कठुआ में मवेशी तस्करी के आरोपी को 6700 रुपये जुर्माने की सजा, पशु का अधिकार भी छीन लिया गया
न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने मवेशी तस्करी मामले में आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत कुल 6700 रुपये का जुर्माना दिया और जब्त पशु का मालिकाना हक उससे छीना। आरोपी ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे दोषी ठहराया गया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Kathua News: मवेशी तस्करी में आरोपी ने अदालत में कबूला जुर्म, 6700 रुपये जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने मवेशी तस्करी मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए उस पर विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करने के लिए 6700 रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने जब्त पशु की मालिकाना हक से भी आरोपी को किया वंचित कर दिया है। यह फैसला कोर्ट ने आरोपी द्वारा अपना अपराध स्वीकार करने के बाद सुनाई है।
मामले की सुनवाई गत 17 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल द्वारा की गई। चालान को कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें आरोपी अपने अधिवक्ता के साथ उपस्थित हुआ। इस दौरान आरोपी ने स्वयं आवेदन देकर मामले में दोष स्वीकार करने की इच्छा जताई। अदालत ने उसे स्पष्ट रूप से बताया कि वह दोष स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है और उसके द्वारा दिया गया बयान उसके खिलाफ पढ़ा जा सकता है।
अदालत ने आरोपों का सार आरोपी को पढ़कर समझाया और उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया। इसके बावजूद आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करने पर जोर दिया। इसके बाद अदालत ने उसका बयान दर्ज किया और मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने बीएनएस की धारा 223 (जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना) के तहत 4000 रुपये, पशु के साथ क्रूरता करने के लिए 11 पीसीए अधिनियम के तहत 200 रुपये और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 3/181 (बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने) के तहत 2500 रुपये जुर्माने लगाया गया। आरोपी ने जुर्माने कुल 6700 रुपये की राशि मौके पर कोर्ट में जमा करवा दी गई। अदालत ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा मामले में दोष स्वीकार कर दोषी ठहराए जाने के बाद वह मामले में शामिल मवेशियों के स्वामित्व से वंचित करने का आदेश दिया।
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कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने मवेशी तस्करी मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए उस पर विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करने के लिए 6700 रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने जब्त पशु की मालिकाना हक से भी आरोपी को किया वंचित कर दिया है। यह फैसला कोर्ट ने आरोपी द्वारा अपना अपराध स्वीकार करने के बाद सुनाई है।
मामले की सुनवाई गत 17 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल द्वारा की गई। चालान को कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें आरोपी अपने अधिवक्ता के साथ उपस्थित हुआ। इस दौरान आरोपी ने स्वयं आवेदन देकर मामले में दोष स्वीकार करने की इच्छा जताई। अदालत ने उसे स्पष्ट रूप से बताया कि वह दोष स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है और उसके द्वारा दिया गया बयान उसके खिलाफ पढ़ा जा सकता है।
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अदालत ने आरोपों का सार आरोपी को पढ़कर समझाया और उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया। इसके बावजूद आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करने पर जोर दिया। इसके बाद अदालत ने उसका बयान दर्ज किया और मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने बीएनएस की धारा 223 (जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना) के तहत 4000 रुपये, पशु के साथ क्रूरता करने के लिए 11 पीसीए अधिनियम के तहत 200 रुपये और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 3/181 (बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने) के तहत 2500 रुपये जुर्माने लगाया गया। आरोपी ने जुर्माने कुल 6700 रुपये की राशि मौके पर कोर्ट में जमा करवा दी गई। अदालत ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा मामले में दोष स्वीकार कर दोषी ठहराए जाने के बाद वह मामले में शामिल मवेशियों के स्वामित्व से वंचित करने का आदेश दिया।
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