होमअपराधजालौन में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: पुराने मुकदमों का नि:शुल्क और त्वरित समाधान
अपराध

जालौन में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: पुराने मुकदमों का नि:शुल्क और त्वरित समाधान

12 सितंबर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न लंबित आपराधिक, नागरिक और पारिवारिक मामलों का आपसी समझौते के आधार पर नि:शुल्क निपटारा होगा। यह मंच सरल, तेज़ और अंतिम निर्णय प्रदान करता है, जिससे पक्षकार समय और खर्च दोनों में राहत पाएंगे।

7 सितंबर 2026 को 11:31 am बजे
जालौन में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: पुराने मुकदमों का नि:शुल्क और त्वरित समाधान

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- Local

- Uttar pradesh

- Jalaun

- Jalaun National Lok Adalat | Resolve Legal Cases Without Any Court Fee

जालौन में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन:सालों पुराने मुकदमों का सुलह-समझौते से होगा समाधान, नहीं लगेगा कोई शुल्क

- कॉपी लिंक

12 सितंबर 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन के तत्वावधान में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के लंबित मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर शीघ्र एवं अंतिम निस्तारण कराया जाएगा। खास बात यह है कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के लिए किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं होगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चंद्रा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में लघु प्रकृति के आपराधिक वादों के साथ ही विभिन्न न्यायालयों और विभागों से संबंधित ऐसे मामलों का निस्तारण कराया जाएगा, जो लोक अदालत में संदर्भित किए जा सकते हैं। तहसील न्यायालय से लेकर उच्च स्तर के न्यायालयों में लंबित उपयुक्त मामलों के पक्षकार आपसी सहमति के आधार पर अपने विवाद का समाधान करा सकते हैं।

राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय आपराधिक वाद, स्टांप एवं राजस्व वाद, बैंक ऋण वसूली, भूमि अधिग्रहण, उपभोक्ता संबंधी मामले, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, टैक्स संबंधी मामले, बिजली चोरी, बैंक बाउंस एवं धारा 138 एनआई एक्ट, चालान, श्रम विभाग और जलकर सहित विभिन्न मामलों का निस्तारण कराया जा सकता है।

समय और खर्च से मिल सकती है राहत

इसके अलावा ऐसे मामले जो अभी न्यायालय में दाखिल नहीं हुए हैं, उन्हें भी प्री-लिटिगेशन स्तर पर सुलह-समझौते के माध्यम से समाप्त कराने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए भी लोक अदालत प्रभावी मंच साबित हो सकती है।

लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता इसका सरल, त्वरित और समझौता आधारित स्वरूप है। पक्षकार स्वयं पहल कर अपने विवाद को निस्तारण के लिए ला सकते हैं। आपसी सहमति से मामला समाप्त होने पर वर्षों तक चलने वाली मुकदमेबाजी के साथ समय और खर्च से भी राहत मिल सकती है। लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम होता है और सामान्यतः उसके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता।

सचिव ने जनपदवासियों से अपील की कि जिनके मामले राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित किए जा सकते हैं, वे 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं और अपने विवादों का शांतिपूर्ण एवं त्वरित समाधान कराएं। उन्होंने कहा कि त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और राष्ट्रीय लोक अदालत इसी दिशा में प्रभावी माध्यम है

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना
अपराध

इल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने इत्तेहाद‑ए‑मिल्लत काउंसिल अध्यक्ष की जमानत याचिका खारिज, 'सर‑तन‑से‑जुदा' नारे को राष्ट्रीय एकता की चुनौती माना

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद पर डॉक्टर‑हिंसा केस में जमानत पर कड़ी चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हिंसा को कड़ा संदेश: नेताओं को जवाबदेह ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने 3‑महीने की सीमा तय की, फिर फैसला देने में दो साल लगाए

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया
अपराध

लाम डोंग प्रांत ने व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के प्रचार-प्रसार के साथ साइबर सुरक्षा अभ्यास कार्यक्रम का शुभारंभ किया

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा: विदेश में लापता भारतीय की जाँच का कानूनी आधार क्या?

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया
अपराध

शिमला कोर्ट ने शादी के झांसे के आरोप में आरोपी को बरी किया

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है
अपराध

हाईकोर्ट ने तय किया: शरिया कोर्ट नहीं बना सकता वैध तलाक, केवल धार्मिक राय दे सकता है

ताज़ा ख़बरें