1.13 करोड़ रुपये की फीस पर कॉलेज ने डिग्री रोकी, NIA जांच से उत्पन्न मामला सुप्रीम कोर्ट में
पुजा कुमारी ने 2017 में चेट्टिनाड अकादमी में MBBS की पढ़ाई पूरी कर ₹1.13 लाख रुपये की फीस जमा की। 2021 में NIA ने माओवादी लिंक के आरोप में उसके रिश्तेदारों पर मामला दर्ज कर छात्रा की फीस को जब्त कर लिया, जिसके कारण कॉलेज ने डिग्री जारी करने से इंकार किया। मद्रास हाईकोर्ट ने 2024 में उसकी याचिका खारिज कर दी, और अब सुप्रीम कोर्ट में यह तय किया जाना है कि उसे डिग्री मिलेगी या फिर पुनः फीस जमा करनी पड़ेगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
MBBS में दाखिला, पूरी की पढ़ाई लेकिन डिग्री देने से कॉलेज का इंकार
दरअसल तमिलनाडु के Chettinad Academy of Research and Education में नियमित काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए पुजा कुमारी ने 2017 में MBBS में दाखिला लिया था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पढ़ाई के दौरान करीब ₹1,13,70,500 फीस बैंकिंग चैनल के जरिए जमा की। फिर सारी पढ़ाई और जरूरी इंटर्नशिप भी पूरा किया। लेकिन डिग्री देने से कालेज ने मना कर दिया। मामले में विवाद उनकी शैक्षणिक योग्यता पर नहीं, बल्कि फीस के स्रोत और बाद में उस रकम की NIA द्वारा जब्ती पर खड़ा हुआ। लेकिन क्यों? आगे पढ़िए...NIA जांच ने फीस को माओवादी लिंक से जोड़ा
इस मामले में एक बड़ी बात जो गैर करने वाली है, वह यह कि दिसंबर 2021 में NIA ने छात्रा के कुछ रिश्तेदारों के खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें कथित माओवादी लिंक की जांच की जा रही थी। छात्रा के भाई को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया। और फिर जांच बढ़ी तो NIA ने छात्रा की मेडिकल फीस के लिए इस्तेमाल हुई रकम को कथित माओवादी लिंक और अपराध से प्राप्त धन से जुड़ा माना और कॉलेज से वह राशि जब्त कर ली। इसी जब्ती के बाद कॉलेज का कहना है कि वास्तव में छात्रा की मेडिकल फीस तो उसे मिली नहीं और फिर उसने अंतिम शैक्षणिक प्रमाणपत्र को जारी करने से इनकार कर दिया।मद्रास हाईकोर्ट से भी छात्रा राहत नहीं
फिर यह विवाद पहुंचा मद्रास हाईकोर्ट, जहां अप्रैल 2024 में छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट ने माना कि सामान्य परिस्थितियों में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को फीस की सुरक्षा के तौर पर रोकना उचित नहीं माना जाता, लेकिन इस मामले में कॉलेज को NIA की कार्रवाई के कारण फीस की राशि वास्तव में नहीं मिली। अदालत ने कहा कि यदि छात्रा खुद को निर्दोष मानती है और रकम को वैध बताती है, तो वह सक्षम विशेष अदालत के सामने जब्त धनराशि रिलीज कराने का रास्ता अपना सकती है। ऐसे में छात्रा ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाना उचित समझा।छात्रा की दलील और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
- 3 सितंबर 2026 को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने छात्रा की याचिका पर सुनवाई की
- छात्रा की दलील है कि उसने अपनी फीस पहले ही जमा कर दी थी और उसने MBBS की सभी शैक्षणिक आवश्यकताएं पूरी कर ली हैं। और फिर वह NIA की जांच में आरोपी भी नहीं है, इसलिए रिश्तेदारों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई का परिणाम उसके शैक्षणिक अधिकारों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
- मामले में NIA से जुड़े तथ्यों पर गौर करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी किया।
- मामले में अभी सुप्रीम कोर्ट ने यह तय नहीं किया है कि छात्रा को डिग्री तुरंत दी जाएगी या उसे दोबारा फीस जमा करनी होगी। इसलिए फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट का फैसला चुनौती के अधीन है और अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेश पर निर्भर करेगी।
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