होमफैसलेमध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण मामले का फैसला सुरक्षित रखा, 15 दिनों की बहस ने खोले कई सवाल
फैसले

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण मामले का फैसला सुरक्षित रखा, 15 दिनों की बहस ने खोले कई सवाल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में OBC आरक्षण पर 15 दिनों की लगातार कानूनी बहस हुई। अदालत ने फिर से फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़े वर्ग को 27% आरक्षण देने की घोषणा की थी। इसे चुनौती देते हुए अनारक्षित वर्ग और अन्य पार्टियों ने अदालत में याचिका दायर की।

5 अगस्त 2026 को 06:15 pm बजे
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण मामले का फैसला सुरक्षित रखा, 15 दिनों की बहस ने खोले कई सवाल

सौजन्य से:- ETV Bharat

OBC आरक्षण मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

OBC आरक्षण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुई 15 दिनों तक लगातार सुनवाई. हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित. विश्वजीत सिंह राजूपत की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 5, 2026 at 11:11 PM IST

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बीते 15 दिनों से लगातार अन्य पिछड़ा वर्ग को कितना आरक्षण दिया जाए, इस मुद्दे पर बहस चल रही थी. अब तक सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे और अब इस मामले पर हाईकोर्ट ने फैसला रिजर्व कर लिया है. यह मुद्दा 2019 से शुरू हुआ था, जब मध्य प्रदेश विधानसभा ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दे दिया था. उसके बाद से लगातार यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चला रहा है. अब इस पर अंतिम फैसला आना है.

मध्य प्रदेश में मौजूदा आरक्षण की स्थिति

मध्य प्रदेश में फिलहाल 60% आरक्षण है. इसमें अनुसूचित जाति (SC) को 16%, अनुसूचित जनजाति (ST) को 20% और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 14% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण दिया गया है.

अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही जा रही है. यदि अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दे दिया गया तो मध्य प्रदेश में अनारक्षित श्रेणी में कुल 27 प्रतिशत पद ही बचेंगे. मध्य प्रदेश में कुल मिलाकर आरक्षण की स्थिति 73% हो जाएगी. और इस तरह मध्य प्रदेश भारत के उन दो राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां देश मे सबसे ज्यादा आरक्षण होगा.

भारत के राज्यों में आरक्षण की स्थिति

70% या उससे अधिक

कर्नाटक (लगभग 73–75%, कुछ प्रावधान न्यायिक प्रक्रिया के अधीन)

तमिलनाडु 69%

बिहार (लगभग 65%, कानूनी चुनौती के साथ)

मध्य प्रदेश 60 %

आंध्र प्रदेश (लगभग 60%)

हरियाणा (लगभग 60%)

तेलंगाना (लगभग 59–60%)

महाराष्ट्र 60% कानूनी चुनौतियों के अधीन

50%–59% वाले राज्य

असम

गुजरात

उत्तर प्रदेश

ओडिशा

राजस्थान

केरल

झारखंड

छत्तीसगढ़

पश्चिम बंगाल (नीतियों में समय-समय पर बदलाव हुए)

50% से कम वाले राज्य

पंजाब

हिमाचल प्रदेश

उत्तराखंड

गोवा

सिक्किम

मणिपुर

अरुणाचल प्रदेश

मेघालय

मिजोरम

नागालैंड

त्रिपुरा

इनमें से कई पूर्वोत्तर राज्यों में OBC आरक्षण नहीं है क्योंकि वहां ST आबादी अधिक है.

अनारक्षित वर्ग का क्या कहना है

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अनारक्षित वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट आदित्य संघी ने बताया, "कमलनाथ सरकार ने 2019 में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़कर 27% कर दिया था. 27% आरक्षण को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई और तब से यह मामला कभी हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में चलाता रहा."

आदित्य संघी का कहना है, "इस मामले में सरकार अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ा हुआ क्वांटिफायबल डेटा हाई कोर्ट में पेश नहीं कर पाई क्योंकि इसी से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता था की अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की जरूरत है या नहीं."

क्या होता है "Quantifiable Data (क्वांटिफायबल डेटा)"

आरक्षण से जुड़े मामलों में ऐसा डेटा आमतौर पर इन बातों को दर्शाता है

1 किसी जाति की सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन की स्थिति क्या है.

2 सरकारी नौकरियों में उस समुदाय का प्रतिनिधित्व कितना है.

3 जनसंख्या के अनुपात में उस समुदाय की वास्तविक भागीदारी कितनी है.

4 शिक्षा, रोजगार, आय, भूमि स्वामित्व और अन्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के प्रमाण तैयार करने होते हैं.

इन आंकड़ों के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि किसी जाति को आरक्षण मिलना भी चाहिए या उसे इसकी जरूरत नहीं है.

अन्य पिछड़ा वर्ग के तर्क

अन्य पिछड़ा वर्ग की ओर से हाईकोर्ट में अपना पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह का कहना है कि दरअसल सरकार ने सही ढंग से यह आंकड़ा ही पेश नहीं किया है और ना ही सही ढंग से सर्वे करवाया गया है लेकिन उनका दावा बहुत मजबूत है इसलिए सरकार ने विधानसभा में इस विधेयक को पारित किया था. इस मामले में तीसरा पक्ष सरकार की ओर से रखा गया सरकार यह तो दावा कर रही है कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती है.

- OBC आरक्षण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की 15 जुलाई से डे टू डे हियरिंग, 91 पिटीशन लिस्टेड

- जनसंख्या के अनुपात में नहीं दिया जा सकता आरक्षण, OBC रिजर्वेशन पर हाईकोर्ट में सुनवाई

इस मामले का फैसला अगले महीने तक आने की उम्मीद है लेकिन इस फैसले के आने के बाद कुछ कानूनी संकट खड़े होना तय है क्योंकि इस बीच में मध्य प्रदेश में बहुत सी भर्तियां इसी शर्त पर हुई थी कि यदि कोर्ट ने फैसला 27 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में किया तो अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार पद पर बने रहेंगे और यदि फैसला 14 प्रतिशत आरक्षण के लिए हुआ तो लोगों को अपनी नौकरी छोड़नी होगी.

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
पासपोर्ट के नवीनीकरण में भी देरी नहीं: कलकत्ता हाई कोर्ट का न्यायसंगत फैसला
फैसले

पासपोर्ट के नवीनीकरण में भी देरी नहीं: कलकत्ता हाई कोर्ट का न्यायसंगत फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने दिया गाड़ी की बिक्री पर बीमा का फतव, पेट्रोल-डीजल पंप वाले होंगे मजबूर
फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने दिया गाड़ी की बिक्री पर बीमा का फतव, पेट्रोल-डीजल पंप वाले होंगे मजबूर

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बदल जाएंगे वाहनों के बीमा और ईंधन नियम
फैसले

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: बदल जाएंगे वाहनों के बीमा और ईंधन नियम

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन का एक बड़ा निर्णय
फैसले

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन का एक बड़ा निर्णय

बांकीपुर उपचुनाव परिणाम: जनता का गुस्सा नीतीश कुमार को हटाने से?
फैसले

बांकीपुर उपचुनाव परिणाम: जनता का गुस्सा नीतीश कुमार को हटाने से?

शेख हसीना को वापस लौटने की मांग, बांग्लादेश ने शांति बनाए रखने की अपील की
फैसले

शेख हसीना को वापस लौटने की मांग, बांग्लादेश ने शांति बनाए रखने की अपील की

लोकसभा ने 4 न्यायधीशों की नियुक्ति सहित हाईकोर्ट की संख्या बढ़ाए जाने का विधेयक पारित किया
फैसले

लोकसभा ने 4 न्यायधीशों की नियुक्ति सहित हाईकोर्ट की संख्या बढ़ाए जाने का विधेयक पारित किया

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के पीछे सरकार की सोच क्या है?
फैसले

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के पीछे सरकार की सोच क्या है?

ताज़ा ख़बरें