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चेक बाउंस का नया कानून, आम आदमी के हित में सुप्रीम कोर्ट ने भी कही है बड़ी बात

हाल के कई मामलों में यह देखा गया है कि अदालतों और सरकार ने चेक बाउंस मामलों को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां और प्रक्रियात्मक बदलाव किए हैं। अब अदालतें ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करने पर जोर दे रही हैं। चेक बाउंस और इ…

Navbharat Times के अनुसार7 जून 2026 को 06:15 am बजे
चेक बाउंस का नया कानून, आम आदमी के हित में सुप्रीम कोर्ट ने भी कही है बड़ी बात

सौजन्य से:- Navbharat Times

हाल के कई मामलों में यह देखा गया है कि अदालतों और सरकार ने चेक बाउंस मामलों को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां और प्रक्रियात्मक बदलाव किए हैं। अब अदालतें ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करने पर जोर दे रही हैं।

चेक बाउंस और इससे जुड़ा कानून क्या है

आम भाषा में इसे समझें तो यदि किसी व्यक्ति या संस्था का किसी दूसरे व्यक्ति या पार्टी को दिया हुआ चेक बैंक में पर्याप्त बैलेंस न होने, सिग्नेचर मिसमैच या अकाउंट बंद होने की वजह से क्लीयर नहीं होता है तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है। और ऐसे में चेक जारी करने वाला कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है। भारत में यह मामला Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत आता है।

चेक बाउंस होने के बाद कानूनी प्रक्रिया क्या होती है?

- जब कोई चेक बाउंस होता है, तो बैंक एक Cheque Return मेमो जारी करता है।

- इसके बाद चेक पाने वाले व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर आरोपी को कानूनी नोटिस भेजना होता है।

- नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर यदि भुगतान नहीं किया जाता, तब शिकायतकर्ता अदालत में केस दायर कर सकता है। यदि समयसीमा का पालन नहीं किया गया, तो मामला कमजोर पड़ सकता है।

चेक बाउंस केस में कितनी सजा हो सकती है ?

ऐसे मामलों में Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को दो साल तक की जेल या चेक राशि का दोगुना तक जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। कई मामलों में यदि आरोपी समय पर भुगतान कर देता है, तो अदालत समझौते के आधार पर केस खत्म भी कर सकती है। लेकिन यदि आरोपी बार-बार नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं करता, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव है।भारत में 1 जुलाई 2024 से लागू नई न्यायिक संहिता, भारतीय न्याय संहिता BNS के धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े मुख्य अपराधों को धारा 318 और 319 के भी प्रावधान इसमें लागू हो सकते हैं। इन प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर 7 साल की जेल और जुर्माना दोनों के दंड भागी होना होता है।

चेक बाउंस केस मामलों में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देश

- सुप्रीम कोर्ट ने धारा 138 NI Act के नियमों के अनुसार क्षेत्राधिकार का विवाद खत्म करने और मुकदमों का निपटारा तेजी से होने की दिशा में साफ किया है कि अब केस उसी अदालत में दायर होगा जिसके अधिकार क्षेत्र में शिकायतकर्ता का बैंक खाता स्थित है।

- कोर्ट मुकदमे के दौरान आरोपी को चेक राशि का बीस प्रतिशत तक अंतरिम मुआवजा चुकाने का आदेश दे सकता है। ऐसे मामलों में यदि दोषी व्यक्ति निचली अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करता है, तो उसे जुर्माने या चेक राशि का न्यूनतम 20% हिस्सा अदालत में जमा करना अनिवार्य है।

- केवल चेक बाउंस ही नहीं, बल्कि जानबूझकर बैंक को 'पेमेंट रोकने' का निर्देश देना भी कानूनी अपराध है। सुप्रीम कोर्ट मे दिशा निर्देशों के तहत अकाउंट में पैसा होने के बावजूद केवल धोखाधड़ी के इरादे से भुगतान रुकवाना भी जेल की वजह बन सकती है।

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