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अदालत ने पति के दुराचार को मान्यता देते हुए महिला को तलाक दिलाया

परिवार न्यायालय ऊना ने पत्नी की मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के गवाहियों के आधार पर पति को एकतरफा रूप से तलाक दिया। पति ने मुकदमे में जवाब न देते हुए अनुपस्थित रहने के कारण उसे डिफ़ॉल्ट माना गया।

1 अक्टूबर 2026 को 09:04 pm बजे
अदालत ने पति के दुराचार को मान्यता देते हुए महिला को तलाक दिलाया

सौजन्य से:- Amar Ujala

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Una News: पीट कर घर से निकाला, अदालत ने माना क्रूरता, पति से मिला तलाक

Fri, 02 Oct 2026 12:29 AM IST

शिमला ब्यूरो

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना

Updated Fri, 02 Oct 2026 12:29 AM IST

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दुलैहड़ (ऊना)। मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और घर से निकालने के आरोपों के मामले में परिवार न्यायालय ऊना ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पति से तलाक की डिक्री जारी की है। अदालत ने पत्नी की गवाही और स्वतंत्र गवाह के बयान के आधार पर पति की ओर से की गई शारीरिक और मानसिक क्रूरता को साबित माना। मामले में पति के जवाब दाखिल न करने और बाद में सुनवाई से अनुपस्थित रहने पर अदालत ने उसे एकतरफा घोषित कर दिया।

महिला ने परिवार न्यायालय में दायर याचिका में बताया था कि उसका विवाह तीन नवंबर 2017 को हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही उसे दहेज कम लाने के लिए ताने दिए जाने लगे और नकद राशि व दहेज की मांग की जाने लगी। महिला ने पति पर छोटी-छोटी बातों को लेकर मारपीट करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। यह भी आरोप लगाया कि पति उसके चरित्र पर संदेह करता था, उसे अन्य लोगों से बातचीत करने से रोकता था और उसके परिवार को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देता था। महिला के मुताबिक अगस्त 2023 में पति ने उसके साथ मारपीट की और उसे बेटी समेत घर से निकाल दिया। इसके बाद महिला ने मामले को पुलिस और पंचायत के समक्ष उठाया लेकिन पंचायत स्तर पर विवाद नहीं सुलझा। इसके बाद महिला ने विवाह विच्छेद के लिए परिवार न्यायालय में याचिका दायर की। मामले में पति पांच जनवरी 2026 को अदालत में पेश हुआ। इसके बाद केस को मध्यस्थता केंद्र ऊना भेजा गया लेकिन वहां भी समझौता नहीं हो सका। आठ मई 2026 को पति या उसकी ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद मामले की सुनवाई एकतरफा साक्ष्य के आधार पर आगे बढ़ी। महिला ने अदालत में स्वयं गवाही दी। इसके अलावा स्वतंत्र गवाह ने भी बयान दर्ज करवाया। अदालत के अनुसार महिला की गवाही का कोई प्रतिवाद नहीं हुआ और स्वतंत्र गवाह ने भी उसके आरोपों की पुष्टि की। अदालत ने माना कि लगातार शारीरिक मारपीट, अपमान, चरित्र पर आरोप और धमकियां मानसिक और शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने कहा कि दोनों के वैवाहिक संबंध इतने खराब हो चुके हैं कि उनके दोबारा साथ रहने की संभावना नहीं है। साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश-1 परिवार न्यायालय ऊना राजिंद्र कुमार ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(आई ए) के तहत क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की याचिका स्वीकार कर ली। 30 सितंबर 2026 को सुनाए फैसले में अदालत ने विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री जारी की।

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महिला ने परिवार न्यायालय में दायर याचिका में बताया था कि उसका विवाह तीन नवंबर 2017 को हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही उसे दहेज कम लाने के लिए ताने दिए जाने लगे और नकद राशि व दहेज की मांग की जाने लगी। महिला ने पति पर छोटी-छोटी बातों को लेकर मारपीट करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। यह भी आरोप लगाया कि पति उसके चरित्र पर संदेह करता था, उसे अन्य लोगों से बातचीत करने से रोकता था और उसके परिवार को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देता था। महिला के मुताबिक अगस्त 2023 में पति ने उसके साथ मारपीट की और उसे बेटी समेत घर से निकाल दिया। इसके बाद महिला ने मामले को पुलिस और पंचायत के समक्ष उठाया लेकिन पंचायत स्तर पर विवाद नहीं सुलझा। इसके बाद महिला ने विवाह विच्छेद के लिए परिवार न्यायालय में याचिका दायर की। मामले में पति पांच जनवरी 2026 को अदालत में पेश हुआ। इसके बाद केस को मध्यस्थता केंद्र ऊना भेजा गया लेकिन वहां भी समझौता नहीं हो सका। आठ मई 2026 को पति या उसकी ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद मामले की सुनवाई एकतरफा साक्ष्य के आधार पर आगे बढ़ी। महिला ने अदालत में स्वयं गवाही दी। इसके अलावा स्वतंत्र गवाह ने भी बयान दर्ज करवाया। अदालत के अनुसार महिला की गवाही का कोई प्रतिवाद नहीं हुआ और स्वतंत्र गवाह ने भी उसके आरोपों की पुष्टि की। अदालत ने माना कि लगातार शारीरिक मारपीट, अपमान, चरित्र पर आरोप और धमकियां मानसिक और शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने कहा कि दोनों के वैवाहिक संबंध इतने खराब हो चुके हैं कि उनके दोबारा साथ रहने की संभावना नहीं है। साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश-1 परिवार न्यायालय ऊना राजिंद्र कुमार ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(आई ए) के तहत क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की याचिका स्वीकार कर ली। 30 सितंबर 2026 को सुनाए फैसले में अदालत ने विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री जारी की।

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