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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता प्रक्रिया निष्पक्ष और कानूनी होनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया है और कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत होनी चाहिए।

13 जुलाई 2026 को 06:15 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता प्रक्रिया निष्पक्ष और कानूनी होनी चाहिए

सौजन्य से:- Jagran

'नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष और कानूनी होनी चाहिए' सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसलों को किया रद

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत होनी चाहिए और गुवाहाटी हाई कोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया। ...और पढ़ें

HighLights

- नागरिकता प्रक्रिया निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत होनी चाहिए।

- सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले रद्द किए।

- फारेनर्स ट्रिब्यूनल को मामलों की दोबारा सुनवाई का निर्देश।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत होनी चाहिए। शीर्ष न्यायालय ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसलों को रद कर दिया। हाई कोर्ट ने कुछ लोगों को विदेशी घोषित करने वाले फारेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेशों को बरकरार रखा गया था।

मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य के पास यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि जो लोग भारतीय नागरिकता के कानूनी रूप से हकदार नहीं हैं, वे गलत दावों, प्रक्रिया के दुरुपयोग या देरी का फायदा उठाकर नागरिकता हासिल न कर सकें।

हालांकि, ऐसे मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित फारेनर्स ट्रिब्यूनल को सभी मामलों की दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने अपीलकर्ताओं की नागरिकता के दावों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

ट्रिब्यूनल को हाई कोर्ट या पहले दिए गए आदेशों की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना नए सिरे से निर्णय लेना होगा। यह फैसला असम में फारेनर्स ट्रिब्यूनल के समक्ष चल रही कार्यवाही से जुड़े मामलों में आया है। कुछ मामलों में पहले अवैध प्रवासी (निर्धारण) ट्रिब्यूनल के समक्ष भी प्रक्रिया चली थी। इन सभी मामलों में संबंधित व्यक्तियों को विदेशी घोषित किया गया था, जिसे बाद में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी मंजूरी दी थी।

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पीठ ने कहा कि नागरिकता और विदेशी नागरिक की स्थिति संविधान और कानून के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता प्राप्त करने, समाप्त होने और इससे जुड़े अन्य मामलों पर कानून बनाने की शक्ति देता है। वहीं, विदेशी अधिनियम, 1946 और विदेशी न्यायाधिकरण आदेश, 1964 ऐसे मामलों के निर्धारण के लिए कानूनी व्यवस्था प्रदान करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के क्षेत्र में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त है। पीठ ने कहा कि किसी विदेशी को भी अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। -------

विदेश घोषित करने की कार्रवाई एकतरफा नहीं हो सकतीसुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने जैसी गंभीर कार्रवाई ऐसी प्रक्रिया के आधार पर नहीं हो सकती जो एकतरफा या बिना पर्याप्त विचार के पूरी की गई हो।

अपीलकर्ताओं की मुख्य शिकायत थी कि उनके खिलाफ फैसले एकतरफा कार्यवाही में दिए गए और उन्हें अपने पक्ष में पर्याप्त अवसर नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर मामलों को वापस ट्रिब्यूनलों को भेज दिया। ट्रिब्यूनलों को छह महीने के भीतर मामलों का निपटारा करने का प्रयास करने को कहा गया है।

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