जीतन राम मांझी ने यूसीसी की वकालत की, कहा सभी को संविधान के तहत समान अधिकार
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बताया कि वे यूसीसी के आरम्भ से ही समर्थनकर्ता रहे हैं और धार्मिक रीति‑रिवाज़ों से ऊपर संविधान के अनुच्छेद 44 में निर्धारित समानता को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि एक ही कानून सभी के लिए अनिवार्य होना चाहिए और कई राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है, जिसे बाकी राज्यों में भी जल्द लागू किया जाएगा। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों में फूट और चुनावी चिन्हों के बदलाव को भी टिप्पणी किया।

सौजन्य से:- ABP News
UCC के समर्थन में जीतन राम मांझी, बोले- 'कानून के नजरिए से सब एक'
गया में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने UCC पर कहा कि वह यूसीसी के शुरू से ही समर्थक रहे हैं. हम घर में पूजा करते हैं या क्या करते हैं, इससे मतलब नहीं, संविधान का अनुच्छेद 44 समान अधिकार देता है.
गया में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर शनिवार (20 सितंबर) को कहा कि वह यूसीसी के शुरू से ही समर्थक रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हम कांग्रेस में थे, राजद में थे या आज हम जहां हैं, हमारे दिमाग में यह बात बनी हुई है कि हमारे धार्मिक कार्यक्रम अलग हो सकते हैं, लेकिन जहां तक भारत का सवाल है, संविधान के अनुच्छेद 44 में समान अधिकार की बात है. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में भी समानता का निर्देश दिया गया है.
हम घर में पूजा करते हैं या क्या करते हैं, इससे मतलब नहीं है, लेकिन अगर भारत सरकार के स्तर पर बात होगी तो एक-दूसरे से कहीं-कहीं मेल नहीं खाता हो और उस आचरण के चलते सेपरेशन नजर आता है तो संविधान के दृष्टिकोण से यह सही नहीं है. एक देश, एक कानून होना ही चाहिए. जो इस देश में रहना चाहते हैं, वह रह सकते हैं, उनको संविधान का अनुपालन करना चाहिए. समानता की बात आती है तो अलग-अलग कानून की बात कहां से आती है.
कोई धोती पहनता है, कोई पजामा पहनता इसमें कोई खलल नहीं
इसलिए यूसीसी लागू करने के लिए गृह मंत्री की ओर से घोषणा हुई है, इसे लागू होना चाहिए. बहुत सारे राज्यों में इसे लागू किया गया है, वहां कहां कोई बवाल है. वैसे ही अन्य राज्यों में भी कुछ दिनों में इसे लागू कराएंगे. लोगों को समर्थन देना चाहिए और मानना चाहिए. तुल नहीं देना चाहिए.
हम पूर्व की ओर पूजा करते हैं या पश्चिम की ओर पूजा करते हैं, इसमें कहां कोई खलल है. कोई धोती पहनता है, कोई पजामा पहनता है तो इसमें कहां कोई खलल है. लेकिन कुछ ऐसी बातें हैं, जिससे समाज पर उसका असर आता है. उन बातों पर ध्यान रखना चाहिए. कानून के दृष्टिकोण से सब एक हैं, इसलिए यूसीसी लागू होने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.'
टीएमसी पर जीतन राम मांझी ने कहा कि जब से वह राजनीति में हैं, उन्होंने देखा है कि कांग्रेस समेत अन्य दलों में भी जब फूट होती है और दो गुट बन जाते हैं तो जो पहला चुनाव चिन्ह होता है, वह फ्रीज हो जाता है. उन्होंने कहा कि परिस्थिति टीएमसी की भी वही है. दो गुट बन गए हैं और दोनों गुट परस्पर दावा करने लगे हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने पुराने सिंबल को फ्रीज कर नया सिंबल दे दिया है.
यह कोई अप्रत्याशित राजनीतिक घटना नहीं है. यह मान्य परंपरा के आधार पर घटित घटना है. इसे तूल देने की जरूरत नहीं है. नंदीग्राम चुनाव पर उन्होंने कहा कि जो इंडिया ग्रुप है, उसमें टीएमसी और कांग्रेस भी हैं. टीएमसी को लगा होगा कि कांग्रेस को समर्थन देना चाहिए, इसलिए कांग्रेस सामने आई है. यह आपसी मामला है.
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इतनी बड़ी जनसंख्या में घटना घटना कोई आश्चर्यजनक नहीं
दिल्ली में 17 साल की बच्ची के साथ हुई घटना को लेकर प्रियंका गांधी के बयान पर जीतन राम मांझी ने कहा कि वह राजनीति में आई हैं. उन्होंने कहा, 'हम तो 1980 से राजनीति में हैं और कांग्रेस की ही राजनीति की है. एक से एक घटनाएं हुई हैं, उन घटनाओं को भी प्रियंका गांधी को याद करना चाहिए. 140 करोड़ की जनसंख्या वाला देश है. इसमें अगर सामान्य रूप से कानून उस पर एक्शन करता है. घटना नहीं घटे, इतना बड़ा देश है, तो इतनी बड़ी जनसंख्या में घटना घट जाना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है.
रही बात घटना के बाद सरकार क्या करती है, तो उद्भेदन के साथ कार्रवाई करती ही है. सरकार की नीति यह कभी नहीं है कि दुष्कर्म करने वालों को प्रोटेक्शन देंगे और किसी प्रकार की सहूलियत देंगे. भारत सरकार के जो कानून हैं, उसके तहत कार्रवाई होगी ही.'
बिहार में नीरज सिंह और अनंत सिंह के बीच बढ़े विवाद पर जीतन राम मांझी ने कहा कि यह व्यक्तिगत मामला है. लेकिन उनके समझ में यह बात आती है कि अगर आपसी बात भी है तो यह हवा में नहीं आनी चाहिए. आपस में ही निपट लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी एनडीए को मजबूत रहना बहुत आवश्यक है. एनडीए में किसी प्रकार का रार उत्पन्न करना उचित नहीं है. दोनों से वह कहते हैं कि संयम बरतें.
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