जेल कर्मी पर हमले की कहानी निकली झूठी: अदालत ने कैदी को किया बरी; सरकारी पक्ष को जज ने लगाई फटकार
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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जेल कर्मी पर हमले की कहानी निकली झूठी: अदालत ने कैदी को किया बरी; सरकारी पक्ष को जज ने लगाई फटकार
पीटीआई, ठाणे।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 13 Jun 2026 04:06 PM IST
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सार
ठाणे की सेशंस कोर्ट ने 2017 में जेल अधिकारियों पर हमला करने के आरोपी अरमान खान को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन की ओर से सीसीटीवी फुटेज न देना, जांच में देरी करना और आरोपी की चोटों को न समझा पाना सरकारी कहानी पर गंभीर शक पैदा करता है।
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विस्तार
ठाणे की एक सेशंस कोर्ट ने जेल अधिकारियों पर हमला करने के आरोपी एक कैदी को बरी कर दिया है। 25 साल के इस कैदी पर साल 2017 में ठाणे सेंट्रल जेल के भीतर अधिकारियों पर हमला करने का आरोप लगा था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को पूरी तरह साबित करने में नाकाम रहा है। एडिशनल सेशंस जज जीटी पवार ने 11 जून को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी अरमान नफीस खान को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।
अधिकारियों के दावों पर उठे गंभीर सवाल
सरकारी पक्ष के मुताबिक, यह घटना दो मार्च 2017 की है। ठाणे सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी बैरक में अरमान खान ने जेल अधिकारी संभाजी पिसे और दो अन्य कर्मचारियों पर लोहे की पत्ती से हमला कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की कहानी में कई बड़ी कमियां पाईं। जज ने अपने फैसले में नोट किया कि यह कथित घटना जेल के अंदर हुई थी, जहां कई अन्य कैदी भी मौजूद थे। इसके बावजूद कोर्ट के सामने कोई भी पुख्ता या चश्मदीद सबूत पेश नहीं किया जा सका।
यह भी पढ़ें: New Indian Army Chief: लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ नए सेना प्रमुख नियुक्त, वर्तमान COAS जन. द्विवेदी की जगह लेंगे
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सीसीटीवी फुटेज छिपाने पर कोर्ट नाराज
मामले की सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन का रवैया भी संदिग्ध पाया गया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के शरीर पर लगी चोटों के बारे में जेल अधिकारियों ने कोई साफ वजह नहीं बताई। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का यह दावा सही हो सकता है कि पहले जेल कर्मियों ने उसे पीटा और फिर खुद पर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यह झूठी एफआईआर दर्ज करा दी। इसके अलावा जांच अधिकारी को घटना स्थल पर तुरंत जाने की इजाजत नहीं दी गई और मामले का सबसे अहम सबूत यानी सीसीटीवी फुटेज भी छिपा लिया गया। जज ने कहा कि इन सभी वजहों से सरकारी कहानी पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
अधिकारियों के दावों पर उठे गंभीर सवाल
सरकारी पक्ष के मुताबिक, यह घटना दो मार्च 2017 की है। ठाणे सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी बैरक में अरमान खान ने जेल अधिकारी संभाजी पिसे और दो अन्य कर्मचारियों पर लोहे की पत्ती से हमला कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की कहानी में कई बड़ी कमियां पाईं। जज ने अपने फैसले में नोट किया कि यह कथित घटना जेल के अंदर हुई थी, जहां कई अन्य कैदी भी मौजूद थे। इसके बावजूद कोर्ट के सामने कोई भी पुख्ता या चश्मदीद सबूत पेश नहीं किया जा सका।
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सीसीटीवी फुटेज छिपाने पर कोर्ट नाराज
मामले की सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन का रवैया भी संदिग्ध पाया गया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के शरीर पर लगी चोटों के बारे में जेल अधिकारियों ने कोई साफ वजह नहीं बताई। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का यह दावा सही हो सकता है कि पहले जेल कर्मियों ने उसे पीटा और फिर खुद पर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यह झूठी एफआईआर दर्ज करा दी। इसके अलावा जांच अधिकारी को घटना स्थल पर तुरंत जाने की इजाजत नहीं दी गई और मामले का सबसे अहम सबूत यानी सीसीटीवी फुटेज भी छिपा लिया गया। जज ने कहा कि इन सभी वजहों से सरकारी कहानी पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
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