शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
सहारनपुर के पूर्व खान अधिकारी राजकुमार संगम को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शासन ने 2015 की शिकायतों का हवाला देकर उनपर आरोप तय किए थे, लेकिन अदालत ने कार्रवाई में देरी के चलते मामला ही खत्म कर दिया।

सौजन्य से:- अमर उजाला
सहारनपुर समाचार: शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
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- पूर्व खान अधिकारी पर लगे थे कई आरोप, 2015 में थी सहारनपुर में तैनाती
- 30 जून 2025 को हो चुके रिटायर, उसी दिन शासन ने किए थे आरोप तय
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। वर्ष 2015 के मामले में विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे सहारनपुर के पूर्व खान अधिकारी राजकुमार संगम को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2015 की शिकायतों का हवाला देकर शासन ने पूर्व खान अधिकारी पर 30 जून 2025 में आरोप तय किए और सेवानिवृत्ति के दिन उन्हें निलंबित कर दिया था। अदालत ने कार्रवाई में करीब दस साल की देरी पर सवाल उठाते हुए मामला ही खत्म कर दिया। अब जांच कर रहे मंडलायुक्त की तरफ से शासन को पत्र भेजा जाएगा, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि जिस विभागीय कार्रवाई के आधार पर आगे की प्रक्रिया चल रही थी, उसका आदेश न्यायालय ने निरस्त कर दिया है।
वर्ष 2015 में राजकुमार संगम जिले में खान अधिकारी के पद पर तैनात थे। आजमगढ़ में तैनाती के दौरान 30 जून 2025 को वह सेवानिवृत्त हो गए थे। सेवानिवृत्ति के दिन ही शासन की तरफ से 2015 में हुई कुछ शिकायतों का हवाला देकर उन पर आरोप तय कर दिए थे, साथ ही निलंबित कर दिया गया था। शासन ने आरोपों को गंभीर मानते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। इसमें जांच अधिकारी मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार को बनाया गया था। हालांकि, विभागीय कार्रवाई शुरू करने में हुई देरी ही पूर्व खान अधिकारी के लिए राहत का आधार बनी। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर विभागीय कार्रवाई के आदेश को चुनौती दी थी। इस पर अदालत ने कहा कि कथित घटना के बाद करीब दस वर्ष की देरी से विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। इतनी देरी का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। ऐसे में अदालत ने मामला खत्म कर दिया।
हाजी इकबाल व अन्य के साथ मिलीभगत के थे आरोप
आरोप पत्र में पद का दुरुपयोग करने, पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला व अन्य लोगों के साथ मिलकर खनन कारोबारियों को फायदा पहुंचाने, अवैध खनन की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने तथा एक खनन कारोबारी को करीब 4.24 करोड़ की कथित फर्जी रिकवरी का नोटिस जारी करने जैसे आरोप लगाए गए थे। शासन की ओर से आरोपों में यह भी कहा गया था कि वर्ष 2015 में अवैध खनन के मामलों में बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नोटिस जारी कर जुर्माना लगाया गया।
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यह बोले मंडलायुक्त
इस मामले में मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने बताया कि पूर्व खान अधिकारी को आरोप पत्र भेजा गया था। उन्होंने अपने जवाब के साथ हाईकोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
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- 30 जून 2025 को हो चुके रिटायर, उसी दिन शासन ने किए थे आरोप तय
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। वर्ष 2015 के मामले में विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे सहारनपुर के पूर्व खान अधिकारी राजकुमार संगम को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2015 की शिकायतों का हवाला देकर शासन ने पूर्व खान अधिकारी पर 30 जून 2025 में आरोप तय किए और सेवानिवृत्ति के दिन उन्हें निलंबित कर दिया था। अदालत ने कार्रवाई में करीब दस साल की देरी पर सवाल उठाते हुए मामला ही खत्म कर दिया। अब जांच कर रहे मंडलायुक्त की तरफ से शासन को पत्र भेजा जाएगा, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि जिस विभागीय कार्रवाई के आधार पर आगे की प्रक्रिया चल रही थी, उसका आदेश न्यायालय ने निरस्त कर दिया है।
वर्ष 2015 में राजकुमार संगम जिले में खान अधिकारी के पद पर तैनात थे। आजमगढ़ में तैनाती के दौरान 30 जून 2025 को वह सेवानिवृत्त हो गए थे। सेवानिवृत्ति के दिन ही शासन की तरफ से 2015 में हुई कुछ शिकायतों का हवाला देकर उन पर आरोप तय कर दिए थे, साथ ही निलंबित कर दिया गया था। शासन ने आरोपों को गंभीर मानते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू की थी। इसमें जांच अधिकारी मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार को बनाया गया था। हालांकि, विभागीय कार्रवाई शुरू करने में हुई देरी ही पूर्व खान अधिकारी के लिए राहत का आधार बनी। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर विभागीय कार्रवाई के आदेश को चुनौती दी थी। इस पर अदालत ने कहा कि कथित घटना के बाद करीब दस वर्ष की देरी से विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। इतनी देरी का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। ऐसे में अदालत ने मामला खत्म कर दिया।
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हाजी इकबाल व अन्य के साथ मिलीभगत के थे आरोप
आरोप पत्र में पद का दुरुपयोग करने, पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला व अन्य लोगों के साथ मिलकर खनन कारोबारियों को फायदा पहुंचाने, अवैध खनन की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने तथा एक खनन कारोबारी को करीब 4.24 करोड़ की कथित फर्जी रिकवरी का नोटिस जारी करने जैसे आरोप लगाए गए थे। शासन की ओर से आरोपों में यह भी कहा गया था कि वर्ष 2015 में अवैध खनन के मामलों में बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नोटिस जारी कर जुर्माना लगाया गया।
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यह बोले मंडलायुक्त
इस मामले में मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने बताया कि पूर्व खान अधिकारी को आरोप पत्र भेजा गया था। उन्होंने अपने जवाब के साथ हाईकोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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