प्रशासनिक विफलता की भूमिका क्यों पुलिस पर डाली जा रही है?
इस लेख में पुलिस पर पड़ने वाले भार के पीछे प्रशासनिक विफलता के कारणों पर चर्चा की गई है। इसका कहना है कि ज़मीन, मकान, और चकबंदी जैसे मामलों का समाधान न होने के कारण हिंसक विवाद पैदा होते हैं और यह अपराध का ग्राफ बढ़ाते हैं। सुझाव पुलिस को कम दबाब आने के लिए है कि जवाबदेही राजस्व विभाग में हो।

आमतौर पर देश में जब भी कानून-व्यवस्था चरमराती है या अपराध का ग्राफ ऊपर जाता है, तो जनमानस और मीडिया का सारा गुस्सा स्वाभाविक रूप से पुलिस महकमे पर फूटता है। लेकिन कानून के एक छात्र के रूप में जब हम इस संकट की गहराई में उतरते हैं, तो एक कड़वा प्रशासनिक सच सामने आता है— पुलिस अक्सर उस अपराध की सज़ा भुगतती है, जिसका बीजारोपण राजस्व विभाग और उप-जिलाधिकारी कार्यालयों की चौखट पर होता है।
अली हम्माद के अनुसार, भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में होने वाले लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिंसक विवादों की जड़ में ज़मीन, मकान, पैमाइश या चकबंदी जैसे मामले होते हैं। यह वह ज़मीन है जहां न्याय की उम्मीद में एक आम नागरिक सालों-साल तहसील के चक्कर काटता है। जब प्रशासनिक सुस्ती, लालफीताशाही और निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण उसे समय पर न्याय नहीं मिलता, तो वही कानूनी विवाद आगे चलकर एक खूनी संघर्ष का रूप ले लेता है।
इस प्रशासनिक असंतुलन को देखते हुए नीति-निर्माताओं और सरकार से कुछ बुनियादी सवाल पूछना लाज़मी है: जवाबदेही का अभाव क्यों? जिस तरह किसी वारदात के बाद बीट कांस्टेबल से लेकर थानाध्यक्ष की जवाबदेही तय होती है, ठीक उसी तरह उस क्षेत्र के लेखपाल, कानूनगो या तहसीलदार पर कार्रवाई क्यों नहीं होती, जिनकी महीनों की लापरवाही के कारण वह विवाद हिंसक झड़प में बदला?
इसका मतलब क्या है
इस मुद्दे का अर्थ है कि पुलिस पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए राजस्व विभाग में सुधार की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि न्याय समय पर मिले, निचले स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इससे अपराध को रोकने में मदद मिल सकती है और पुलिस पर दबाव कम हो सकता है।
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
ताज़ा ख़बरें
- निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?

