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हिमाचल हाईकोर्ट ने ओटीए भर्ती में योग्यता तय करने का अधिकार नियोक्ता को मान्य किया

कोर्ट ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट पदों की न्यूनतम या अतिरिक्त पात्रता निर्धारित करना केवल नियोक्ता का अधिकार है और विज्ञापन में निर्धारित 10+2 विज्ञान (विशेषकर जीव विज्ञान) की शर्त वैध है। याचिकाकर्ताओं की चुनौती को खारिज कर भर्ती नियमों को बरकरार रखा गया, जबकि छूट के लिए संबंधित प्राधिकरण से अपील करने की स्वतंत्रता खुली रखी गई।

23 सितंबर 2026 को 02:04 am बजे
हिमाचल हाईकोर्ट ने ओटीए भर्ती में योग्यता तय करने का अधिकार नियोक्ता को मान्य किया

सौजन्य से:- ETV Bharat

OTA भर्ती मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अदालत ने दी व्यवस्था- योग्यता तय करना नियोक्ता का अधिकार

अदालत ने कहा, ओटीए पोस्ट की नेचर और जरूरत के हिसाब से न्यूनतम या अतिरिक्त योग्यता तय करने का काम केवल नियोक्ता का है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : September 23, 2026 at 7:10 AM IST

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (ओटीए) भर्ती मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि योग्यता को तय करना नियोक्ता (Employers) का अधिकार है और कोर्ट इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता है. अदालत ने साफ किया कि अगर भर्ती नियमों और विज्ञापन की भाषा स्पष्ट है तो न्यायिक समीक्षा के नाम पर शर्तों को शिथिल नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की एकल पीठ ने इस मामले में नरेंद्र कुमार और अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश कर्मचारी की तरफ से दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया.

मामले के अनुसार, हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने 16 सितंबर 2017 को जारी विज्ञापन के तहत ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (पोस्ट कोड-642) के 113 पदों के लिए आवेदन मांगे थे. भर्ती नियमों के अनुसार, उम्मीदवार का 50 फीसदी अंकों के साथ 10+2 साइंस (भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान उत्तीर्ण होना और साथ ही मान्यता प्राप्त संस्थान से ओटीए ट्रेनिंग कोर्स या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य था. याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया और उन्हें मूल्यांकन के लिए भी बुलाया गया, लेकिन बाद में आयोग ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया, क्योंकि उनके पास 10+2 में आवश्यक साइंस विषय (विशेषकर जीव विज्ञान) नहीं थे.

कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने इस शर्त को मनमाना और अवैध बताते हुए चुनौती दी थी. मामले में नमिता देवी ने 10+2 कॉमर्स से की थी, जबकि करण शेखर ने साइंस से की थी लेकिन उनके पास बायोलॉजी (जीव विज्ञान) विषय नहीं था. उनका तर्क था कि जब सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से उन्हें ओटीए डिप्लोमा करने की अनुमति मिल गई, तो भर्ती में 10+2 के विषयों के आधार पर उन्हें बाहर नहीं किया जा सकता.

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की इन दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के रूप में काम करने वाले कर्मियों के लिए मानव शरीर और जैविक स्थितियों का बुनियादी ज्ञान होना जरूरी है. इसलिए 10+2 में जीव विज्ञान की शर्त पूरी तरह तार्किक और वैध है. कोर्ट ने कहा कि, ओटीए पोस्ट की नेचर और जरूरत के हिसाब से न्यूनतम या अतिरिक्त योग्यता तय करने का काम केवल नियोक्ता का है. नियमों के विपरीत जाकर किसी अयोग्य उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता के अधिकार) के साथ धोखा होगा. अदालत ने विज्ञापन की शर्तों को सही ठहराया और कहा कि इसमें किसी भी प्रकार का मनमानापन नहीं है. नतीजतन, उम्मीदवारों का आवेदन रद्द करने के आयोग के फैसले को बरकरार रखते हुए रिट याचिका को खारिज कर दिया गया. हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नियमों में छूट के लिए संबंधित प्राधिकारी के समक्ष जाने की कानूनी स्वतंत्रता खुली रखी है.

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