बंगाल में 'गुंडा नियंत्रण' कानून सख्त होगा, एक साल तक नजरबंदी, संपत्ति जब्ती
बंगाल सरकार गुजरात और यूपी के मॉडल पर आधारित एक नए कानून को लाने जा रही है, जो संगठित अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस को अधिकार देगा और एक साल तक नजरबंदी और संपत्ति जब्ती का प्रावधान करेगा।

सौजन्य से:- Jagran
योगी मॉडल पर बंगाल में भी ‘गुंडा नियंत्रण’ कानून: एक साल तक नजरबंदी, संपत्ति जब्ती का प्राविधान
बंगाल सरकार गुजरात और यूपी मॉडल पर आधारित 'द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल आफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' ला रही है। ...और पढ़ें
HighLights
- बंगाल में नया पब्लिक सेफ्टी बिल 2026 लाया जा रहा है।
- यह बिल एक साल तक नजरबंदी और संपत्ति जब्ती का प्रावधान करता है।
- संगठित अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस को अधिकार मिलेंगे।
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ‘द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल आफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ लेकर आने जा रही है। गुजरात और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर तैयार इस विधेयक का गजट नोटिफिकेशन जारी हो चुका है और इसे आगामी सोवमार को विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य संगठित समाजविरोधी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है। बिल की सबसे अहम विशेषता यह है कि किसी व्यक्ति को जन सुरक्षा के लिए खतरनाक मानते हुए बिना मुकदमे के एक वर्ष तक प्रतिरोधात्मक हिरासत में रखा जा सकेगा।
साथ ही, संगठित अपराध में शामिल व्यक्तियों की संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके लिए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं का सहारा लिया जाएगा। अवैध खनन, सरकारी संपत्ति को नुकसान, हथियार और मादक पदार्थों से जुड़े अपराध तथा मानव तस्करी जैसी गतिविधियों को इस कानून के तहत समाजविरोधी कृत्य माना गया है।
कानून के क्रियान्वयन के लिए गठित होगी एडवाइजरी बोर्ड
बिल में गुंडा की परिभाषा भी विस्तृत की गई है, जिसमें संगठित अपराध से जुड़े व्यक्ति, ऐसे गिरोहों के सदस्य या नेता, और गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपपत्रित व्यक्ति शामिल होंगे। किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। वहीं, पुलिस को यह अधिकार भी दिया गया है कि संभावित अशांति को देखते हुए किसी व्यक्ति को किसी क्षेत्र से निष्कासित या प्रवेश से प्रतिबंधित किया जा सके।
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सरकार इस कानून के क्रियान्वयन के लिए एक एडवाइजरी बोर्ड भी गठित करेगी, जिसकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश करेंगे। यह बोर्ड हिरासत की वैधता की समीक्षा करेगा।
इस कानून के दायरे में जबरन वसूली, प्राकृतिक संपदा (कोयला-बालू) का अवैध खनन, मानव तस्करी, हथियारों व ड्रग्स की तस्करी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को रखा गया है। 'गुंडा' की श्रेणी में उन लोगों को डाला गया है जिनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता(बीएनएस) की धारा 111 और 112 के तहत चार्जशीट दाखिल है।
अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस को कोर्ट के जरिए भगोड़ों की संपत्ति कुर्क करने और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बनने वाले तत्वों को इलाका बदर (जिला बदर) करने का भी अधिकार होगा। मानवाधिकार संगठनों ने जहां इस कानून को लेकर चिंता जताई है, वहीं सरकार का दावा है कि बंगाल में अमन-चैन बहाली के लिए यह ऐतिहासिक कदम है।
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