सुप्रीम कोर्ट में बदतमीजी की घटना पर SCAORA ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने मुकदमेबाज की बदतमीजी की घटना की निंदा की है और अदालत की गरिमा को बनाए रखने के लिए उचित कार्रवाई की मांग की है. एसोसिएशन ने कहा कि अदालत के धैर्य को कमजोरी नहीं समझना चाहिए.

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट में मुकदमेबाज की बदतमीजी पर भड़का SCAORA; कहा-'अदालत के धैर्य को कमजोरी न समझें'
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यूपी के मुकदमेबाज प्रबल प्रताप द्वारा गाली-गलौज और कागजात फेंकने की घटना पर SCAORA ने कड़ी नाराजगी जताई है.
By Sumit Saxena
Published : July 11, 2026 at 10:35 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने शनिवार को शीर्ष अदालत के रूम के भीतर एक मुकदमेबाज के कथित अपमानजनक व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की. बयान में, SCAORA ने कहा कि उसकी कार्यकारी समिति ने इस घटना को "बेहद गंभीरता" से लिया है, जिसमें खुद पेश हो रहे एक मुकदमेबाज ने शीर्ष अदालत के सामने कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, अनादरपूर्ण बातें कहीं.
बयान में कहा गया, "अदालत द्वारा दिखाई गई उदारता, धैर्य और संयम की गहराई से सराहना करते हुए, समिति इस बात पर जोर देती है कि न्यायिक गरिमा और सहनशीलता को अदालत की कमजोरी या संकल्प की कमी नहीं समझा जाना चाहिए."
बयान में आगे कहा गया कि न्यायिक कार्यवाही की गरिमा और बेंच (जज), बार (वकील) और मुकदमेबाजों के बीच आपसी सम्मान कानून के शासन और न्याय व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं. समिति ने चिंता जताते हुए कहा कि सुर्खियों में आने, पब्लिसिटी पाने या अदालत पर दबाव बनाने के लिए न्यायिक कार्यवाही का दुरुपयोग करने की कोशिशें, कानूनी प्रक्रिया के साथ एक गंभीर खिलवाड़ हैं.
इसमें आगे कहा गया कि ऐसे व्यवहार को कड़ाई से रोका जाना चाहिए, जो अदालत की पवित्रता को ठेस पहुंचाता है और डराने-धमकाने, सनसनी फैलाने या पब्लिसिटी पाने वाले हथकंडों के जरिए न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करता है.
बयान में कहा गया, "कार्यकारी समिति आदरपूर्वक यह मांग करती है कि अदालत की गरिमा और अधिकार को बनाए रखने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, ऐसे मामलों में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए."
बयान में आगे जोड़ा गया, "समिति ऐसी घटनाओं से जुड़े वीडियो, मैसेज या किसी भी अन्य सामग्री को रिकॉर्ड करने और शेयर (सर्कुलेट) करने की कड़ी निंदा करती है. समिति सभी संबंधित लोगों से अपील करती है कि वे इसे फैलाने से बचें, क्योंकि ऐसी चीजें शेयर करने से न्यायिक कार्यवाही का सनसनीखेज मजाक बनता है और इस संस्था की गरिमा और पवित्रता को ठेस पहुंचती है."
शुक्रवार को, उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले मुकदमेबाज प्रबल प्रताप, जो अदालत में खुद ही अपना पक्ष रख रहे थे, पर आरोप है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) के एक आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने गाली-गलौज की और अपने कानूनी कागजात फेंक दिए. बाद में उसे शीर्ष अदालत से जबरन बाहर निकाल दिया गया.
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