सुप्रीम कोर्ट का आग्रह: कानून पढ़ाई की अवधि तय करने हेतु विशेषज्ञ निकाय का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने कानून की पढ़ाई कितने दिन की होनी चाहिए, इस विषय को गंभीर बताया और निर्णय लेने के लिए एक विशेषज्ञ निकाय की स्थापना का प्रस्ताव रखा। इस पर आधारित, कोर्ट ने कानून के पाठ्यक्रम व LLB‑LLM पाठ्यक्रम की अवधि की समीक्षा हेतु शिक्षा आयोग गठित करने की याचिका पर सुनवाई जारी रखी।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: विशेषज्ञ निकाय तय करेगा कानून की पढ़ाई कितने दिन की हो, सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी
Wed, 09 Sep 2026 03:48 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 09 Sep 2026 03:48 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून की पढ़ाई कितनी दिन की होनी चाहिए यह मुद्दा गंभीर है। इसके निर्धारण के लिए एक विशेषज्ञ निकाय होना चाहिए। शीर्ष कोर्ट कानून के पाठ्यक्रम व एलएलबी-एलएलएम कोर्स की अवधि की समीक्षा के लिए शिक्षा आयोग गठित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, यह विशेषज्ञ निकायों का दौर है और कानूनी शिक्षा के लिए भी एक विशेषज्ञ निकाय होना चाहिए। इस मामले में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है और उसे इस पर कोई पहल करनी चाहिए। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 सभी पेशेवर और अकादमिक पाठ्यक्रमों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को बढ़ावा देती है, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एलएलबी और एलएलएम के मौजूदा पाठ्यक्रम, सिलेबस और अवधि की समीक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि पांच वर्षीय बीए-एलएलबी और बीबीए-एलएलबी पाठ्यक्रम की अवधि पाठ्यक्रम सामग्री के अनुपात में अधिक है। इसके कारण छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, यह विशेषज्ञ निकायों का दौर है और कानूनी शिक्षा के लिए भी एक विशेषज्ञ निकाय होना चाहिए। इस मामले में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है और उसे इस पर कोई पहल करनी चाहिए। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 सभी पेशेवर और अकादमिक पाठ्यक्रमों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को बढ़ावा देती है, लेकिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एलएलबी और एलएलएम के मौजूदा पाठ्यक्रम, सिलेबस और अवधि की समीक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि पांच वर्षीय बीए-एलएलबी और बीबीए-एलएलबी पाठ्यक्रम की अवधि पाठ्यक्रम सामग्री के अनुपात में अधिक है। इसके कारण छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
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