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मणिपुर हिंसा के मामले सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में जातीय हिंसा के 200 से अधिक लोगों की मृत्यु और कई लोग विस्थापित होने के मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें गठित करने का निर्देश दिया है।

10 अगस्त 2026 को 05:57 pm बजे
मणिपुर हिंसा के मामले सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें

सौजन्य से:- हिंदुस्तान

मणिपुर हिंसा मामलों की सुनवाई के लिए बनेंगी दो विशेष अदालतें

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों को उन मामलों की जानकारी प्रदान करने को कहा, जिनमें आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। मणिपुर में जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोगों की मृत्यु और कई लोग विस्थापित हो चुके हैं।

नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर और असम सरकार तथा अन्य से कहा कि वे मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े सीबीआई और एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए दो विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करें। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिकारियों को उन मामलों का विवरण तैयार करने का निर्देश दिया जिनमें आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, ताकि पीड़ित, उनके परिवार और कानूनी सलाहकार संबंधित रिकॉर्ड देख सकें। पीठ ने संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सुनवाई की अगली तारीख से पहले इस मामले पर एक वस्तु स्थिति रिपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि अधिकारियों को दो अलग-अलग विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करना चाहिए। एक सीबीआई मामलों के लिए और दूसरी मणिपुर हिंसा से जुड़े एनआईए मामलों के लिए। मणिपुर में जातीय हिंसा में 3 मई 2023 से अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने अपनी बनाई एक समिति से उन दावों की जांच करने को कहा, जिनके मुताबिक जातीय हिंसा से प्रभावित करीब 24,000 परिवारों को अब तक सरकारी पुनर्वास और कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस समेत कई वकीलों की दलीलों पर ध्यान दिया, जिनमें कहा गया था कि प्रभावित कई आदिवासियों को अब तक पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। पीठ उन लोगों के पुनर्वास के मामले की सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने हिंसा के दौरान अपने घर और आजीविका के साधन खो दिए थे।

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