक
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने चीनी नागरिक की जमानत पर लगाई रोक

महाराष्ट्र सार्वजनिक सुरक्षा कानून: बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने याचिका से खुद को अलग किया
अपराध

महाराष्ट्र सार्वजनिक सुरक्षा कानून: बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने याचिका से खुद को अलग किया

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को बरी करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
अपराध

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को बरी करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

ताज़ा ख़बरें