सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार, जमानत विरोध पर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आपराधिक मामलों में जमानत का विरोध करने और सुनवाई में देरी करने पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने हर हफ्ते चार गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है।

सौजन्य से:- Jagran
'हम जनता के सामने आपकी पोल खोल देंगे', सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में जमानत का विरोध करने और सुनवाई में देरी करने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
- जमानत विरोध के साथ सुनवाई में देरी पर जताई नाराजगी।
- हर हफ्ते चार गवाहों के बयान दर्ज करने का निर्देश।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक आपराधिक मामले में विदेशी नागरिक की जमानत याचिका का विरोध करने पर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य सरकारें जमानत का पुरजोर विरोध तो करती हैं, लेकिन मुकदमों की सुनवाई में तेजी नहीं लातीं। अगर यही रवैया रहा, तो वे अदालत में राज्य की पोल खोल देंगे।
मुकदमे में देरी पर जताई गंभीर चिंता जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ अपहरण और हत्या के मामले में फंसे विदेशी नागरिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपित पिछले चार सालों से जेल में है। उसने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट में उसके मामले की 86 बार तारीख लगी, लेकिन पुलिस ने उसे 53 बार कोर्ट में पेश ही नहीं किया।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए इसे महाराष्ट्र सरकार की गंभीर लापरवाही माना। पीठ ने कहा कि चार साल बीत जाने के बाद भी 34 गवाहों में से केवल दो की गवाही हो सकी है। त्वरित सुनवाई आरोपित का मौलिक अधिकार है, लेकिन राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब राज्य जमानत का विरोध करता है, तो उसका यह भी कर्तव्य है कि वह मुकदमे की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाए। हर हफ्ते चार गवाहों के बयान दर्ज करने के निर्देश महाराष्ट्र सरकार के वकील ने दलील दी कि अब आरोपितों को हर तारीख पर कोर्ट में पेश किया जा रहा है।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर असंतोष जताते हुए राज्यों से मुकदमों में तेजी लाने के लिए एक ठोस नीति बनाने को कहा। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि अब इस मामले में हर हफ्ते कम से कम चार गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और इस आदेश की कापी ट्रायल कोर्ट के सामने रखी जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे मामले सामने आने पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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