होमकानूनसुप्रीम कोर्ट: बर्खास्तगी का निर्णय लेने में बरतें बहुत सावधानी, इसके होते हैं विनाशकारी दुष्परिणाम - supreme court be very careful in taking the decision of dismissal
कानून

सुप्रीम कोर्ट: बर्खास्तगी का निर्णय लेने में बरतें बहुत सावधानी, इसके होते हैं विनाशकारी दुष्परिणाम - supreme court be very careful in taking the decision of dismissal

सुप्रीम कोर्ट: बर्खास्तगी का निर्णय लेने में बरतें बहुत सावधानी, इसके होते हैं विनाशकारी दुष्परिणाम सुप्रीम कोर्ट ने निजी और सरकारी क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सभी अधिकारियों से कहा है कि किसी भी मामले में सेव…

Jagran के अनुसार11 जून 2026 को 10:35 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट: बर्खास्तगी का निर्णय लेने में बरतें बहुत सावधानी, इसके होते हैं विनाशकारी दुष्परिणाम - supreme court be very careful in taking the decision of dismissal

सौजन्य से:- Jagran

सुप्रीम कोर्ट: बर्खास्तगी का निर्णय लेने में बरतें बहुत सावधानी, इसके होते हैं विनाशकारी दुष्परिणाम

सुप्रीम कोर्ट ने निजी और सरकारी क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सभी अधिकारियों से कहा है कि किसी भी मामले में सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) से संबं ...और पढ़ें

HighLights

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इसके होते हैं विनाशकारी दुष्परिणाम

बताया किन मामलों में किस तरह से प्रशासन ले निर्णयॉ

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निजी और सरकारी क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सभी अधिकारियों से कहा है कि किसी भी मामले में सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) से संबंधित निर्णय लेने में वे बहुत सावधानी बरतें। इस निर्णय का केवल व्यक्ति ही नहीं बल्कि उस पर आश्रित परिवारीजनों को विनाशकारी परिणाम भुगतना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एक महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही है। यह महिला महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी की सेवा में थी और उसे बर्खास्त कर दिया गया था।

मामले में पीठ ने कंपनी से जवाब मांगा है। पीठ ने कहा, बर्खास्तगी का निर्णय किसी कर्मी के गंभीर तरीके के गलत आचरण, उसके लगातार जारी रहने और उससे संस्थान की कार्य व्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की स्थिति में लिया जाना चाहिए।

जिस तरह के मामले पर कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए उनमें भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, अत्यधिक अनैतिक घृणित व्यवहार, गंभीर किस्म के गलत प्रस्तुतिकरण से संस्थान को होने वाले नुकसान, लंबे समय तक रही दागदार छवि जैसे विषय हैं।

लेकिन उनमें भी निर्णय लेने वाले अधिकारियों को सेवा समाप्ति का फैसला लेने से पहले बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

पीठ ने कहा, सेवा समाप्ति के निर्णय से पहले आरोपित कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ मिले साक्ष्यों की बारीकी से जांच होनी चाहिए और परिस्थितियों पर गौर किया जाना चाहिए।

स्थितियां पुष्ट होने पर ही संस्थान को बर्खास्तगी और अन्य कठोर कदम उठाने चाहिए। बर्खास्तगी के निर्णय से पहले आरोपित की आयु, संस्थान में उसके कार्यकाल में किए कार्य की गुणवत्ता, छवि, अतीत की गतिविधियों, संस्थान को होने वाली आर्थिक नुकसान, आरोपित को होने वाले आर्थिक नुकसान और कई बातों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

खबरें और भी

मां पर हत्या का केस बेटे की अनुकंपा नियुक्ति में बाधा नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि मृत सरकारी कर्मचारी की पत्नी के खिलाफ चल रहा आपराधिक मुकदमा उसके बेटे के अनुकंपा नियुक्ति के दावे को स्वत: प्रभावित नहीं कर सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के संबंधित नियम में ऐसी स्थिति में केवल अनुकंपा वित्तीय सहायता पर रोक का प्रविधान है, नियुक्ति पर नहीं।

जस्टिस संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हरियाणा निवासी अतुल चौहान की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर उसके अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर नियमानुसार विचार करने का निर्देश दिया।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

यूपी के आईएएस अधिकारी के खिलाफ जारी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक
कानून

यूपी के आईएएस अधिकारी के खिलाफ जारी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक

बॉम्बे हाई कोर्ट ने डीजीसीए के 2011 के पायलट लाइसेंस के निलंबन को 'अवैध' करार दिया
कानून

बॉम्बे हाई कोर्ट ने डीजीसीए के 2011 के पायलट लाइसेंस के निलंबन को 'अवैध' करार दिया

गृहणियां 'राष्ट्र निर्माता' हैं, उनके काम का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रति माह है: सुप्रीम कोर्ट
कानून

गृहणियां 'राष्ट्र निर्माता' हैं, उनके काम का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रति माह है: सुप्रीम कोर्ट

गृहिणी होममेकर नहीं ‘नेशन बिल्डर’, सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा तय करते हुए ऐसा क्यों कहा?
कानून

गृहिणी होममेकर नहीं ‘नेशन बिल्डर’, सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा तय करते हुए ऐसा क्यों कहा?

वक्फ संपत्ति के लिए आवश्यक है कानूनी प्रक्रिया
हाई कोर्ट

वक्फ संपत्ति के लिए आवश्यक है कानूनी प्रक्रिया

झारखंड हाई कोर्ट का आदेश, आधी सजा काट चुके कैदियों की रिहाई पर सरकार दे जवाब
 - jharkhand high court seeks govt reply on prisoner release
कानून

झारखंड हाई कोर्ट का आदेश, आधी सजा काट चुके कैदियों की रिहाई पर सरकार दे जवाब - jharkhand high court seeks govt reply on prisoner release

सुप्रीम कोर्ट बोला-गृहणियों के काम की कीमत ₹30,000 महीना जितनी:  उन्हें होममेकर नहीं नेशन बिल्डर कहें, वे परिवार की नींव मजबूत करती हैं
कानून

सुप्रीम कोर्ट बोला-गृहणियों के काम की कीमत ₹30,000 महीना जितनी: उन्हें होममेकर नहीं नेशन बिल्डर कहें, वे परिवार की नींव मजबूत करती हैं

सुप्रीम कोर्ट: 19 साल पुराने हादसे में सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर किया 25 लाख, क्या है मामला
कानून

सुप्रीम कोर्ट: 19 साल पुराने हादसे में सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर किया 25 लाख, क्या है मामला

ताज़ा ख़बरें