सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए 'पर्यावरण क्षतिपूर्ति' को लेकर सख्त नियम बनाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को इन नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने और उसे वसूलने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है।

सौजन्य से:- hindi.downtoearth.org.in
स्वच्छताकूड़ा फैलाया तो खैर नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए 'पर्यावरण क्षतिपूर्ति' को लेकर सख्त नियम बनाने के निर्देश
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 का उल्लंघन करने वालों को पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी; सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है।
सारांश
- सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने और उसकी वसूली के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है।
- अदालत ने साफ किया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति केवल जुर्माना नहीं, बल्कि ‘पोल्यूटर पे’ सिद्धांत के तहत पर्यावरण को हुए वास्तविक नुकसान की भरपाई का माध्यम है, जिसे दंड के अतिरिक्त वसूला जाएगा।
- न्यायालय ने निर्देश दिया कि क्षतिपूर्ति का निर्धारण वैज्ञानिक आधार पर हो, जिसमें प्रदूषण से हुए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नुकसान, प्रभावित लोगों पर पड़े असर, पर्यावरण की बहाली की लागत तथा प्रदूषक की आर्थिक क्षमता जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए।
- साथ ही, मंत्रालय को सीपीसीबी के मौजूदा दिशानिर्देशों और अन्य नियमों को आधार बनाकर व्यापक नीति तैयार करने को कहा गया है।
- रोजाना लगभग 1.7 लाख टन ठोस कचरा पैदा होने और उसके बड़े हिस्से के उचित प्रबंधन न होने के बीच यह आदेश कचरा फैलाने वालों की जवाबदेही तय करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
- यदि इन निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ, तो भविष्य में प्रदूषण फैलाने वालों को केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को हुए हर नुकसान की वास्तविक कीमत भी चुकानी पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने देश में ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। 4 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को इन नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने और उसे वसूलने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है।
अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय से कहा है कि वह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी सिद्धांतों, मौजूदा नियमों और अन्य प्रासंगिक दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के नियम 17(2) के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करे।
मंत्रालय को इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के माध्यम से देने को कहा गया है। मामले में अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।
गौरतलब है कि देश में रोजाना 1.7 लाख टन कचरा पैदा हो रहा है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा आज भी ठीक से प्रोसेस नहीं हो पा रहा। इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के कड़ाई से पालन के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे।
जुर्माने का विकल्प नहीं पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति
सुनवाई के दौरान अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने और उसकी वसूली की स्पष्ट व्यवस्था कब बनाई जाएगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति किसी भी जुर्माने या दंड का विकल्प नहीं है। यह 'पोल्यूटर पे' यानी प्रदूषण फैलाने वाले दौरा भुगतान किया जाएगा के सिद्धांत पर आधारित नुकसान की भरपाई के लिए निर्धारित राशि है, जिसे जुर्माने के अतिरिक्त देना होगा।
यह भुगतान तब तक जारी रह सकता है, जब तक प्रदूषण से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई और बहाली नहीं हो जाती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह राज्य की संबंधित एजेंसियों का दायित्व है कि वे प्रदूषण से हुए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करें और पर्यावरण की बहाली के लिए आवश्यक क्षतिपूर्ति प्रदूषक से वसूलें।
अदालत ने यह भी कहा कि क्षतिपूर्ति तय करते समय केवल प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और समाज को हुए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष (मूर्त और अमूर्त) नुकसान का भी आकलन किया जाना चाहिए।
पर्यावरणीय नुकसान का होगा वैज्ञानिक हिसाब-किताब
अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि तय करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए। इसमें प्रदूषण फैलाने वाले की आर्थिक क्षमता, पर्यावरणीय नुकसान के वैज्ञानिक आकलन की लागत, प्रभावित लोगों और पर्यावरण को हुए नुकसान की गंभीरता, तथा प्रदूषित क्षेत्र की सफाई, उपचार और पर्यावरणीय बहाली पर होने वाला वास्तविक खर्च शामिल होगा।
साथ ही, न्यायालय ने कहा कि इस प्रक्रिया में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मौजूदा दिशानिर्देश एक महत्वपूर्ण आधार और संदर्भ के रूप में उपयोगी साबित होंगे।
सीपीसीबी के मौजूदा दिशानिर्देशों से मिलेगी दिशा
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि केंद्रीय कार्यान्वयन समिति इस विषय में सीपीसीबी और अन्य नियामक संस्थाओं द्वारा पहले से जारी दिशा-निर्देशों का भी अध्ययन करे।
अदालत ने विशेष रूप से अगस्त 2024 में जारी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के आकलन संबंधी संशोधित दिशानिर्देशों तथा खतरनाक अपशिष्ट नियम, 2016 के उल्लंघन पर सीपीसीबी द्वारा जारी क्षतिपूर्ति निर्धारण के दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय कार्यान्वयन समिति का गठन कर दिया गया है, जो नियमों के पालन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अब जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे प्रदूषण फैलाने वाले
सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस आदेश के साथ यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यावरण को हुए वास्तविक नुकसान की भरपाई भी प्रदूषण फैलाने वालों से कराई जाएगी।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब निगाहें पर्यावरण मंत्रालय पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्द और कितने प्रभावी तरीके से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के दिशा-निर्देश तैयार करता है। यदि ये नियम प्रभावी ढंग से लागू हुए, तो देश में कचरा प्रबंधन कानूनों के उल्लंघन पर केवल दंड ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को हुए हर नुकसान की कीमत भी चुकानी पड़ेगी।
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
देवेंद्रकुला वेल्लालर ने SC टैग छोड़कर सामाजिक सम्मान की मांग की

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: टिकट न होने पर भी ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

अदालत‑एडीआर सहयोग से पारिवारिक विवादों का तेज़ समाधान

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: मेरठ में 16,000‑से‑अधिक संपत्तियों पर कार्रवाई

परिवारिक विवादों में न्यायालय‑एडीआर का सहयोगी मॉडल

टिकट न मिलने पर भी 8 लाख का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी परिवार को

टिकट न मिलने पर भी मुआवजा मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट ने 8 लाख की रक़म बहाल की

सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी ज़ोन में वाणिज्यिक कार्यवाही पर सील लगाने का कड़ा आदेश
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने चीनी‑एथेनॉल मुआवजा दावों के 103.4 अरब रियाल के मुद्दे को पूर्ण पीठ तक पहुँचाया
- सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध कॉलोनियों पर सख्त कदम, न्यायिक आयोग बनाकर ध्वस्तीकरण का आदेश
- मोदी सरकार ने OBC ‘क्रीमी लेयर’ नियम लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो साल की रियायत माँगी
- अंतर्राष्ट्रीय कानून की स्नातक ने नौकरी छोड़कर सब्जी विक्रय में रोज़ 200 किग्रा बेचना शुरू किया
- केन्द्र सरकार ने OBC क्रीमी लेयर नियम लागू करने के लिए दो साल की राहत की माँग की
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों में 12 जजों को स्थायी पद दिलवाया
- शरई अदालत में बढ़ते तलाक‑नफका के केस, हर महीने 30 मामले, काउंसलिंग से समाधान
- LiveLaw ने लॉन्च किया ‘ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट’ – न्यायिक अपडेट अब तुरंत

