झीरम घाटी नरसंहार में 13 साल बाद NIA की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपी को दोषी करार दिया
छत्तीसगढ़ के बस्तर में 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले के सभी बचे दस आरोपियों को NIA की विशेष अदालत ने 13 साल बाद दंडित किया है। अदालत ने 31 अगस्त की सुनवाई को पाँच दिन टाल कर 5 सितंबर को फैसला सुनाया, जहाँ अभियोजन ने 101 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए जबकि बचाव ने कोई गवाह नहीं लाया। इस हत्याकांड में 32 लोगों की मौत हुई और कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं को लक्ष्य बनाया गया था।

सौजन्य से:- Jagran
झीरम घाटी नरसंहार में 13 साल बाद आया फैसला, NIA की विशेष अदालत से सभी 10 आरोपी दोषी करार
एनआईए की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले के सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है।
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डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े और खौफनाक नक्सली हमलों में से एक 2013 के झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने अपना अहम फैसला सुना दिया है।
अदालत ने इस मामले में शामिल सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले की सुनवाई एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की बेंच में चल रही थी।
विशेष अदालत में 12 अगस्त को झीरम घाटी हमले को लेकर अंतिम सुनवाई पूरी हो गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और निर्णय सुनाने के लिए पहले 31 अगस्त की तारीख मुकर्रर की थी।
हालांकि, बाद में इस फैसले को पांच दिन के लिए टाल दिया गया और अंततः 5 सितंबर को यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया गया।
एक हजार पन्नों की चार्जशीट की थी पेश
एनआईए ने इस मामले की विस्तृत जांच के बाद वर्ष 2015 में अदालत के समक्ष लगभग एक हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। इस चार्जशीट में शुरुआत में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
जांच और सुनवाई के दौरान इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी बचे 10 आरोपी फिलहाल जगदलपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं।
अदालत में चले लंबे मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपना केस मजबूत करने के लिए कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके विपरीत, बचाव पक्ष की ओर से खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए अदालत में एक भी गवाह पेश नहीं किया जा सका।
झीरम घाटी का वह काला दिन
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में कांग्रेस पार्टी द्वारा परिवर्तन यात्रा निकाली जा रही थी। जब नेताओं का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था, तब घात लगाए बैठे सैकड़ों माओवादियों ने उन पर चारों तरफ से अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं।
इस वीभत्स हमले में कुल 32 लोगों की जान गई थी और 38 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हालांकि, एनआईए ने अपनी चार्जशीट में आधिकारिक तौर पर 27 मृतकों की ही जानकारी दी है।
इस भीषण नक्सली हमले का मुख्य निशाना कांग्रेस के शीर्ष नेता थे। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित कई प्रमुख नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी।
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