मुफ्त UPI का दौर समाप्त? नए कानून से आपके पैसे के हिसाब में बदल सकती है स्थिति
लोकसभा से पारित नए कानून से आपकी यूपीआई ट्रांजैक्शन पर दंड से बचना जरूरी क्योंकि इसमें दंड का उल्लेख किया गया है संभव है कि यहां नए बिल के कारण या तो आपको या किसी भी पेमेंट के लिए शुल्क देना पड़ सकता है

सौजन्य से:- ABP News
मुफ्त UPI का सफर खत्म! नए कानून से आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा?
लोकसभा से पास हुए नए बिल के बाद आगे चलकर यूपीआई और दूसरे डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगने का रास्ता खुल गया है. क्या अब हर यूपीआई पेमेंट पर पैसे देने होंगे? जानिए पूरा मामला.
रोज यूपीआई से पेमेंट करने वालों के लिए खास खबर है. लोकसभा ने एक ऐसा बिल पास किया है, जिससे आने होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का रास्ता खुल गया है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि आज से यूपीआई पर पैसे कटने शुरू हो जाएंगे. फिलहाल, यूपीआई पहले की तरह ही फ्री है. नए कानून के बाद सरकार को जरूरत पड़ने पर कुछ डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगाने का अधिकार मिल जाएगा.
क्या यूपीआई पर चार्ज देना होगा?
नहीं, अभी आम लोगों के लिए यूपीआई पूरी तरह फ्री है. सरकार ने कोई नया चार्ज लागू नहीं किया है. सिर्फ कानून में ऐसा बदलाव किया गया है, जिससे आगे चलकर सरकार तय कर सके कि किन डिजिटल पेमेंट पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जाए और किन पर नहीं.
अब अमेरिका से एथेनॉल इंपोर्ट करेगा भारत? ट्रेड डील पर सरकार का आया बयान
मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है?
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो फीस है जो किसी डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को मिलता है. पहले यूपीआई और रू पे डेबिट कार्ड पर जीरो एमडीआर की व्यवस्था थी, यानी दुकानदारों से भी यह शुल्क नहीं लिया जाता था. अब नए कानून के बाद सरकार जरूरत के हिसाब से इस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है.
आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
फिलहाल आपकी जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार ने अभी किसी तरह का चार्ज लागू नहीं किया है. लेकिन अगर आगे चलकर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होता है, तो उसका असर दुकानदारों, पेमेंट कंपनियों और कुछ मामलों में ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. हालांकि ये पूरी तरह सरकार के आने वाले फैसले पर डिपेंड करेगा.
लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी में भी गिरावट
सरकार ने बदलाव क्यों किया?
सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में बैंक और पेमेंट कंपनियों के लिए इस सिस्टम को चलाने और बेहतर बनाने की लागत भी बढ़ रही है. नए कानून से सरकार के पास जरूरत के मुताबिक नियम तय करने की सुविधा होगी.
हर यूपीआई पेमेंट पर फीस लगेगी?
अभी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है. सरकार चाहे तो सिर्फ कुछ खास तरह के ट्रांजैक्शन या बड़े भुगतान पर एमडीआर लागू कर सकती है. ये भी पॉसिबल है कि छोटे लेनदेन या आम ग्राहकों के लिए यूपीआई पहले की तरह मुफ्त ही रहे.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
देवेंद्रकुला वेल्लालर ने SC टैग छोड़कर सामाजिक सम्मान की मांग की

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: टिकट न होने पर भी ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

अदालत‑एडीआर सहयोग से पारिवारिक विवादों का तेज़ समाधान

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: मेरठ में 16,000‑से‑अधिक संपत्तियों पर कार्रवाई

परिवारिक विवादों में न्यायालय‑एडीआर का सहयोगी मॉडल

टिकट न मिलने पर भी 8 लाख का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी परिवार को

टिकट न मिलने पर भी मुआवजा मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट ने 8 लाख की रक़म बहाल की

सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी ज़ोन में वाणिज्यिक कार्यवाही पर सील लगाने का कड़ा आदेश
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने चीनी‑एथेनॉल मुआवजा दावों के 103.4 अरब रियाल के मुद्दे को पूर्ण पीठ तक पहुँचाया
- सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध कॉलोनियों पर सख्त कदम, न्यायिक आयोग बनाकर ध्वस्तीकरण का आदेश
- मोदी सरकार ने OBC ‘क्रीमी लेयर’ नियम लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो साल की रियायत माँगी
- अंतर्राष्ट्रीय कानून की स्नातक ने नौकरी छोड़कर सब्जी विक्रय में रोज़ 200 किग्रा बेचना शुरू किया
- केन्द्र सरकार ने OBC क्रीमी लेयर नियम लागू करने के लिए दो साल की राहत की माँग की
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों में 12 जजों को स्थायी पद दिलवाया
- शरई अदालत में बढ़ते तलाक‑नफका के केस, हर महीने 30 मामले, काउंसलिंग से समाधान
- LiveLaw ने लॉन्च किया ‘ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट’ – न्यायिक अपडेट अब तुरंत

