किराए से निकाले जाने के नियम और समय: कानूनी प्रक्रिया और मकान मालिक-किराएदार के अधिकार
किराएदार को केंद्र सरकार द्वारा पेश मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 के आधार पर किराए से निकाले जाने के नियमों के बारे में जानकारी है। यहां जानें मकान मालिक और किराएदार दोनों के लिए बेदखली के कारण, कानूनी प्रक्रिया और नोटिस के समय के बारे में

सौजन्य से:- Navbharat Times
'कानून से ऊपर नहीं हैं आप', भ्रष्टाचार से लड़ते वक्त कानून नहीं भूलिए, कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को लगाई कड़ी फटकार
किराएदार और मकानमालिकों के लिए लागू कानून
भारत में किराएदार और मकानमालिक के संबंधों में पारदर्शिता आए इस के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 पेश किया है। इसके आधार पर देश के राज्यों के अपने किराया नियंत्रण कानून होते हैं, जिन्हें नए नियमों के अनुसार फिलहाल अपडेट किया जा रहा है। Model Tenancy Act, 2021 किराए के मकानों और दुकानों के बाजार को पारदर्शी के साथ साथ और निष्पक्ष बनाता है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मॉडल टेनेंसी एक्ट पूरे देश में स्वतः लागू नहीं है, बल्कि इसे लागू करना राज्यों के निर्णय पर निर्भर करता है।₹1 लाख करोड़ का विवाद, बस ₹1 में सुलझाएगा सुप्रीम कोर्ट, चर्चित फैमिली बिजनेस विवाद कल्याणी केस में नया कानूनी एंगल
मकान मालिक क्या तुरंत घर खाली करा सकता है?
- यदि किराएदार किराया समय पर दे रहा है और अनुबंध की शर्तों का पालन कर रहा है, तो केवल व्यक्तिगत इच्छा के आधार पर उसे बेदखल नहीं किया जा सकता।
- अधिकांश मामलों में पहले विधिसम्मत नोटिस देना और फिर कानूनी मंच पर आवेदन करना पड़ता है।
- मॉडल टेनेंसी एक्ट में रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल की व्यवस्था की गई है ताकि विवादों का अपेक्षाकृत तेजी से समाधान हो सके।
- भारतीय कानून मकान मालिक को मनमाने तरीके से किराएदार को निकालने की अनुमति नहीं देता।
- किसी भी विवाद के दौरान मकान मालिक बिजली, पानी जैसी आवश्यक सेवाएं बंद करके किराएदार को परेशान नहीं कर सकता।
- यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित कानूनों के तहत राहत और कार्रवाई संभव है। इसलिए बेदखली की पूरी प्रक्रिया कानूनी आदेश के माध्यम से ही पूरी होती है।
किराएदार को कब प्रॉपर्टी खाली करनी पड़ सकती है?
- यदि किरायेदारी की तय अवधि समाप्त हो जाए और उसका नवीनीकरण न किया जाए। तब किराएदार को प्रॉपर्टी खाली करनी पड़ सकती है।
- यदि मकान मालिक कानूनी प्रक्रिया के तहत किरायेदारी समाप्त करता है और आवश्यक नोटिस देता है, तो किराएदार को मकान खाली करना पड़ सकता है।
- लगातार दो महीने या उससे अधिक समय तक किराया नहीं चुकाना भी बेदखली का आधार बन सकता है।
- बिना लिखित अनुमति किसी अन्य व्यक्ति को मकान या उसका हिस्सा देना भी कार्रवाई का कारण है।
- यदि किराएदार संपत्ति का दुरुपयोग करता है तब भी मकान मालिक सक्षम प्राधिकरण से बेदखली की मांग कर सकता है।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल मौखिक आदेश या दबाव के आधार पर बेदखली नहीं की जा सकती। कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकरण या रेंट कोर्ट की प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है।
तय समय पर प्रॉपर्टी खाली नहीं करने पर क्या होगा?
यदि किरायेदारी की अवधि समाप्त होने के बाद भी किराएदार मकान खाली नहीं करता, तो कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं। मॉडल टेनेंसी एक्ट के अनुसार, लागू राज्यों में ऐसे मामलों में पहले दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया वसूलने का प्रावधान है। यह प्रावधान अनधिकृत कब्जे को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। हालांकि इसका लाभ वहीं मिलेगा जहां संबंधित राज्य ने इस कानून को लागू किया हो।इसलिए समझदारी इसी में है कि अनुबंध के प्रावधानों के तहत प्रापर्टी खाली कर दी जाए।Lottery Lessons: लॉटरी से करोड़पति बनने से पहले जानिए भारत का कानून, देश में कहां-कहां वैध है लॉटरी
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में कानून व्यवस्था पर की समीक्षा, महिला सुरक्षा को दी प्राथमिकता

69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

दिल्ली उच्च न्यायालय ने फ्लिपकार्ट को कार्रवाई करने का आदेश दिया, BATA की नकली जूते की बिक्री पर रोक लगाई

धारा-138 मामलों में हुआ समय और धन का बचाव

लोक अदालत में 38 मामलों का निस्तारण, 14 लाख 56 हजार रुपये का समझौता

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाथ से मैला ढोने की अमानवीय प्रथा के लिए राज्य को जिम्मेदार ठहराया

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यात्रियों के लिए 'सेकेंड क्लास' शब्द का इस्तेमाल गलत

आज़म ख़ान की यूनिवर्सिटी के तोड़ने के फ़ैसले के पीछे प्रशासन की मांग और विपक्ष की आलोचना
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट बोला: यात्रियों के लिए 'सेकेंड क्लास' शब्द भूल जाएं, अब रेलवे को मुआवजे का भुगतान करना होगा
- जर्मनी में सरोगेसी कानून बनाने के बादल में घिरे मंत्री
- भारत में ई20 ईंधन पर मारुति सुजुकी को बड़ा झटका, देना होगा 20 लाख का मुआवजा!
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कृषि भूमि पर होंगे स्वामित्व के नए परिदृश्य
- जर्मन मंत्री के सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे के मुद्दे पर कानूनी विवाद
- कोटक: रोहित जैसे खिलाड़ी पर दबाव नहीं, लॉर्ड्स में अलग पारी दिखा सकते हैं
- एआई ने हमारे सोचने के तरीके को ही बदला है
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा अश्लीलता नहीं, जो शब्द के इस्तेमाल से लोगों को परेशानी नहीं हुई

