सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ ग्रुप का प्रस्ताव खारिज किया, हजारों घर खरीदारों को राहत की आशा
सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ रियल एस्टेट कंपनी के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें खरीदारों को एक साल में ब्याज सहित रिफंड या तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करने का कहा गया था, इसे देरी की रणनीति बताया गया। अदालत ने कंपनी के बैंक खाते फ्रीज़, संपत्तियों की बिक्री पर रोक और अमेज़न इंडिया में हिस्सेदारी जब्त करने की संभावना सहित कई निर्देश जारी किए, और रिफंड व फंड जमा करने की प्रक्रिया तेज करने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Supreme Court on Parsvanath News: सुप्रीम कोर्ट से पार्श्वनाथ रियल स्टेट कंपनी को जोर का झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उनका एक प्रस्ताव ठुकराते हुए कहा कि और ज्यादा तकलीफ होगी। पूरा मामला हजारों घर खरीदारों से जुड़ा है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मुश्किलों में घिरी रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ के एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसमें 4,000 घर खरीदारों को या तो एक साल के भीतर RERA की ओर से तय ब्याज के साथ पैसे वापस करने या तीन साल के भीतर रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने बिल्डर के इस दांव को देरी करने की चाल बताया, जिसका मकसद उन लोगों को और परेशान करना है जो पूरी कीमत चुकाने के बावजूद दशकों से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं।
सीजेआई के नेतृत्व वाली बेंच ने क्या कहा
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि पहली नजर में हम इस बात से सहमत हैं कि यह प्रस्ताव प्रोजेक्ट्स को पूरा करने या RERA के अंतिम आदेशों के अनुसार घर खरीदारों को पैसे वापस करने में देरी करने का एक और तरीका है। परेशान घर खरीदारों को राहत देने के बजाय, यह प्रस्ताव उनकी परेशानी और तनाव को बढ़ाएगा, हम इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। बेंच ने वाटिका ग्रुप को भी नोटिस जारी किया क्योंकि उसने उन चार खरीदारों को फ्लैट का कब्जा नहीं दिया था जिन्होंने पूरी कीमत चुका दी थी।
पार्श्वनाथ ग्रुप से जुड़ा मामला जानिए
CJI की अगुवाई वाली बेंच ने कई आदेशों के जरिए पार्श्वनाथ ग्रुप की कंपनियों और उसके डायरेक्टर्स के बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया है और मौजूदा घरों और संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगा दी है। सीनियर एडवोकेट एम.एल. लाहोटी ने बेंच को बताया कि पार्श्वनाथ की अमेजन (इंडिया) में 48.3% हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि घर खरीदारों को पैसे वापस करने या फ्लैट सौंपने के मकसद से ग्रुप की संपत्तियों के साथ इस हिस्सेदारी को भी जब्त करने पर विचार किया जाना चाहिए।
बेंच ने कह दी बड़ी बात
बेंच इस अपील पर विचार करने के लिए सहमत हुई और कहा, 'डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों की अमेजन (इंडिया) में हिस्सेदारी जब्त करने के लिए उचित अर्जी दी जाए, और हिस्सेदारी का सबूत रिकॉर्ड पर आने के बाद ऐसी अपील पर विचार किया जाएगा।' बेंच ने यह भी कहा कि वह ग्रुप के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को भी अपने फ्रीजिंग आदेश के दायरे में लाने पर विचार कर सकती है, जिन्हें अब तक इससे बाहर रखा गया था।
दो सीनियर सीटिजन पहुंचे SC और...
पार्श्वनाथ ग्रुप तब मुश्किल में फंस गया जब दो सीनियर सिटिजन ने सीनियर एडवोकेट प्रिया हिंगोरानी के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और शिकायत की कि उन्होंने 2008 के सेल-परचेज एग्रीमेंट के अनुसार 2010 में ही पूरी कीमत चुका दी थी। हालांकि, गुड़गांव के एक प्रोजेक्ट में उनके फ्लैट अभी तक उन्हें नहीं सौंपे गए हैं। मंगलवार को हिंगोरानी ने कोर्ट का ध्यान ऐसे चार घर खरीदारों के मामलों की ओर दिलाया, जिन्हें वाटिका ग्रुप ने इसी तरह धोखा दिया था।
और मुश्किल में फंसा पार्श्वनाथ ग्रुप
सुप्रीम कोर्ट ने वाटिका ग्रुप को नोटिस जारी किया - जिस पर ED पहले से ही जांच कर रही है और उससे कहा कि वह RERA की ओर से तय की गई रकम सुप्रीम कोर्ट में जमा करे, ताकि घर खरीदारों को भुगतान किया जा सके।
पार्श्वनाथ ग्रुप के मामले में बेंच ने कहा, 'हम बस इतना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में इतनी रकम जमा की जाए जिससे कोर्ट की बनाई कमेटी उन दावों के हिसाब से भुगतान कर सके जो फाइनल हो चुके हैं, या फिर रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और रहने लायक घरों को सौंपने के लिए जरूरी फंड जमा किया जाए।'
अदालत ने अब तक क्या कुछ कहा
यह साफ करते हुए कि अभी उनके आदेश में ग्रुप के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स शामिल नहीं हैं, बेंच ने कहा, 'चूंकि हमारे सामने (सीनियर वकील नवीन पाहवा की ओर से) रखा गया प्रस्ताव इन उम्मीदों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरता, इसलिए हमारे पास इसे खारिज करने के अलावा कोई चारा नहीं है। पाहवा एक नया प्रस्ताव दाखिल करने के लिए और समय चाहते हैं, जिसे शायद घर खरीदार स्वीकार कर लें।'
लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।
पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
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