दुष्कर्म की बढ़ती लहर: निर्भया के 13 साल बाद भी दिल्ली की सुरक्षा पर प्रश्न
निर्भया कांड के 13 साल बाद भी दिल्ली में दुष्कर्म की संख्या चार गुना हो गई; 2013‑2025 में 25,710 मामले दर्ज, जबकि 2000‑2012 में सिर्फ 6,628। कानून में बदलाव और सुरक्षा योजनाओं के बावजूद नई बस घटना से स्पष्ट है कि जमीन पर सुरक्षा में गहरी कमी है।

सौजन्य से:- Jagran
सरकारें बदलीं, कानून बदले, व्यवस्थाएं बनीं... फिर भी नहीं बदली दिल्ली की तस्वीर; 12 साल में 25710 दुष्कर्म
निर्भया कांड के 13 साल बाद भी दिल्ली महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है, हालिया बस दुष्कर्म ने सुरक्षा दावों ...और पढ़ें
HighLights
- चलती बस में नाबालिग से दुष्कर्म ने सुरक्षा पर सवाल उठाए।
- निर्भया के बाद 12 साल में 25,710 दुष्कर्म मामले दर्ज हुए।
- कानून बदलने और फंड के बावजूद महिला सुरक्षा में कमी।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। निर्भया कांड के बाद दिल्ली को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के दावे हुए, कानून बदले, नई व्यवस्थाएं बनीं और सरकारें भी बदलती रहीं, लेकिन 13 साल बाद राजधानी में एक नाबालिग ने गलत बस स्टाप पर उतरने पर मदद के लिए जिस सार्वजनिक परिवहन का सहारा लिया, उसी में उसकी सुरक्षा तार-तार हो गई।
चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म ने राष्ट्रीय राजधानी में महिला सुरक्षा की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे निर्भया के बाद मजबूत करने का दावा व वादा किया गया था। लेकिन निर्भया कांड के 13 साल बाद भी राष्ट्रीय राजधानी उसी स्थान पर खड़ी है, जहां आज भी रात में मदद तलाशना भी किसी महिला या किशोरी के लिए सुरक्षित नहीं।
दिल्ली पुलिस के उपलब्ध वार्षिक आंकड़ों के अनुसार 2013 से 2025 के बीच राजधानी में 25,710 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए। जबकि 2000 से 2012 के बीच 6,628 मामले दर्ज हुए थे। यानी निर्भया के बाद के 12 वर्षों में दर्ज मामलों की संख्या उससे पहले के 12 वर्षों के मुकाबले करीब चार गुनी रही।
सरकारें बदली पर महिला सुरक्षा का हाल नहीं
दिसंबर 2012 में जब निर्भया के साथ दरिंदगी हुई तब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग और दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी। घटना के बाद देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकारों पर दबाव बढ़ा।
न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति गठित हुई कानून में बदलाव किए गए और सार्वजनिक परिवहन की निगरानी, महिला हेल्पलाइन, पुलिस गश्त तथा त्वरित कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के दावे हुए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड भी बनाया गया।
इसके बाद केंद्र और दिल्ली में सत्ता बदली। जो दल विपक्ष में रहते हुए महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर तत्कालीन सरकारों को घेरते रहे थे, वे सत्ता में आए, उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के दावे किए। मगर मौजूदा घटना बताती है कि व्यवस्था बदलने के दावों और जमीन पर सुरक्षा के बीच अब भी बड़ा फासला है।
निर्भया के बाद यह बनी थी व्यवस्था
-आपराधिक कानून संशोधन: दुष्कर्म और यौन अपराधों की सजा कड़ी
-पीछा करना दंडनीय अपराध
-महिला की निजी गतिविधि की चोरी-छिपे रिकार्डिंग पर सजा
-तेजाब हमले को अलग अपराध मान सजा बढ़ाई
-अश्लील टिप्पणी, इशारे आदि कानून के दायरे में
-कार्यस्थल कानून: महिलाओं के यौन उत्पीड़न की शिकायत के लिए आंतरिक समिति अनिवार्य
-पाक्सो कानून: बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए विशेष कानून
-2018 में नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में कठोर सजा और मृत्युदंड तक का प्रविधान
-महिला हेल्प डेस्क: दिल्ली के थानों में महिलाओं की शिकायत के लिए विशेष व्यवस्था
-हिम्मत एप: संकट में महिलाओं को पुलिस से तत्काल जोड़ने की व्यवस्था
-संवेदनशील इलाकों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती
-छात्राओं और महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
-सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों में कैमरे लगाने पर जोर
-डार्क स्पाट सुधार: अंधेरे इलाकों में स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था
-112 आपातकालीन सेवा: पुलिस समेत आपात सेवाओं के लिए एकीकृत नंबर
-सेफ सिटी परियोजना: दिल्ली में तकनीक आधारित महिला सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की पहल
-विशेष महिला सुरक्षा टास्क फोर्स: दिल्ली में महिला सुरक्षा उपायों की निगरानी के लिए तंत्र
यह भी पढ़ें- बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मामला: 26 दिन तक दबा रहा सच, दिल्ली पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल
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