'रेप से जन्मा बच्चा कलंक का प्रतीक नहीं'; चंद्रगुप्त मौर्य का जिक्र, हाई कोर्ट ने कहा- कानून बनाए सरकार
क्या है मामला? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेप के कारण पैदा लेने वाले बच्चे को लेकर बड़ा आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण पैदा होने वाला बच्चा कोई अपराधी नहीं है। उसे कलंक का प्रतीक भी नहीं कहा जा सकता है। इस…

सौजन्य से:- Navbharat Times
क्या है मामला?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेप के कारण पैदा लेने वाले बच्चे को लेकर बड़ा आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण पैदा होने वाला बच्चा कोई अपराधी नहीं है। उसे कलंक का प्रतीक भी नहीं कहा जा सकता है। इस प्रकार के बच्चे को भी सम्मान, सांविधानिक संरक्षण और बराबरी का अधिकार है। जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मेरठ निवासी नाबालिग पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के जन्म के तरीके या परिस्थितियों से उसके मानवीय मूल्य पर कोई दाग नहीं लगता।हाई कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं में पीड़िता के साथ हुई हिंसा, शोषण और अन्याय ही सच्चा कलंक है। मामले की सुनवाई के क्रम में पीठ ने चंद्रगुप्त मौर्य जैसे ऐतिहासिक चरित्र का उदाहरण दिया। कोर्ट ने कहा कि कई महान विभूतियों का जन्म विषम परिस्थितियों में हुआ। इन विभूतियों ने विषम परिस्थितियों के बाद भी इतिहास रच दिया।
जताई थी गर्भपात की इच्छा
मेरठ की रहने वाली नाबालिग पीड़िता ने गर्भपात की इच्छा जताई थी। मामले में सीएमओ, पुलिस चाइल्ड वेलफेयर कमिटी की लापरवाही सामने आई है। इस कारण 54 दिन बीत गए। अब गर्भपात संभव नहीं रहा। इस मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि नौकरशाही की लापरवाही के कारण पीड़िता को संघर्ष करना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि कानून में गर्भपात का प्रावधान है। इसके बाद भी अधिकारियों की लापरवाही की वजह से पीड़िता को संघर्ष करना पड़ा। कोर्ट ने इसे व्यवस्थागत विफलता करार दिया। साथ ही, सभी जिलों में मेडिकल बोर्ड के गठन के निर्देश दिए।कोर्ट ने आंकड़ों पर जताई हैरानी
हाई कोर्ट ने मामले में प्रदेश के सभी 75 जिलों से मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के क्रियान्वयन से संबंधित आंकड़े मांगे। रिपोर्ट में सामने आया कि कई जिलों में दशकों से एमटीपी एक्ट के लिए जरूरी मेडिकल बोर्ड का गठन ही नहीं हुआ है। यह कानून 1971 में लागू हुआ था। इसके बावजूद झांसी, गोंडा और प्रयागराज जैसे जिलों में एमटीपी बोर्ड 2023 में गठित किया गया। कोर्ट ने इस प्रकार की लापरवाही पर हैरानी जताई।'सरकार बनाए कानून'
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में सरकार को रेप पीड़िता के जन्म लेने वाले बच्चे को पीड़ित का दर्जा देने संबंधी कानून बनाने की सलाह दी। दरअसल, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि देश में ऐसा कोई विशेष कानून नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने रेप के कारण जन्म लेने वाले बच्चे को स्वतंत्र अधिकारों और सम्मान को सुनिश्चित करने वाले कानून की जरूरत बताई। कोर्ट ने ब्रिटेन, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार भी इस प्रकार का कानून बनाए।कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत रेप के कारण पैदा होने वाले बच्चे को पीड़ित का दर्जा दिया जाए। ऐसे बच्चों को मुआवजा, शिक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल का हक मिले। उनके पुनर्वास और गोद लेने की नीति को स्पष्ट किया जाए। कोर्ट ने मामले में तीन माह में विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून बनने तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हर जिले में ऐसे बच्चों के हितों की निगरानी करेगा।
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