होमवकीलराजपाल यादव जेल गئे! दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 मिनट का फैसला सुनाया
वकील

राजपाल यादव जेल गئे! दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 मिनट का फैसला सुनाया

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की दो मिनट के भीतर सजा सुनाई। इस मामले में उन्हें 3 महीने की जेल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने एक्टर को फटकार भी लगाई और कहा कि उनके हिसाब से कानून की स्क्रिप्ट नहीं बदली जा सकती। एक्टर पर आर्थिक विवाद से जुड़े कई चेक बाउंस होने का आरोप लगाया गया था।

11 जुलाई 2026 को 05:57 am बजे
राजपाल यादव जेल गئे! दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 मिनट का फैसला सुनाया

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने एक बार फिर फैसला सुना दिया है और एक्टर को 3 महीने की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने एक्टर को फटकार भी लगाई और कहा कि उनके हिसाब से कानून की स्क्रिप्ट नहीं लिखी जाएगी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक्टर राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा। यह मामला 'मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' के साथ हुए एक आर्थिक विवाद से जुड़े कई चेक बाउंस होने के मामलों से संबंधित था। कोर्ट ने कड़े शब्दों में दिए गए फैसले में इस कपल की 21 याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि ट्रायल कोर्ट या सेशंस कोर्ट के निष्कर्षों में दखल देने का कोई कारण नहीं है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने कई सालों तक याचिकाकर्ताओं को बहुत रियायत दी, फिर भी वे अपने किए गए वादों को पूरा करने में बार-बार नाकाम रहे।

कार्रवाई के दौरान राजपाल यादव के बर्ताव पर गौर करते हुए, हाई कोर्ट ने पाया कि पिछली बेंच ने पहली सुनवाई में ही संकेत दे दिया था कि वह मामले के गुण-दोष के आधार पर उनकी सजा में दखल देने की इच्छुक नहीं है। हालांकि, शिकायतकर्ता के साथ मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की इच्छा जताने के बाद उनकी सजा पर रोक लगा दी गई थी। फैसले में दर्ज है कि राजपाल यादव ने पैसे का इंतजाम करने के लिए बार-बार अतिरिक्त समय मांगा और व्यक्तिगत रूप से तथा अपने वरिष्ठ वकील के जरिए कई बार कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह शिकायतकर्ता का पैसा लौटा देंगे।

राजपाल यादव वादे पूरे करने में नाकाम रहे

इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए, कोर्ट ने बार-बार सुनवाई स्थगित की और उनकी सजा पर रोक जारी रखी। लंबे समय तक कई मौके मिलने के बावजूद, एक्टर कोर्ट के सामने दिए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहे। आखिरकार, इसके चलते उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया। हालांकि कुछ भुगतान करने के बाद उन्हें और राहत दी गई, लेकिन दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके।

राजपाल यादव ने चुना जेल का रास्ता

हाई कोर्ट के मुताबिक, मामले में तब एक अहम मोड़ आया जब राजपाल यादव ने कोर्ट को बताया कि वह 'शिकायतकर्ता को कोई रकम देने को तैयार नहीं हैं और पैसे लौटाने के बजाय पांच बार जेल जाना पसंद करेंगे।'

कोर्ट ने क्या कहा?

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा कि हालांकि कोई पक्षकार पैसे चुकाने के बजाय जेल जाने का विकल्प चुन सकता है, लेकिन ऐसा फैसला कानून से ऊपर नहीं हो सकता और न ही कोर्ट के सामने किए गए वादों को खत्म कर सकता है। ANI के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, 'यह कहने की जरूरत नहीं है कि अगर कोई पक्षकार कोर्ट में दिए गए कई वादों को मानने के बजाय जेल जाने का रास्ता चुनना चाहता है, तो यह पूरी तरह से उसकी अपनी पसंद है।'

कानून कोई ऐसी स्क्रिप्ट नहीं है जिसे किसी एक्टर की मर्जी से दोबारा लिखा जा सके, और न ही रणनीति बदलने के साथ कानूनी स्थिति को बदला जा सकता है... कोर्ट तय कानूनी सिद्धांतों के आधार पर फैसला करते हैं और हर पक्षकार से निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान की उम्मीद करते हैं।

कोर्ट

राजपाल यादव की अपील ठुकराई

हाई कोर्ट ने 'प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट' के तहत प्रोबेशन पर रिहाई की राजपाल यादव की अपील भी ठुकरा दी। कोर्ट का कहना था कि उनका आचरण ऐसा नहीं था कि उन्हें कानून के तहत मिलने वाली विशेष राहत दी जाए।

लेखक के बारे मेंकनिका सिंहकनिका सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजीटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital content producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की 'एंटरटेनमेंट' (Entertainment) टीम से जुड़ी हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल जर्नलिज्म में उनका 7 साल लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम किया है। कनिका ने फरवरी 2022 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 साल में फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, फिल्म रिव्यू, ओपिनियन, रियलिटी शोज और सेलिब्रिटी इंटरव्यूज जैसे काम किए हैं। इसके अलावा, कनिका ने अपने करियर में हेल्थ, टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल जैसी बीट पर भी काम किया है।

बड़ी फिल्मों के ट्रेलर की कॉपी तैयार करना हो, या ट्रेंडिंग खबरों से लेकर ब्रेकिंग पर काम करना हो, कम समय में कॉपी बनाकर पब्लिश करना कनिका की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- फिल्मों को लेकर चल रही हाइप और यूथ पर इसके असर की एनालिसिस कॉपी तैयार करना, वायरल ट्रेंड वाली खबरों पर काम करना, हर फिल्म पर अपने नजरिए से ओपिनियन लिखना, बिग बॉस शो को तीन महीने फॉलो करना और इस पर लगातार यूनिक कॉपी बनाना।

पत्रकारिता अनुभव: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आउटपुट डेस्क और डिजिटल मीडिया में 7 साल से कार्यरत कनिका सिंह ने साल 2018 से VNR Digital media से करियर की शुरुआत की। फिर नवभारत टाइम्स के साथ फ्रीलांसर के तौर पर काम करते हुए बाद में बॉलीवुड शादीज डॉट कॉम में एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए काम किया। इसके बाद नवभारत टाइम्स से फिर से जुड़ने का मौका मिला, जहां करियर की लंबी पारी की शुरुआत हुई। कनिका ने साल 2019 में बाबू बनारसी दास यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली। इस दौरान, एंकरिंग से लेकर नुक्कड़ नाटक, पपेट्री शो, स्किट परफॉर्मेंस दी और स्किल्ड राइटिंग पर फोकस किया। इसके बाद 2021 में राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कन्युनिकेशन में मास्टर्स किया। 2018 में जर्नलिज्म में सिंघानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Entertainmentकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड का पूरा ढांचा बदलेगा, दो गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे शामिल
वकील

उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड का पूरा ढांचा बदलेगा, दो गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे शामिल

विशेष लोक अदालत की तैयारी को जोर देना होगा
वकील

विशेष लोक अदालत की तैयारी को जोर देना होगा

तमिलनाडु में उपचुनाव पर रोक : मद्रास हाई कोर्ट ने ईसीआई को रोका
वकील

तमिलनाडु में उपचुनाव पर रोक : मद्रास हाई कोर्ट ने ईसीआई को रोका

राजपाल यादव को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने की टिप्पणी
वकील

राजपाल यादव को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने की टिप्पणी

करूर भगदड़: मद्रास उच्च न्यायालय ने नौकरी देने की अनुमति दी लेकिन नियुक्तियां अस्थायी होंगी
वकील

करूर भगदड़: मद्रास उच्च न्यायालय ने नौकरी देने की अनुमति दी लेकिन नियुक्तियां अस्थायी होंगी

विशेष लोक अदालत: जिले में 157 लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद
वकील

विशेष लोक अदालत: जिले में 157 लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद

अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार मामले में आवाज का नमूना देने का निर्देश दिया
वकील

अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार मामले में आवाज का नमूना देने का निर्देश दिया

तमिलनाडु की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनावों को अधिसूचित करने से रोक: मद्रास HC ने की जोरदार मंजूरी
वकील

तमिलनाडु की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनावों को अधिसूचित करने से रोक: मद्रास HC ने की जोरदार मंजूरी

ताज़ा ख़बरें