सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दिल्ली पुलिस की माँग: 13 FIR रद्द, 2,873 नई FIR का प्रस्ताव
दिल्ली पुलिस ने 20‑25 जुलाई के बीच हुए CJP विरोध प्रदर्शनों से संबंधित 13 FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर किया है, जबकि 2,873 गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति माँगी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के अनुसार ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ के दायरे में आने वाले मामलों पर आधारित है।

सौजन्य से:- AajTak
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दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग की है. हालांकि, पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है, जिन्हें गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया गया है. इंडिया टुडे ने पुलिस की ओर से दाखिल आवेदन को एक्सक्लूसिव तौर पर हासिल किया है.
दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह फैसला 25 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से लिए गए निर्णय के आधार पर किया गया है. इसके बाद पुलिस ने अपने आवेदन में दर्ज घटनाओं से जुड़ी 13 FIR को रद्द करने की मांग की है. पुलिस ने कहा कि प्रस्तावित FIR और उसके बाद होने वाली जांच सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश में ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ की व्याख्या के मुताबिक की जाएगी.
पुलिस ने यह भी कहा है कि इस आवेदन में शामिल घटनाओं को लेकर आगे कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी. सिर्फ उन 2,873 लोगों के खिलाफ विशेष FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है, जिनकी पहचान पुलिस ने की है.
यह मामला खास तौर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP प्रदर्शनों से जुड़ा है. इसे उन छात्रों से जुड़ी अलग याचिका से अलग समझा जाना चाहिए, जिन्होंने NEET परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए व्यापक प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था.
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1 सितंबर को NEET FIR पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की उस याचिका पर मंगलवार, 1 सितंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने सोमवार की कार्यवाही के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के तत्काल सुनवाई के अनुरोध पर मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी.
केंद्र ने कहा कि वह प्रदर्शन से जुड़ी FIR को रद्द कराने के लिए अंतरिम आवेदन दाखिल करना चाहता है और संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहा है. अदालत ने कहा कि अगर पक्षों के बीच सहमति बन रही है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है और मंगलवार को मामले पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई.
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के उस स्पष्टीकरण के बाद आई है, जिसमें अदालत ने कहा था कि उसके पहले के आदेश में ‘क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स’ का मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों से है. अदालत ने कहा था कि अन्य छात्रों के खिलाफ FIR को राज्य कानून के मुताबिक बंद या वापस ले सकते हैं.20 जुलाई को CJP की ओर से आयोजित संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी. संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था.
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कोर्ट ने गठित की थी जांच समिति
प्रदर्शन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कई शहरों तक फैल गया था. 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद और CJP की अन्य मांगें सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने पर आंदोलन समाप्त कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व शीर्ष अदालत के न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की थी, जिसे देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों समेत विभिन्न मुद्दों और आरोपों की जांच करनी थी.
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