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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को दी कावेरी जल विवाद पर जवाबदेही की चेतावनी, तमिलनाडु की शिकायत को सुना

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार की शिकायत पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से हफ्ते में जवाब मांगा है, कि कावेरी नदी से कम पानी क्यों छोड़ा जा रहा है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे—तमिलनाडु ने फसल क्षति का उल्लेख किया, जबकि कर्नाटक ने सूखे और CWMA के निर्देशों के पालन का हवाला दिया। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

25 सितंबर 2026 को 05:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को दी कावेरी जल विवाद पर जवाबदेही की चेतावनी, तमिलनाडु की शिकायत को सुना

सौजन्य से:- Navbharat Times

तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार और कर्नाटक की डीके शिवकुमार की कांग्रेस सरकार के बीच कावेरी जल के मुद्दे को लेकर फिर से ठनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से पूछ लिया है कि तमिलनाडु को पूरा पानी क्यों नहीं दे रहे?

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से तमिलनाडु की थलपति सी जोसेफ विजय सरकार की इस शिकायत पर हफ्ते भर में जवाब देने को कहा है कि कावेरी नदी से कम पानी क्यों छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को सुप्रीम में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में तमिलनाडु की शिकायत सुनी। सुप्रीम कोर्ट 12 अक्टूबर को इस केस में आगे की सुनवाई करेगा।

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर शिकायत की है कि कर्नाटक कावेरी नदी से कम पानी छोड़ रहा है, जिससे उसकी खरीफ की अगुवा फसलें बर्बाद हो गई है; और उसे इस कमी को पूरा करने का निर्देश देने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पानी की कमी की शिकायत पर कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA) को विचार करना होगा।

'तमिलनाडु की कमी पूरी नहीं की जा रही'

लाइव लॉ के मुताबिक तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में बताया कि पानी की किल्लत की वजह से खरीफ की शुरुआती फसलें पहले ही चौपट हो चुकी हैं।

मेरी कमी को पूरा नहीं किया जा रहा। कावेरी वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी इस संबंध में कोई आदेश नहीं जारी कर रहा है।

सीएस वैद्यनाथन, तमिलनाडु सरकार के वकील

हम सूखे के बावजूद पानी दे रहे-कर्नाटक

इसपर कर्नाटक सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने दलील दी कि, 'यह मामला यहां उठाने की जरूरत नहीं है। सीडब्ल्यूएम हालात की लगातार निगरानी करता है। इस तथ्य के बावजूद कि यहां (कर्टनाक में) सूखा पड़ा है और हमारे लिए इसका पालन करना असंभव होने के बाद भी, हम सीडब्ल्यूएमए के निर्देशों का पालन करते रहे हैं।'

तमिलनाडु में आगे बारिश की उम्मीद है- कर्नाटक

कर्नाटक का कहना है कि 'सीडब्ल्यूएमए के निर्देशों की तुलना में ज्यादा पानी छोड़ा गया है।'

इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'उनकी शिकायत है कि कमी की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।'

मानसून की वापसी हो रही है और अब और बारिश नहीं होगी। लेकिन, उन्हें उत्तर-पूर्वी मानसून का फायदा मिलेगा, जिससे तमिलनाडु में बारिश होती है।

श्याम दीवान, कर्नाटक सरकार के वकील

पार्टी के इस हक से इनकार नहीं किया जा सकता कि सीडब्ल्यूएमए उनकी शिकायतों पर विचार करे या उनका समाधान करे। उन्होंने कमी का मुद्दा उठाया है, जिस पर सीडब्ल्यूएमए फैसला ले।

जस्टिस संदीप मेहता, सुप्रीम कोर्ट

कर्नाटक ने सूखे के संकट का हवाला दिया

इसपर कर्नाटक सरकार की ओर से सीडब्ल्यूएमए के समर्थन में दलील दी गई कि वह यही कर रहा है। इसका दावा है कि अथॉरिटी ने हर पहलुओं पर गौर किया है। कर्नाटक का कहना है कि यह बहुत ही संवेदनशील मसला है, हर दिन नई परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। कर्नाटक के मुताबिक उसे कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा है और आगे बारिश की संभावना बिल्कुल नहीं है, जबकि तमिलनाडु के पास अभी उम्मीद बची हुई है।

12 अक्टूबर होगी शिकायत पर आगे सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इसपर कर्नाटक को एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए, सुनवाई की अगली तारीख 12 अक्टूबर तय कर दी है।

लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने'कोख में कत्ल' प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर 'मुर्दा, मवेशी, माफिया' प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।... और पढ़ें

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