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दिल्ली हाई कोर्ट के 11‑साल पुराने इमारत सुरक्षा आदेशों पर अभी भी टलमटोल

सत्य निकेतन हादसे के बाद इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट के निर्देशों का अभी तक पूरा पालन नहीं हुआ है, वकील अर्पित भार्गव ने इसे कार्यान्वयन की कमी और अधिकारियों के बार‑बार बदलने से जोड़कर बताया है। कोर्ट द्वारा दी गई अवमानना याचिकाएँ भी कई सालों से पेंडिंग हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को इस विषय पर सुनवाई कर इस मुद्दे को आगे बढ़ा सकता है।

9 सितंबर 2026 को 03:32 am बजे
दिल्ली हाई कोर्ट के 11‑साल पुराने इमारत सुरक्षा आदेशों पर अभी भी टलमटोल

सौजन्य से:- Navbharat Times

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा को लेकर पुराने कोर्ट आदेशों पर सवाल उठे हैं। 11 साल पहले हाई कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनका पूरी तरह पालन नहीं हुआ।

नई दिल्ली: सत्य निकेतन हादसे के बाद इमारतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि दिल्ली हाई कोर्ट में 11 साल पहले उठाया गया इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा का मुद्दा आज भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। कोर्ट ने कई बार निर्देश दिए, लेकिन सरकारी विभागों की ओर से कार्रवाई अब भी तारीखों और जवाबों में उलझी हुई है। इस मुद्दे को हाई कोर्ट में उठाने वाले वकील अर्पित भार्गव ने NBT से बातचीत में कहा कि असली समस्या आदेश देने की नहीं, उन्हें ज़मीन पर लागू कराने की है। उनके मुताबिक, अदालत की अवमानना की कार्रवाई में भी प्रभावी नतीजा नहीं निकल रहा।

भार्गव ने कहा, 'इम्प्लीमेंटेशन ऑन ग्राउंड है ही नहीं। स्टेटमेंट आएंगे, रिप्लाई आएगा, रिजॉइंडर आएगा और इतने में अधिकारी बदल जाएंगे। फिर मामला वही का वही रह जाता है। अगर किसी एक अधिकारी को भी अवमानना में सजा मिल जाए तो पूरे प्रशासन को स्पष्ट संदेश जाएगा। उसके बाद लोग कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से लेंगे।' भार्गव के मुताबिक, उन्होंने करीब 11 साल पहले इमारतों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि इमारतें नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुरूप और संरचनात्मक रूप से सुरक्षित हों लेकिन आदेशों का पालन नहीं हुआ। 11 साल हो गए।

क्या का कोर्ट ने

कोर्ट ने डायरेक्शन दिया कि हर बिल्डिंग नेशनल बिल्डिंग कोड के हिसाब से बनेगी। 2016 में ही कहा गया था कि सारे बिल्डिंग स्ट्रक्चरल सेफ होंगे लेकिन वह किया ही नहीं गया। अवमानना याचिकाओं की स्थिति पर उन्होंने कहा कि ये भी वर्षों से लंबित हैं। छह साल से आदेश की अवमानना याचिका पेंडिंग है। 2023 से आज तक सरकार जवाब दाखिल नहीं कर पाई है। बड़ा सवाल यही है- अगर आदेश सालों तक लागू न हों, तो असुरक्षित इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

10 सितंबर को SC करेगा मामले में सुनवाई

सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरने से 2 लोगों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को हादसे से जुड़े मुद्दे पर विचार करेगा। जरूरत पड़ने पर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले को अपने पास ट्रांसफर करने पर भी विचार किया जाएगा। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के सामने उभर कर आए मुद्दे गंभीर हैं और सुप्रीम कोर्ट में पहले से चल रहे देशव्यापी मामले से जुड़े हैं। एमिक्स क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट में अब PIL पर सुनवाई भी चल रही है। हाईकोर्ट ने MCD की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

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