ओबीसी आरक्षण मामले में 15 जुलाई से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में डे टू डे सुनवाई शुरू
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर 7 साल पुराने कानूनी विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट 15 जुलाई से नियमित सुनवाई शुरू करेगी। इस मामले में अगस्त तक फैसला आने की उम्मीद है, जो भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों पर सीधा प्रभाव डालेगा।

सौजन्य से:- ETV Bharat
OBC आरक्षण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा डे टू डे सुनवाई, 15 जुलाई से शुरू होगी हियरिंग
मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण मामले में 15 जुलाई से नियमित सुनवाई, 7 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में अगस्त तक आ सकता फैसला.
By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 24, 2026 at 9:06 PM IST
जबलपुर: मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही 7 साल पुरानी कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की नई खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 15 जुलाई से तय करते हुए स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण प्रकरण पर रोजाना आधार पर अंतिम सुनवाई की जाएगी. हालांकि अभी मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग को केवल 14% आरक्षण का लाभ ही दिया जाएगा.
नई खंडपीठ 15 जुलाई से करेगी हर दिन सुनवाई
अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण के मामले की सुनवाई पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी. हाल ही में उनके सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद यह मामला नई खंडपीठ के समक्ष आया है. वर्तमान में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. अब यह खंडपीठ 15 जुलाई से इस मामले में नियमित सुनवाई करेगी.
2019 से कोर्ट में मामला है लंबित
यह विवाद वर्ष 2019 में शुरू हुआ था, जब मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था. इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के बाद राज्य में कुल आरक्षण 63 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बढ़े हुए 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी थी.
भर्ती परीक्षाओं पर पड़ रहा प्रभाव
मध्य प्रदेश में होने वाली भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों पर इस विवाद का सीधा प्रभाव पड़ा है. अनेक विभागों में नियुक्तियों में यह शर्त भी डाल रखी है कि यह भर्ती न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगी. हजारों अभ्यर्थी सालों से अंतिम फैसला का इंतजार कर रहे हैं.
बीते वर्षों में राज्य सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए अदालत में लगातार पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण की संवैधानिक सीमा का मुद्दा उठाया. इस दौरान कई भर्ती प्रक्रियाएं और चयन सूचियां भी न्यायिक विवादों से प्रभावित रहीं.
- OBC आरक्षण मामले में 24 जून से होगी सुनवाई, हाईकोर्ट की नई बेंच करेगी हियरिंग
- जनसंख्या के अनुपात में नहीं दिया जा सकता आरक्षण, OBC रिजर्वेशन पर हाईकोर्ट में सुनवाई
- OBC आरक्षण के पक्ष और विपक्ष में लगीं 100 याचिकाएं, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
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'फिलहाल 14 प्रतिशत ही जारी रहेगा आरक्षण'
इस मामले में एक पक्ष के एडवोकेट आदित्य संघी ने बताया, "हाईकोर्ट ने फिलहाल अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही है. इसके साथ ही इस मामले पर 15 जुलाई से लगातार सुनवाई करने की बात कही गई है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई या अगस्त के महीने में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर अंतिम फैसला आ सकता है."
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