खनिजों पर रॉयल्टी की गणना से जुड़े प्रावधान वैध: सुप्रीम कोर्ट, जनता का कल्याण सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने खनिजों पर रॉयल्टी की गणना से जुड़े प्रावधानों की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। इसके साथ ही केंद्र सरकार के खिलाफ किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज की याचिका खारिज कर दी गई है।

सौजन्य से:- Hindustan
खनिजों पर रॉयल्टी की गणना से जुड़े प्रावधान वैध: सुप्रीम कोर्ट
- केंद्र के खिलाफ याचिका खारिज कर कहा, जनता का कल्याण सर्वोपरि नई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रमुख खनिजों पर रॉयल्टी की गणना से जुड़े प्रावधानों की संवैधानिक वैधता बरकरार रखा। साथ ही इस मसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज की याचिका खारिज कर दी।
निर्णय का विवरण
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि संबंधित नियमों के तहत खनिजों के बिक्री मूल्य की गणना में रॉयल्टी एवं अन्य वैधानिक भुगतान को शामिल किया जाना वैध है। पीठ की तरफ से फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने 2016 के खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों को छोड़कर) रियायत नियमों के नियम 38 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका में इन प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(ग) (व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन बताया गया था। किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज ने नियम 38 की व्याख्याओं को चुनौती दी थी, जिनमें कहा गया था कि खनिजों के बिक्री मूल्य की गणना करते समय रॉयल्टी, जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (एनएमईटी) के भुगतान को घटाया नहीं जाएगा। पीठ ने कहा कि हमारा मत है कि 2016 के नियमों में शामिल नियम 38 की व्याख्याएं और 2017 के नियमों के प्रावधान, औसत बिक्री मूल्य निर्धारण के लिए रॉयल्टी, डीएमएफ और एनएमईटी के भुगतान को शामिल करने की स्थिति में, वैध एवं संवैधानिक हैं। पीठ ने फैसले में यह भी कहा कि जनता का कल्याण सर्वोपरि है और राज्यों की वित्तीय स्थिति की रक्षा के लिए निजी अधिकारों को सार्वजनिक हित के सामने पीछे हटना होगा।
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