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डॉ. शैल का संदेश: लोक अदालत से वाद निपटाएं, बचाएं समय व धन

सचिव डा. शैल द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कैमूर में आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं से अपील की गई कि वे पक्षकारों को लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से मुकदमे निपटाने के लिए प्रेरित करें। बैठक में बताया गया कि लोक अदालत से निपटारे से समय और धन दोनों की बचत होती है तथा निर्णय का दीवानी न्यायालय में समान कानूनी मान्यता होती है। 21 नवंबर 2026 को होने वाली विशेष लोक अदालत और 12 दिसंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु आह्वान किया गया।

7 अक्टूबर 2026 को 05:04 pm बजे
डॉ. शैल का संदेश: लोक अदालत से वाद निपटाएं, बचाएं समय व धन

सौजन्य से:- Hindustan

लोक अदालत से वाद समाप्त कर समय व पैसे की करें बचत : डॉ. शैल

पेज चार की खबर पेज चार की खबर लोक अदालत से वाद समाप्त कर समय व पैसे की करें बचत : डॉ. शैल राष्ट्रीय लोक अदालत

पेज चार की खबर लोक अदालत से वाद समाप्त कर समय व पैसे की करें बचत : डॉ. शैल राष्ट्रीय लोक अदालत आगामी 12 दिसंबर 2026 को आयोजित होगा कोर्ट परिसर में लोक अदालत परिसर में सचिव ने वकीलो संग की विशेष बैठक भभुआ,हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कैमूर दीपक भटनागर के दिशा-निर्देश में बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार कैमूर के कार्यालय परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता सचिव, डा. शैल जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कैमूर द्वारा की गई, जिसमें कैमूर बार एसोसिएशन के सम्मानित अधिवक्तागण ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह बैठक आगामी "राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0" अभियान, विशेष लोक अदालत (एन.आई. एक्ट) जो 21 नवंबर 2026 को आयोजित होगी, तथा राष्ट्रीय लोक अदालत जो 12 दिसंबर 2026 को नियत है, के सफल आयोजन एवं निष्पादन के संदर्भ में आहूत की गई थी।

बैठक का उद्देश्य

बैठक के दौरान सचिव महोदय ने उपस्थित अधिवक्तागण को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय प्रक्रिया में अधिवक्ता समाज की रीढ़ होते हैं। उन्होंने वकीलों से अपील की कि वे अपने पक्षकारों को मध्यस्थता एवं लोक अदालत के माध्यम से मुकदमों के निस्तारण के लिए प्रेरित करें, ताकि अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से त्वरित निष्पादन किया जा सके। मध्यस्थता एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के मुख्य फायदे समय और धन की सीधी बचत होते हुए पारंपरिक अदालती मुकदमाों में वर्षों का समय और अत्यधिक धन खर्च होता है, जबकि मध्यस्थता और लोक अदालत में मामलों का निपटारा बेहद कम समय और बिना किसी अतिरिक्त अदालती खर्च के हो जाता है। यदि न्यायालय में लंबित किसी मामले का समाधान लोक अदालत के माध्यम से होता है, तो नियमानुसार जमा की गई कोर्ट फीस वापस हो जाती है।

लोक अदालत के फायदे

दोनों पक्षों के बीच विवाद को सुलझाकर आपसी रंजिश को समाप्त किया जाता है, जिससे समाज में शांति और भाईचारा बना रहता है। लोक अदालत के फैसले को दीवानी न्यायालय की समान कानूनी मान्यता प्राप्त होती है। इसके खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे मुकदमेबाजी का हमेशा के लिए अंत हो जाता है। दोनों पक्षों की जीत होती हें, इसमें कोई हारता या जीतता नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से सम्मानजनक समझौता कराया जाता है। बैठक के अंत में सचिव ने अधिवक्ता संघ से "राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0", आगामी 21 नवंबर 2026 की विशेष लोक अदालत तथा 12 दिसंबर 2026 की राष्ट्रीय लोक अदालत को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया। फोटो परिचय 7-भभुआ-07-सिविल न्यायालय के लोक अदालत परिसर में वकीलो के साथ बैठक करती सचिव व अन्य

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