सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी प्रॉपर्टी के व्यावसायिक उपयोग पर सख्त रुख, नगर निगमों को कार्रवाई का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रिहायशी प्रॉपर्टी के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दें और उल्लंघन पर सील लगवाएँ। बेंच ने पिक‑एंड‑चूज़ पॉलिसी को नकारते हुए कहा कि बिना भेदभाव के सभी इलाकों पर समान नियम लागू होंगे और किसी भी गैर‑रेजिडेंशियल इस्तेमाल पर कड़ाई से कार्रवाई की जाएगी।

सौजन्य से:- ETV Bharat
रिहायशी प्रॉपर्टी के कमर्शियल इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, देशभर के नगर निकायों को कार्रवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई में अवैध कंस्ट्रक्शन से जुड़ी एक याचिका का दायरा बढ़ाने के बाद यह आदेश दिया.
By Sumit Saxena
Published : September 23, 2026 at 8:52 AM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश भर के नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रिहायशी प्रॉपर्टी का कमर्शियल इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दें. आगे कहा कि अगर कोई उल्लंघन पाया जाता है तो उन्हें सील कर दें. इस मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की बेंच ने की.
बेंच ने कहा कि जिन इलाकों को किसी खास इस्तेमाल, चाहे वह रेजिडेंशियल हो या कमर्शियल के लिए साफ तौर पर नहीं बताया गया है, उन पर भी ध्यान दिया जाएगा, लेकिन अभी कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा. बेंच ने कहा, 'हम यह साफ करते हैं कि सभी अथॉरिटी बिना किसी भेदभाव के यह काम करेगी. अगर वे पिक एंड चूज तरीका अपनाते हैं, तो कोर्ट इस मामले पर सख्त रुख अपनाएगा.'
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डिंग बाय-लॉज और लैंड-यूज रेगुलेशन के बड़े पैमाने पर और खुलेआम उल्लंघन पर ध्यान दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कंस्ट्रक्शन अक्सर लागू नियमों और रेगुलेशन का खुलेआम उल्लंघन करके किए जाते हैं, जिसमें मना किए गए इलाके भी शामिल हैं.
इससे भी जरूरी बात यह है कि पूरा होने पर ऐसी जमीनों और बिल्डिंगों का इस्तेमाल अक्सर उन कामों के अलावा दूसरे कामों में किया जाता है जिनके लिए शुरू में सक्षम अधिकारी ने मंजूरी दी थी,' कोर्ट ने कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई में गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन से जुड़ी एक याचिका का दायरा बढ़ाने के बाद यह आदेश दिया था और इस मुद्दे की पूरे देश में जांच करने का फैसला किया था.
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बेंच ने कहा था कि उसके सामने ऐसे मामले आ रहे हैं जहां रेजिडेंशियल कॉलोनियों को कमर्शियल मकसद के लिए रेजिडेंशियल बिल्डिंग और जमीन का बिना इजाज़त इस्तेमाल करके कमर्शियल इलाकों में बदला जा रहा है.
इस तरह के तरीके न केवल कानून और लोगों के हित के खिलाफ हैं, बल्कि असली निवासियों के लिए भी काफी परेशानी और नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्होंने प्रॉपर्टी खरीदने और अपने घर बनाने में काफी पैसे लगाए हैं. समाज के गलत लोगों द्वारा इस तरह के गलत इस्तेमाल के पर्यावरण और नागरिक हित पर भी उतने ही गंभीर नतीजे होते हैं और इसके दूरगामी असर होते हैं.' कोर्ट ने कहा था.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पूरी जांच करने का निर्देश दिया था ताकि उन इलाकों की पहचान की जा सके जो खास तौर पर रेजिडेंशियल इस्तेमाल के लिए तय किए गए हैं, लेकिन संबंधित लोग गैर-रेसिडेंशियल मकसद के लिए उनका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.
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